राजाराम जैन का जन्म 1929 में मध्य प्रदेश के मालथौन में हुआ था। वे प्राकृत, अपभ्रंश, पाली और संस्कृत जैसी प्राचीन भारतीय भाषाओं के गहन ज्ञाता थे। उन्होंने 40 से अधिक पुस्तकें लिखीं और 14वीं-15वीं शताब्दी के कवि रैधु की अप्रकाशित दुर्लभ पांडुलिपियों को संकलित कर उनका हिंदी अनुवाद किया, जिससे साहित्य जगत को अमूल्य योगदान मिला। उनके इस कार्य के लिए 2024 में उन्हें पद्मश्री और 2000 में राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वे यूजीसी नेट और राष्ट्रपति पुरस्कार चयन समिति के सदस्य भी रहे।
परिवार के अनुसार, निधन के समय पूरा परिवार उनकी देखभाल के लिए मौजूद था। उनके चार बच्चे हैं— रत्ना जैन, राजीव गौयल, रश्मि जैन और राजेश पंकज— जो बाहर रहते हैं। उनकी पत्नी का निधन मार्च 2025 में हो चुका था।
अंतिम संस्कार आज: अंतिम संस्कार आज (5 जनवरी 2026) को होगा। दोपहर 2 बजे सेक्टर-34 स्थित नीलगिरी अपार्टमेंट से अंतिम यात्रा निकली और सेक्टर-94 श्मशान घाट पर अंतिम संस्कार किया गया।
राजाराम जैन 2003 से नोएडा में परिवार के साथ रह रहे थे। उनके निधन पर साहित्यिक जगत में गहरा दुख व्यक्त किया जा रहा है।

