Protests against the economic crisis in Iran are escalating: महंगाई और गिरती मुद्रा से शुरू हुए विरोध प्रदर्शन अब पूरे ईरान में फैल चुके हैं। मानवाधिकार संगठनों के अनुसार 40 से ज्यादा मौतें, हजारों गिरफ्तारियां; सरकार इसे विदेशी साजिश बता रही है। ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुए प्रदर्शन अब बारहवें दिन में प्रवेश कर चुके हैं और देश के लगभग सभी प्रांतों में फैल गए हैं। दिसंबर 2025 के अंत में तेहरान के ग्रैंड बाजार से शुरू हुई हड़तालें अब बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों में बदल गई हैं, जिसमें बाजार बंद, सड़कें जाम और सुरक्षा बलों से झड़पें शामिल हैं।
डेटा और रिपोर्ट्स में दिख रहा पैमाना
• मानवाधिकार संगठनों (एमनेस्टी इंटरनेशनल, HRANA) के अनुसार, 8 जनवरी तक कम से कम 36-45 लोग मारे गए हैं, जिनमें बच्चे भी शामिल हैं। हजारों गिरफ्तारियां हुई हैं।
• PBS और गार्जियन की रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सभी 31 प्रांतों में 340 से ज्यादा प्रदर्शन दर्ज किए गए।
• नेटब्लॉक्स ने 8 जनवरी को देशव्यापी इंटरनेट ब्लैकआउट की पुष्टि की, जो प्रदर्शनों की जानकारी फैलने से रोकने की कोशिश लगती है।
• ISW और क्रिटिकल थ्रेट्स की रिपोर्ट्स में कुर्द बहुल इलाकों में प्रदर्शन बढ़ने की बात है।

प्रदर्शनों की वजह
ईरानी रियाल की कीमत गिरकर एक डॉलर के मुकाबले 14 लाख से ज्यादा हो गई है। महंगाई दर 42-48% तक पहुंच गई, जिससे खाने-पीने की चीजें और दवाएं आम लोगों की पहुंच से बाहर हो गईं। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों ने स्थिति और खराब कर दी है। शुरू में बाजारियों की हड़ताल थी, लेकिन अब नारे राजनीतिक हो गए हैं – “मौत तानाशाह को” और नेता अली खामेनेई के खिलाफ।
कुछ रिपोर्ट्स में निर्वासित शहजादे रजा पहलवी के समर्थन का जिक्र है, लेकिन मुख्य वजह आर्थिक तंगी बताई जा रही है।
सरकार और सुरक्षा बलों का रुख
ईरानी अधिकारियों (IRNA, तस्नीम न्यूज) ने इसे “विदेशी हस्तक्षेप” और “दंगे” करार दिया है। वे कहते हैं कि वैध मांगों को सुना जा रहा है, लेकिन “उपद्रवियों” से सख्ती जरूरी है। संसद में बंद कमरे की बैठकें हुईं, और सेना प्रमुख ने “दुश्मनों” को चेतावनी दी।
बीबीसी और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स में सुरक्षा बलों पर अस्पतालों पर छापे और प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के आरोप लग रहे हैं। इस गोलाबारी में कुछ सुरक्षा कर्मी भी मारे गए हैं।

शहरों से आवाजें
• तेहरान के ग्रैंड बाजार में दुकानें बंद, लोग बंद बाजार के सामने से गुजरते दिखे।
• इस्फहान, शिराज, करमानशाह, कुर्दिस्तान के शहरों में झड़पें और इमारतों में आगजनी की खबरें।
• सोशल मीडिया पर वीडियो में लोग “आजादी, आजादी” के नारे लगा रहे हैं।
अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया
अमेरिका और पश्चिमी देशों ने हिंसा की निंदा की है। कुछ रिपोर्ट्स में ट्रंप प्रशासन के बयान का जिक्र है कि वे ईरानी विपक्ष से सीधे संपर्क नहीं करेंगे।
यह प्रदर्शन 2022 के महसा अमीनी आंदोलन के बाद सबसे बड़ा बताया जा रहा है। ईरान की सरकार दबाव में है, लेकिन अभी नियंत्रण बनाए हुए है। स्थिति तेजी से बदल रही है और आने वाले दिन निर्णायक हो सकते हैं।

