शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद को मिली अग्रिम जमानत: यौन उत्पीड़न के गंभीर मामले में घिरे ज्योतिष पीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को इलाहाबाद हाईकोर्ट से बड़ी कानूनी राहत मिली है। बुधवार को हाईकोर्ट ने शंकराचार्य की जमानत मंजूर करते हुए आदेश दिया कि चार्जशीट दाखिल होने तक उनकी गिरफ्तारी नहीं होगी। यह फैसला जस्टिस जितेंद्र कुमार सिन्हा की बेंच ने दोपहर बाद 3:45 बजे सुनाया।
क्या है पूरा मामला?
24 जनवरी को आशुतोष महाराज ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती और उनके शिष्य पर माघ मेला-2026 और महाकुंभ-2025 के दौरान नाबालिग बच्चों से यौन शोषण के आरोप लगाए थे। प्रयागराज की अदालत के निर्देश पर झूंसी पुलिस स्टेशन में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती, उनके शिष्य स्वामी मुकुंदानंद गिरी और अन्य के विरुद्ध FIR दर्ज की गई थी। पीड़ित नाबालिगों की मेडिकल रिपोर्ट में कुकर्म की पुष्टि होने के बाद शंकराचार्य की मुश्किलें बढ़ गई थीं।
जमानत की शर्तें
हाईकोर्ट ने जमानत देते हुए कई शर्तें भी लगाई हैं। सबसे अहम शर्त यह है कि दोनों पक्ष — शंकराचार्य और आरोप लगाने वाले आशुतोष ब्रह्मचारी — मीडिया में बयानबाजी नहीं करेंगे और इंटरव्यू नहीं देंगे। शंकराचार्य के विदेश जाने पर भी रोक है — यदि विदेश जाना हो तो हाईकोर्ट से अनुमति लेनी होगी। अगर जमानत की किसी भी शर्त का उल्लंघन हुआ, तो दूसरा पक्ष जमानत रद्द कराने की याचिका दे सकता है।
मीडिया पर भी कोर्ट की फटकार
जमानत आदेश के दौरान अदालत ने हिंदी न्यूज़ चैनलों की भूमिका पर भी गंभीर सवाल उठाए। कोर्ट ने अपने आदेश में स्पष्ट रूप से कहा कि हिंदी न्यूज़ चैनलों ने पीड़ितों का इंटरव्यू लेकर उसका प्रसारण किया, जो पॉक्सो एक्ट और जुवेनाइल जस्टिस कानून का उल्लंघन है।
आगे क्या?
फैसले के बाद शंकराचार्य ने कहा कि ऐसे आदेश लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा बढ़ाते हैं। वहीं शिकायतकर्ता पक्ष ने कहा कि वे इस फैसले से संतुष्ट नहीं हैं और सुप्रीम कोर्ट जाएंगे। अब सभी की निगाहें पुलिस द्वारा दाखिल की जाने वाली चार्जशीट पर टिकी हैं।

