मोहन भागवत का गोरखपुर दौरा और बड़ा संदेश RSS सरसंघचालक डॉ. मोहन भागवत 14 फरवरी से तीन दिवसीय प्रवास पर गोरखपुर पहुंचे थे। उन्होंने योगिराज बाबा गंभीरनाथ प्रेक्षागृह में स्वयंसेवकों की बैठक, सामाजिक सद्भाव बैठक, प्रमुख जन गोष्ठी और कुटुंब स्नेह मिलन जैसे कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। मुख्य रूप से संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों की समीक्षा और योजना पर चर्चा हुई।
भागवत ने स्पष्ट कहा कि RSS की नजर सिर्फ भाजपा पर नहीं, बल्कि सभी राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं और समर्थकों पर है। उन्होंने स्वयंसेवकों को निर्देश दिया कि बिना किसी भेदभाव के सभी दलों के लोगों से संपर्क बढ़ाएं, उनकी दोस्ती करें और उन्हें संघ की विचारधारा से जोड़ने का प्रयास करें। फ्रंटलाइन नेताओं के बजाय उनके समर्थकों से जुड़ने पर जोर दिया। उन्होंने जातीय विभाजन से ऊपर उठने की सलाह दी—सवर्ण-अवर्ण के फेर में न पड़ें, हिंदुत्व और अपनेपन के आधार पर सभी को साथ लाएं। सहभोज के आयोजन पर बल दिया, कहा कि सिर्फ दूसरों के घर जाकर भोजन नहीं, उन्हें अपने घर बुलाएं। मतांतरण को गंभीर समस्या बताते हुए कहा कि दोषी ठहराने से नहीं, बल्कि समस्या सुनकर और दूर करके लोगों को संगठित करें। परिवार को संस्कार की पहली पाठशाला और राष्ट्र की शक्ति बताया। यह बयान 2027 चुनाव से पहले RSS के विस्तार और हिंदू एकता की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है, जहां समाज को जातीय आधार पर बांटने वाली राजनीति का जवाब देने की कोशिश दिख रही है।
मायावती का BSP में फेरबदल: नौशाद अली को 4 मंडल, आकाश आनंद के ससुर का कद बढ़ा BSP सुप्रीमो मायावती ने पूर्व मंत्री नसीमुद्दीन सिद्दीकी के सपा में शामिल होने के एक दिन बाद संगठन में बड़ा बदलाव किया। यूपी में नौशाद अली को चार महत्वपूर्ण मंडलों—मेरठ, आगरा, लखनऊ और कानपुर—का मुख्य प्रभारी बनाया गया। जाफर मलिक को सहारनपुर, मुरादाबाद और अलीगढ़ मंडल सौंपा गया। भतीजे आकाश आनंद के ससुर अशोक सिद्धार्थ (पूर्व राज्यसभा सदस्य) का कद बढ़ाया—उन्हें दिल्ली, छत्तीसगढ़, गुजरात और केरल का केंद्रीय प्रभारी बनाया। पहले यह जिम्मेदारी रामजी गौतम के पास थी। उत्तराखंड में मुनकाद अली, गिरीश चंद्र जाटव और आदेश कुमार को जिम्मेदारियां दी गईं।
वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार, यह फेरबदल कैडर को मजबूत करने और दलित-मुस्लिम गठजोड़ को फिर से सक्रिय करने का संकेत है। मुस्लिम चेहरों को प्रमुख मंडलों की कमान देकर मायावती ने पश्चिमी यूपी से अवध तक अपनी पकड़ मजबूत करने की रणनीति अपनाई है। 2027 से पहले BSP कैडर को चुनावी मोड में लाने का प्रयास दिख रहा है। राजनीतिक मायने RSS का विस्तार और एकता का संदेश जहां हिंदू समाज को एकजुट करने की कोशिश है, वहीं BSP का फेरबदल जातीय-धार्मिक समीकरणों को साधने का प्रयास लगता है। दोनों संगठन 2027 यूपी चुनाव में अपनी-अपनी रणनीति से मैदान में उतर रहे हैं, जहां जाति और समाज की एकता निर्णायक भूमिका निभा सकती है।

