Rupee at Record Low: भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गुरुवार को सर्वकालिक निम्न स्तर पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 92.00 के स्तर को छू गया और कुछ समय के लिए इसके पार भी गया, जो इसके अब तक के सबसे कमजोर स्तर को दर्शाता है। इससे पहले का रिकॉर्ड निम्न स्तर 91.96-91.99 के आसपास था।
वर्तमान में USD/INR विनिमय दर लगभग 92.00-92.10 के बीच कारोबार कर रही है। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार, रुपया 92.19 तक पहुंचने के बाद थोड़ा पीछे खिसका, लेकिन डॉलर की मजबूती और एशियाई मुद्राओं में कमजोरी के कारण दबाव बना हुआ है।
गिरावट के प्रमुख कारण
• डॉलर की वैश्विक मजबूती: अमेरिकी डॉलर में तेजी और ऑफशोर मार्केट में डॉलर की मांग बढ़ने से रुपया दबाव में है।
• विदेशी पूंजी बहिर्वाह: विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की निकासी और आयातकों की डॉलर हेजिंग में वृद्धि।
• अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव: अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा भारत पर लगाए गए उच्च टैरिफ के बाद से रुपया लगभग 5% कमजोर हुआ है।
• कंपनियों का हेजिंग व्यवहार: आयातक अधिक हेजिंग कर रहे हैं, जबकि निर्यातक डॉलर बिक्री धीमी कर रहे हैं, जिससे डॉलर की आपूर्ति घटी है।
इस साल अब तक रुपया करीब 2% गिर चुका है, जबकि मजबूत आर्थिक वृद्धि (सितंबर तिमाही में 8.2% GDP ग्रोथ) के बावजूद यह कमजोर बना हुआ है। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) ने अत्यधिक उतार-चढ़ाव को नियंत्रित करने के लिए बाजार में ह पैसे डाले, लेकिन किसी निश्चित स्तर की रक्षा नहीं की।
विश्लेषक मानते हैं कि रुपया एशियाई मुद्राओं की तुलना में अधिक कमजोर रहा है। गोल्डमैन सैक्स जैसे संस्थान अगले 12 महीनों में इसे 94 तक पहुंचने की संभावना जता रहे हैं। हालांकि, RBI की ओर से विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाने की रणनीति से कुछ स्थिरता आ सकती है।
भारत की मजबूत अर्थव्यवस्था और यूरोपीय संघ के साथ नए मुक्त व्यापार समझौते के बावजूद, वैश्विक कारकों का असर रुपए पर पड़ रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि डॉलर की यह तेजी अस्थायी हो सकती है, लेकिन फिलहाल निवेशकों को सतर्क रहना चाहिए।

