Suspended Circle Officer of Uttar Pradesh Police: उत्तर प्रदेश पुलिस के निलंबित सर्किल ऑफिसर (सीओ) ऋषिकांत शुक्ला की आय से अधिक संपत्ति मामले में विजिलेंस जांच नए मोड़ पर पहुंच गई है। नवंबर 2025 में निलंबित हुए इस पीपीएस अधिकारी की करीब 100 करोड़ रुपये की संपत्ति का खुलासा होने के बाद अब गौतम बुद्ध नगर जिले में बेनामी संपत्तियों की तलाश तेज हो गई है। विजिलेंस टीम नोएडा अथॉरिटी, ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी और यमुना एक्सप्रेसवे अथॉरिटी में तीन संदिग्ध बेनामी प्रॉपर्टी (करीब 8 करोड़ मूल्य) की जांच कर रही है।
एसआईटी की नवंबर 2025 की रिपोर्ट में ऋषिकांत शुक्ला के नाम या पैन से जुड़ी 12 संपत्तियां (92 करोड़) मिली थीं। इसके अलावा कानपुर, चंडीगढ़ और नोएडा में बेनामी संपत्तियों के सुराग मिले। प्रमुख सचिव सतर्कता के निर्देश पर विजिलेंस अब इन बेनामी प्रॉपर्टी की डिटेल्स (किसके नाम पर, कहां स्थित) खंगाल रही है। सूत्रों के मुताबिक, ये संपत्तियां शुक्ला के करीबियों, साथियों या साझेदारों के नाम पर हो सकती हैं।
कैसे बना ‘धन कुबेर’?
ऋषिकांत शुक्ला 1998 से 2009 तक कानपुर में दरोगा और इंस्पेक्टर रहे। इस दौरान वे जेल में बंद अधिवक्ता अखिलेश दुबे गिरोह के करीबी बताए जाते हैं। एसआईटी जांच में सामने आया कि उन्होंने ठेकेदारी, जमीन कब्जाने, फर्जी मुकदमों और धमकी से अकूत संपत्ति बनाई। कुल संपत्ति 100 से 300 करोड़ तक अनुमानित है। इनमें कानपुर में 11 दुकानें, चार मंजिला इमारतें, गेस्ट हाउस और रियल एस्टेट शामिल हैं। उनके बेटे पर 33 कंपनियों के जरिए काले धन को सफेद करने का भी आरोप है।
निलंबित सीओ ने नवंबर 2025 में वीडियो जारी कर आरोपों को ‘माफिया-अपराधियों की साजिश’ बताया और कहा कि वे जांच का सामना करने को तैयार हैं। लेकिन विजिलेंस ने 10 से ज्यादा पुलिसकर्मियों के नाम भी जांच दायरे में लिए हैं।
आगे क्या?
विजिलेंस जांच पूरी होने पर संपत्ति कुर्की, गिरफ्तारी और आपराधिक मुकदमे की कार्रवाई संभव है। यूपी पुलिस में यह बड़ा भ्रष्टाचार मामला माना जा रहा है, जो कानपुर के ‘ऑपरेशन महाकाल’ से जुड़ा है। जांच में नए खुलासे होने की उम्मीद है, खासकर नोएडा की बेनामी संपत्तियों को लेकर।
यह प्रकरण पुलिस महकमे में सुधार और सतर्कता की जरूरत को फिर उजागर कर रहा है।

