नोएडा। आयकर विभाग ने नोएडा के रजिस्ट्रार कार्यालय पर बड़ी कार्रवाई करते हुए करोड़ों रुपये की संदिग्ध प्रॉपर्टी डील के अहम सुराग हासिल किए हैं। विभाग को फॉर्म 61 और फॉर्म 61A में गंभीर अनियमितताएं मिली हैं, जो कर चोरी की ओर इशारा कर रही हैं। आयकर विभाग ने रजिस्ट्रार कार्यालय से विस्तृत जानकारी मांगी है और अब कर चोरों पर शिकंजा कसने की तैयारी पूरी कर ली गई है।
क्या है पूरा मामला
आयकर विभाग को लंबे समय से संदेह था कि नोएडा में प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त में बड़े पैमाने पर कर चोरी हो रही है। कई सौदों में नकद लेनदेन कर असली कीमत छुपाई जा रही थी और सरकारी रिकॉर्ड में कम मूल्य दर्शाया जा रहा था। इसी कड़ी में विभाग ने नोएडा रजिस्ट्रार कार्यालय पर छापेमारी की और दस्तावेजों की बारीकी से जांच की। जांच के दौरान फॉर्म 61 और फॉर्म 61A में व्यापक अनियमितताएं सामने आईं जो करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन की ओर इशारा कर रही हैं।
क्या होता है फॉर्म 61
फॉर्म 61 वह दस्तावेज है जो उन व्यक्तियों द्वारा भरा जाता है जिनकी आय कृषि से होती है और जिनके पास पैन कार्ड नहीं होता। जब ऐसा व्यक्ति कोई बड़ा वित्तीय लेनदेन करता है — जैसे प्रॉपर्टी खरीदना या बेचना — तो पैन कार्ड की जगह फॉर्म 61 जमा किया जाता है। इस फॉर्म में व्यक्ति यह घोषणा करता है कि उसकी आय केवल कृषि से है। कर चोर अक्सर इस फॉर्म का दुरुपयोग करते हैं और बड़ी प्रॉपर्टी डील में पैन कार्ड देने से बचने के लिए फर्जी तरीके से फॉर्म 61 लगा देते हैं, ताकि आयकर विभाग की नजर उन पर न पड़े।
क्या होता है फॉर्म 61A
फॉर्म 61A एक स्टेटमेंट ऑफ फाइनेंशियल ट्रांजेक्शन (SFT) है जिसे बैंक, रजिस्ट्रार, म्यूचुअल फंड कंपनियां और अन्य संस्थाएं आयकर विभाग को जमा करती हैं। इसमें एक निश्चित सीमा से अधिक के सभी बड़े वित्तीय लेनदेन की जानकारी दर्ज होती है। प्रॉपर्टी के मामले में रजिस्ट्रार कार्यालय की यह जिम्मेदारी होती है कि 30 लाख रुपये या उससे अधिक की सभी प्रॉपर्टी डील की जानकारी फॉर्म 61A के जरिए आयकर विभाग को दे। यह फॉर्म आयकर विभाग के लिए कर चोरी पकड़ने का सबसे अहम हथियार है।
फॉर्म 61 और 61A में क्या अंतर है
फॉर्म 61 खरीदार या विक्रेता द्वारा भरा जाता है जबकि फॉर्म 61A रजिस्ट्रार जैसी संस्था द्वारा विभाग को सौंपा जाता है। फॉर्म 61 पैन कार्ड न होने की स्थिति में विकल्प के तौर पर इस्तेमाल होता है जबकि फॉर्म 61A बड़े लेनदेन की अनिवार्य सूचना है। सरल शब्दों में कहें तो फॉर्म 61 व्यक्तिगत घोषणा है और फॉर्म 61A संस्थागत रिपोर्टिंग है।
कहां मिली अनियमितताएं
आयकर विभाग की जांच में सामने आया कि कई प्रॉपर्टी डील में खरीदारों ने पैन कार्ड की जगह फर्जी या अनुचित तरीके से फॉर्म 61 लगाया। वहीं रजिस्ट्रार कार्यालय द्वारा फॉर्म 61A में कई बड़े लेनदेन की जानकारी या तो छुपाई गई या गलत तरीके से दर्ज की गई। इससे करोड़ों रुपये के प्रॉपर्टी सौदे आयकर विभाग की नजर से ओझल रहे और बड़े पैमाने पर कर चोरी होती रही।
अब क्या होगा आगे
आयकर विभाग ने रजिस्ट्रार कार्यालय से संदिग्ध लेनदेन की पूरी सूची और संबंधित दस्तावेज मांगे हैं। विभाग अब उन सभी खरीदारों और विक्रेताओं की पहचान करेगा जिन्होंने पैन कार्ड छुपाकर या फर्जी दस्तावेजों के जरिए प्रॉपर्टी डील की है। जांच पूरी होने के बाद दोषियों पर भारी जुर्माना और कर वसूली की कार्रवाई की जाएगी। गंभीर मामलों में आपराधिक मुकदमा दर्ज करने की भी तैयारी है।
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