सुप्रीम कोर्ट की दिल्ली-NCR प्रदूषण पर सख़्त टिप्पणी: “कार स्टेटस सिंबल बन चुकी है, इसे रोक पाना आसान नहीं”- CJI सूर्यकांत

Pollution:

Supreme Court on Delhi pollution ।सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ते प्रदूषण को लेकर अहम सुनवाई हुई। इस दौरान चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (CJI) सूर्यकांत ने समाज में बदलती जीवनशैली और निजी वाहनों के बढ़ते चलन पर गंभीर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि आज के समय में कार सिर्फ़ ज़रूरत नहीं, बल्कि एक स्टेटस सिंबल बन चुकी है, जिसे पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं है।

कार संस्कृति और प्रदूषण का गहरा संबंध
CJI सूर्यकांत ने कहा कि लोग कार खरीदने के लिए वर्षों तक पैसे बचाते हैं। ऐसे में यह उम्मीद करना कि लोग निजी वाहनों का इस्तेमाल अचानक छोड़ देंगे, व्यावहारिक नहीं है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि कारों की बढ़ती संख्या सीधे तौर पर वायु प्रदूषण को बढ़ा रही है, लेकिन समाज की मानसिकता भी इस समस्या का बड़ा कारण बन चुकी है।

साइकिल और सार्वजनिक परिवहन से दूरी
सुनवाई के दौरान CJI ने चिंता जताते हुए कहा कि लोगों ने साइकिल का इस्तेमाल लगभग बंद कर दिया है। कभी जो साइकिल आम आदमी की पहचान हुआ करती थी, आज उसे पीछे छोड़ दिया गया है। सार्वजनिक परिवहन के बजाय निजी वाहन अपनाने की प्रवृत्ति ने प्रदूषण की समस्या को और गंभीर बना दिया है।

नीतिगत समाधान पर ज़ोर
सुप्रीम कोर्ट ने संकेत दिए कि केवल प्रतिबंध लगाकर प्रदूषण पर काबू नहीं पाया जा सकता। इसके लिए दीर्घकालिक और व्यवहारिक नीतियों की ज़रूरत है। अदालत ने सरकारों से ऐसे उपाय करने पर ज़ोर दिया, जिनसे लोग स्वेच्छा से सार्वजनिक परिवहन, साइकिल और पर्यावरण के अनुकूल साधनों को अपनाएं।

प्रदूषण पर सामूहिक जिम्मेदारी
CJI सूर्यकांत की टिप्पणी से यह साफ़ होता है कि प्रदूषण केवल प्रशासनिक समस्या नहीं, बल्कि सामाजिक व्यवहार से जुड़ा मुद्दा भी है। जब तक समाज अपनी आदतों और प्राथमिकताओं में बदलाव नहीं लाएगा, तब तक दिल्ली जैसे महानगरों में प्रदूषण पर पूरी तरह नियंत्रण पाना कठिन बना रहेगा।

 

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