भारत को दहलाने की साजिश नाकाम: राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने एक बड़ी सफलता में छह यूक्रेनी नागरिकों और एक अमेरिकी नागरिक को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि वे भारत के खिलाफ आतंकी गतिविधियों की साजिश रच रहे थे, जिसमें म्यांमार में जातीय सशस्त्र समूहों को ड्रोन और हथियारों की आपूर्ति तथा आतंकी प्रशिक्षण शामिल है। ये गिरफ्तारियां दिल्ली, कोलकाता और लखनऊ के हवाई अड्डों पर की गईं।
एनआईए ने बताया कि आरोपी वैध वीजा पर भारत आए थे, लेकिन मिजोरम (जो प्रतिबंधित क्षेत्र है) में बिना आवश्यक रिस्ट्रिक्टेड एरिया परमिट के गए। वहां से वे म्यांमार में घुसे, जहां उन्होंने भारत-विरोधी जातीय सशस्त्र समूहों से मुलाकात की। जांच में पता चला कि यूरोप से बड़े पैमाने पर ड्रोन की खेपें भारत के रास्ते मिजोरम लाई गईं और फिर म्यांमार पहुंचाई गईं। इन ड्रोनों का इस्तेमाल इन समूहों द्वारा किया जा रहा था, जो कथित तौर पर भारत के कुछ प्रतिबंधित उग्रवादी संगठनों (इंडियन इंसर्जेंट ग्रुप्स) को हथियार, अन्य आतंकी उपकरण और प्रशिक्षण प्रदान कर रहे थे।
एनआईए ने यूएपीए की धारा 18 सहित अन्य धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया है। गिरफ्तार लोगों को दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट में पेश किया गया, जहां अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश प्रशांत शर्मा ने उन्हें 27 मार्च तक 11 दिनों की एनआईए कस्टडी में भेज दिया। कोर्ट ने कहा कि आरोपी की मोबाइल डेटा जांच, फंडिंग स्रोत का पता लगाना, अन्य सह-आरोपियों की पहचान और साजिश के पूरे नेटवर्क को उजागर करने के लिए पुलिस कस्टडी जरूरी है। एनआईए ने 15 दिनों की कस्टडी मांगी थी, लेकिन कोर्ट ने 11 दिन दी।
सूत्रों के अनुसार, यह मामला क्रॉस-बॉर्डर आतंकी खतरे को दर्शाता है, खासकर पूर्वोत्तर भारत में जहां म्यांमार सीमा से घुसपैठ और हथियारों की तस्करी आम है। एनआईए अब सोशल मीडिया अकाउंट्स, फोन डेटा और अन्य सबूतों की जांच कर रही है ताकि बाकी साथियों को पकड़ा जा सके। यह गिरफ्तारी भारत की आतंकवाद-रोधी एजेंसियों की सतर्कता का प्रमाण है, जो विदेशी तत्वों द्वारा भारत की सुरक्षा को खतरा पहुंचाने की कोशिशों पर नजर रख रही हैं। जांच जारी है और आगे गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

