‘SOP stands for Stalin Operating Procedure’: तमिलनाडु में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। अभिनेता से नेता बने थलाइवा विजय की पार्टी तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) के प्रमुख विजय ने सलेम में हुई विशाल रैली में मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और डीएमके सरकार पर जमकर निशाना साधा। विजय ने राज्य में ‘SOP’ (स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर) को ‘स्टालिन ऑपरेटिंग प्रोसीजर’ बताते हुए आरोप लगाया कि उनकी पार्टी की रैलियों को अनुमति नहीं दी जा रही, जबकि अन्य पार्टियों को छूट मिल रही है।
सलेम जिले में आयोजित इस जनसभा में हजारों समर्थक उमड़े। विजय ने खुद को अंडरडॉग बताते हुए कहा, “मैंने सब कुछ छोड़कर राजनीति में कदम रखा है। क्या यह गलत था? मुझे कम आंकने की कोशिशें सिर्फ हमें मजबूत बनाएंगी।” उन्होंने तमिलनाडु को अपनी ‘मातृभूमि’ और 8 करोड़ लोगों को अपना परिवार बताते हुए न्याय की लड़ाई लड़ने का संकल्प लिया।
डीएमके और एआईएडीएमके पर तंज
विजय ने स्थापित पार्टियों पर हमला बोलते हुए कहा कि उनके पास जनता की लूट के अलावा कोई अनुभव नहीं है। टीवीके में ‘लूट’ का अनुभव नहीं है, लेकिन लोगों की सेवा का पूरा है। उन्होंने डीएमके और एआईएडीएमके से सवाल किया कि क्या वे बिना अन्नादुराई, एमजीआर या जयललिता की विरासत के एक फीसदी वोट भी ला सकते हैं?
कानून-व्यवस्था और महिलाओं की सुरक्षा पर सवाल
विजय ने राज्य में कानून-व्यवस्था की विफलता, महिलाओं की सुरक्षा और बेरोजगारी पर सवाल उठाए। हालिया घटनाओं का जिक्र करते हुए पूछा कि अगर लोग खुश हैं तो किसान, सफाई कर्मचारी आदि क्यों प्रदर्शन कर रहे? उन्होंने पुलिस नेतृत्व पर भी निशाना साधा और डीजीपी की अनुपस्थिति पर टिप्पणी की।
प्रतीकात्मक उपहार और चुनावी वादे
रैली में विजय को वेल, सेंगोल और चाबुक (व्हिप) भेंट किए गए, जो तमिल राजनीति में गहरे प्रतीक हैं। चाबुक की याद एमजीआर की फिल्म से जोड़ी गई। विजय ने टीवीके का चुनावी घोषणापत्र जल्द जारी करने और झूठे वादे न करने की बात कही। उन्होंने 2026 चुनाव को ‘शुद्ध टीवीके बनाम दुष्ट डीएमके’ की लड़ाई बताया।
रैली में दुखद घटना
रैली के दौरान एक दुखद हादसा हुआ। भीड़ और गर्मी के कारण एक टीवीके कार्यकर्ता/समर्थक (37 वर्षीय व्यक्ति) को दिल का दौरा पड़ा और उनकी मौत हो गई। पुलिस जांच कर रही है। इससे पहले करूर में भी ऐसी घटना हुई थी। विजय की यह रैली और भाषण सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। राजनीतिक विश्लेषक इसे तमिलनाडु की राजनीति में नया बदलाव बता रहे हैं। टीवीके की बढ़ती लोकप्रियता से डीएमके और अन्य पार्टियों में हलचल मच गई है।

