नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को UPI लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने के केंद्र सरकार के फैसले पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। अदालत नए UPI शुल्क ढांचे को चुनौती देने वाली एक याचिका पर सुनवाई कर रही थी। यह व्यवस्था तय श्रेणी के पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) लेनदेन पर लागू होगी, जिनकी राशि 2,000 रुपये से अधिक है।
15 सितंबर को हुआ था ऐलान
UPI लेनदेन के लिए MDR व्यवस्था की घोषणा मंगलवार, 15 सितंबर को की गई थी। नए नियम के तहत 2,000 रुपये से ऊपर के मर्चेंट भुगतान पर एक समान दर से 0.4 प्रतिशत MDR वसूला जाएगा। कुछ मामलों में इसमें अपवाद भी रखे गए हैं।
क्या है MDR?
मर्चेंट डिस्काउंट रेट वह शुल्क है जो दुकानदार या व्यापारी डिजिटल भुगतान की सुविधा देने वाली संस्थाओं को चुकाते हैं। इनमें बैंक, पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर और थर्ड-पार्टी ऐप शामिल हैं।
ग्राहकों पर सीधा बोझ नहीं
बताया गया है कि यह शुल्क “मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम” के भीतर का चार्ज है, यानी इसका मकसद UPI से भुगतान करने वाले ग्राहकों से सीधे पैसा वसूलना नहीं है। यानी नियम के मुताबिक यह भार भुगतान लेने वाले पक्ष पर पड़ेगा।
आगे क्या
सुप्रीम कोर्ट के रोक से इनकार के बाद फिलहाल यह व्यवस्था लागू रहेगी। याचिका पर आगे की सुनवाई और अपवादों के ब्योरे को लेकर स्थिति साफ होना बाकी है।

