प्रमुख वजहें जो चुनाव टालने की ओर इशारा कर रही हैं
• जनगणना का प्रभाव: केंद्र सरकार द्वारा घोषित जनगणना के पहले चरण (हाउस लिस्टिंग सर्वे) मई-जून 2026 में यूपी में होना है, जिसमें लाखों कर्मचारी लगेंगे। दूसरे चरण में फरवरी 2027 में जाति आधारित गणना होगी। इससे चुनावी मशीनरी पर दबाव पड़ेगा। कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बोर्ड परीक्षाएं भी इसी दौरान शुरू होंगी, जिससे स्टाफ की कमी हो सकती है।
• ओबीसी आरक्षण आयोग की देरी: पंचायत चुनावों में ओबीसी सीटों का आरक्षण तय करने के लिए समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग का गठन जरूरी है। इसका प्रस्ताव पिछले सात महीनों से लंबित है। अगर फरवरी में भी गठन नहीं हुआ, तो आयोग को रिपोर्ट तैयार करने में 3-4 महीने लगेंगे, जिससे जून 2026 तक देरी हो सकती है। इलाहाबाद हाईकोर्ट में इस मुद्दे पर जनहित याचिका भी दायर की गई है, जिसमें मुख्यमंत्री से आयोग गठन की मांग की गई है।
• मौसम और अन्य चुनाव: जुलाई में बारिश शुरू हो जाती है, जिसमें चुनाव कराना मुश्किल होता है। अक्टूबर-नवंबर में विधान परिषद के शिक्षक-स्नातक सीटों पर चुनाव प्रस्तावित हैं, उसके बाद विधानसभा चुनावों की तैयारियां तेज होंगी।
सरकार और आयोग का पक्ष
राज्य निर्वाचन आयोग ने मतदाता सूची का अंतिम प्रकाशन 27 मार्च 2026 को करने की योजना बनाई है। कुछ अधिकारियों के अनुसार, जनगणना से चुनाव पर असर नहीं पड़ेगा और तैयारी जारी है। पंचायती राज मंत्री ओमप्रकाश राजभर ने पहले समय पर चुनाव का दावा किया था। हालांकि, विभागीय मंत्री और अधिकारी खुले तौर पर कुछ बोलने से बच रहे हैं।
प्रधान संगठनों की मांग
ग्राम प्रधान संगठन उत्तर प्रदेश के अध्यक्ष कौशल किशोर पांडेय ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर मांग की है कि अगर चुनाव टलते हैं, तो राजस्थान की तर्ज पर वर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त किया जाए। इससे गांवों में विकास कार्यों की निरंतरता बनी रहेगी। संगठन ने समय पर चुनाव होने पर स्वागत करने की भी बात कही है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
विपक्षी दल इस मुद्दे को उठा रहे हैं। समाजवादी पार्टी और अन्य विपक्षी नेता इसे सरकार की नाकामी बता रहे हैं। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव टलने से ग्रामीण राजनीति पर असर पड़ेगा और 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सत्ता पक्ष को फायदा हो सकता है।
फिलहाल स्थिति स्पष्ट नहीं है और सभी की नजरें सरकार व राज्य निर्वाचन आयोग की अगली घोषणा पर टिकी हैं। अगर चुनाव टलते हैं, तो यह यूपी में पंचायती राज व्यवस्था के लिए बड़ा बदलाव होगा। मामले पर आगे की अपडेट का इंतजार है।

