दिल्ली में टूटते झुग्गी: “वोट माँगते वक्त पैर छूए, अब घर तोड़ने के आदेश”, सीएम के अपने गढ़ में फूटा महिलाओं का गुस्सा

दिल्ली में टूटते झुग्गी: दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के अपने निर्वाचन क्षेत्र शालीमार बाग में इन दिनों बड़ा सियासी तूफान उठा हुआ है। DDA और प्रशासन की ओर से 143 संपत्तियों पर भेजे गए तोड़फोड़ के नोटिस ने वहाँ के निवासियों, खासकर महिलाओं, को सड़कों पर उतरने पर मजबूर कर दिया है। पिछले 15 दिनों से विरोध-प्रदर्शन जारी हैं और यह मामला अब राजधानी की बड़ी राजनीतिक लड़ाई बन चुका है।

क्या है मामला?

आजादपुर सब्जी मंडी से मैक्स हॉस्पिटल तक सड़क चौड़ीकरण योजना के तहत शालीमार गाँव और मैक्स रोड किनारे की करीब 143 संपत्तियों को अतिक्रमण घोषित किया गया है। जनवरी 2026 में इन पर पीले निशान लगाए गए थे और बाद में 15 दिन में मकान खाली करने का अल्टीमेटम दे दिया गया। निवासियों का कहना है कि वे यहाँ 30 से 60 साल से रह रहे हैं, उनके पास बिजली-पानी के बिल, हाउस टैक्स रसीदें और PM-UDAY योजना के तहत हुई रजिस्ट्री के दस्तावेज़ भी मौजूद हैं, फिर भी उन्हें बेघर करने की तैयारी की जा रही है।

महिलाओं का आक्रोश

इंदिरा कैंप में नोटिस चिपकने के बाद स्थानीय लोग दहशत में हैं। शालीमार बाग की पूर्व विधायक वंदना कुमारी का कहना है कि लोग समझ नहीं पा रहे कि 15 दिन में वे कहाँ जाएँगे। प्रदर्शन में शामिल एक बुजुर्ग महिला ने भावुक होते हुए कहा कि उन्होंने जीवन भर की जमा-पूँजी इस घर में लगाई है, अब इस उम्र में कहाँ जाएँ। कई महिलाओं ने चेतावनी दी है कि बुलडोजर आया तो वे घर के अंदर ही बैठी रहेंगी।

राजनीतिक घमासान

AAP के वरिष्ठ नेता सौरभ भारद्वाज ने आरोप लगाया कि सीएम रेखा गुप्ता ने चुनाव में जिनके पैर पकड़कर वोट माँगे थे, मुख्यमंत्री बनते ही उन्हीं के मकान तोड़ने के आदेश दे दिए। शालीमार बाग के निवासियों ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें धमकियाँ दी जा रही हैं और मुख्यमंत्री के पति मनमानी कर रहे हैं। AAP नेत्री आतिशी ने कहा कि रेखा गुप्ता बार-बार दावा करती हैं कि उनकी विधानसभा में कोई झुग्गी नहीं टूटेगी, लेकिन हकीकत यह है कि उनकी ही विधानसभा में पहले भी बुलडोजर चल चुका है। प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने हिरासत में भी लिया, जिससे इलाके में आक्रोश और गहरा हो गया।

सरकार का रुख

मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने हाल ही में शालीमार बाग में सड़क, ड्रेन और पार्क से जुड़ी कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया। 14 मार्च को भी उन्होंने इलाके में ड्रेनेज रीमॉडलिंग समेत कई परियोजनाओं की शुरुआत की और सिंगलपुर लेबर चौक पर सड़क चौड़ीकरण कार्यों का औचक निरीक्षण किया। सरकार इसे जनसुविधा और ट्रैफिक समस्या के समाधान के लिए ज़रूरी बताती है, लेकिन प्रभावित परिवारों के पुनर्वास पर अब तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला है।

निष्कर्ष

शालीमार बाग का यह विवाद अब केवल मकानों का मामला नहीं रहा, यह विश्वास और वादों की राजनीति का भी सवाल बन गया है। 143 परिवारों की छत पर लटकी तलवार और सत्ताधारी दल की चुप्पी ने इस मुद्दे को दिल्ली की राजनीति का केंद्रबिंदु बना दिया है।​​​​​​​​​​​​​​​​

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