नोएडा प्राधिकरण (Noida Authority) का नियोजन (Planning) विभाग इन दिनों अपनी कार्यशैली और भारी सुस्ती को लेकर गंभीर चर्चाओं में है। विभाग में मचे प्रशासनिक घमासान और उच्चाधिकारियों पर चल रही जाँच के चलते पूरा प्लानिंग डिपार्टमेंट लगभग स्तब्ध और पंगु हो चुका है। इसका सीधा खामियाजा आम जनता, आवंटियों और किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
लखनऊ से चल रही है GM मीना भार्गव के खिलाफ जाँच
प्राधिकरण की महाप्रबंधक (प्रोजेक्ट/प्लानिंग) मीना भार्गव के खिलाफ शासन स्तर (लखनऊ) से उच्चस्तरीय जाँच बैठाई गई है। इस जाँच के शुरू होने के बाद से ही विभाग में अजीब सा सन्नाटा पसरा हुआ है। जानकारों का कहना है कि विभागीय फाइलों पर निर्णय लेने से अधिकारी बच रहे हैं, जिसका सीधा असर रोजमर्रा के कामों पर पड़ रहा है। जिम्मेदारी तय न होने और अधिकारियों के रक्षात्मक रुख अपनाने के कारण पूरा सिस्टम पटरी से उतर गया है।
आम जनता और किसानों की प्रमुख समस्याएं
- किसानों के 5% भूखंडों का नियोजन अटका: नोएडा क्षेत्र के जिन किसानों को आबादी के एवज में 5% भूखंड मिलने हैं, उनके नियोजन और लेआउट से जुड़े मामले महीनों से फाइलों में धूल फांक रहे हैं। किसान अपने हक के लिए प्राधिकरण के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
- नक्शा पास कराने में महीनों की देरी: घर बनाने का सपना संजोने वाले आम लोग जब अपने भवनों के नक्शों की स्वीकृति (Building Map Approval) के लिए आवेदन करते हैं, तो तय समय सीमा के विपरीत उन्हें महीनों इंतजार करना पड़ रहा है।
- कंपलीशन सर्टिफिकेट (Completion Certificate) के लिए लंबी दौड़: निर्माण पूरा होने के बाद कंप्लीशन या ऑक्यूपेंसी सर्टिफिकेट प्राप्त करना भी किसी चुनौती से कम नहीं रह गया है। फाइलों पर हस्ताक्षर करने के लिए कोई भी जिम्मेदार अधिकारी आगे नहीं आ रहा है।
- व्यावसायिक और औद्योगिक भूखंडों के प्रोजेक्ट अटके: औद्योगिक और कमर्शियल प्रोजेक्ट्स के लेआउट अप्रूवल रुकने से निवेशकों में भी गलत संदेश जा रहा है, जिससे नोएडा के विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
कार्यशैली पर खड़े हो रहे बड़े सवाल
एक तरफ उत्तर प्रदेश सरकार और नोएडा प्राधिकरण के सीईओ भ्रष्टाचार मुक्त और समयबद्ध सेवाएं (Time-bound Services) देने का दावा करते हैं, वहीं दूसरी तरफ प्लानिंग डिपार्टमेंट की यह सुस्त कार्यशैली दावों की पोल खोल रही है। नियमानुसार जहाँ नक्शे से जुड़े काम कुछ ही हफ्तों में हो जाने चाहिए, वहाँ महीनों की देरी आम बात बन गई है। सूत्रों का कहना है कि अधिकारी जाँच के डर से कोई भी जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं, और इस खींचतान में पिस आम जनता रही है जो हर छोटे काम के लिए महीनों से प्राधिकरण के चक्कर काट रही है।
नोएडा प्राधिकरण के नियोजन विभाग में फैली इस अकार्यकुशलता और प्रशासनिक सुस्ती पर यदि जल्द ही उच्च स्तर पर अंकुश नहीं लगाया गया, तो जनता का आक्रोश और बढ़ सकता है। आवंटी और किसान अब इस बात की मांग कर रहे हैं कि जाँच प्रक्रिया अपनी जगह चले, लेकिन जनहित के जरूरी कामों और फाइलों के निस्तारण पर रोक नहीं लगनी चाहिए ताकि शहर का विकास और जनता की राहत बाधित न हो।

