Strict action against child marriage: पश्चिम बंगाल में उम्मीद की नई किरण: मुरशिदाबाद के 7 ग्राम पंचायत बने बाल विवाह मुक्त

Strict action against child marriage: देश में बाल विवाह की सबसे ज्यादा घटनाओं वाले राज्यों में शुमार पश्चिम बंगाल में अब बदलाव की बयार बह रही है। मुरशिदाबाद जिले में 7 ग्राम पंचायतों को बाल विवाह मुक्त घोषित किया गया है। इनमें बहरामपुर ब्लॉक के 5 और हरिहरपारा ब्लॉक के 2 ग्राम पंचायत शामिल हैं। पिछले छह महीनों में यहां कोई बाल विवाह की घटना दर्ज नहीं हुई। यह उपलब्धि लड़कियों, एनजीओ कार्यकर्ताओं, पंचायत प्रतिनिधियों और जिला प्रशासन के संयुक्त प्रयासों का नतीजा है।

स्कूलों की दीवारों पर बाल विवाह के खिलाफ ग्राफिटी और जागरूकता संदेश लिखे जा रहे हैं। भकुड़ी-2 ग्राम पंचायत के चुनरीगाछा प्राथमिक स्कूल में ऐसी ही दीवार लेखन लोगों को इस कुप्रथा के खिलाफ जागरूक कर रहा है।

जिले की लड़कियां इस लड़ाई में सबसे आगे हैं। गजधारपाड़ा हाई स्कूल की कक्षा 11 की छात्रा मोनिजा खातून ने 2025 में अकेले 6 बाल विवाह रोके, जिनमें उनकी दो सहेलियों के भी शामिल थे। उन्होंने चाइल्डलाइन हेल्पलाइन 1098 पर कॉल करके पुलिस की मदद ली। इसी साल जिला प्रशासन ने उन्हें और 17 अन्य लड़कियों को ‘कन्याश्री योद्धा’ सम्मान से नवाजा।

इसी तरह कक्षा 12 की छात्रा मौसुमी खातून ने अपनी शादी का विरोध किया और परिवार को पुलिस में शिकायत की धमकी दी। नूपुर बिस्वास, जिनकी मां खुद 14 साल की उम्र में शादी कर दी गई थीं, अब बीएससी नर्सिंग की तैयारी कर रही हैं। उनकी पढ़ाई की दीवार पर लिखा है — “Hopeless end or endless hope” (निराशाजनक अंत या अनंत आशा)।
स्कूलों में लिंग कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जहां बच्चे लैंगिक भूमिकाओं पर चर्चा करते हैं। गकुंडा प्राथमिक स्कूल में ऐसे सत्र नियमित होते हैं, जहां लड़के-लड़कियां बाल विवाह के नुकसान और हेल्पलाइन नंबर के बारे में सीखते हैं।

पंचायत स्तर पर भी बड़ा बदलाव दिख रहा है। भकुड़ी-2 ग्राम पंचायत की प्रधान चमेली बीबी ने स्कूलों, मस्जिदों और मंदिरों की मदद से जागरूकता अभियान चलाया। पंचायत कार्यालय के बाहर नई तख्ती लगी है, जो इसे बाल विवाह मुक्त घोषित करती है और चेतावनी देती है कि कोई घटना सामने आई तो कार्रवाई होगी।

जिला बाल संरक्षण अधिकारी अर्जुन दत्ता के अनुसार, जून से दिसंबर 2025 तक जिले में 1081 बाल विवाह रोके गए। किशोर गर्भधारण की दर 21% से घटकर 17% हो गई। प्रशासन अब सख्त कार्रवाई कर रहा है — माता-पिता से लेकर पुजारी, डेकोरेटर और पंचायत सदस्यों तक को आरोपी बनाया जा रहा है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार, मुरशिदाबाद में 55.4% महिलाएं 18 साल से पहले शादी कर ली जाती थीं, जो देश में सबसे ज्यादा है। लेकिन अब कन्याश्री योजना, एनजीओ और प्रशासन के प्रयासों से हालात बदल रहे हैं।

भारत ने संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों के तहत 2030 तक बाल विवाह समाप्त करने का वादा किया है। मुरशिदाबाद की ये लड़कियां और ग्राम पंचायतें दिखा रही हैं कि निराशा के अंत से आशा की नई शुरुआत हो सकती है।

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