Noida News। देश के सबसे सुनियोजित शहरों में से एक नोएडा में ट्रैफिक सिस्टम को लेकर किए जा रहे दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर दिखाई दे रहा है। नोएडा ट्रैफिक पुलिस और प्रशासन भले ही यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए लगातार प्रयासों का दावा कर रहे हों, लेकिन सुबह और शाम के पीक ऑवर्स में नोएडा के प्रमुख चैराहों और मार्गों पर लगने वाला लंबा जाम इन दावों की पोल खोलता नजर आता है। जो लोग दफ्तर जाते है उनकी जिंदगी के कई अहम घंटे प्रतिदिन सड़क पर बीत रहे है।
इन सेक्टरों में लगता है लम्बा जाम
शहर के निवासी और दैनिक यात्री लंबे समय से ट्रैफिक जाम की समस्या से जूझ रहे हैं। सेक्टर-62, सेक्टर-71, सेक्टर-76, सेक्टर-94, महामाया फ्लाईओवर, डीएनडी लिंक रोड, सेक्टर-37 चैराहा, सेक्टर-60 कट, सेक्टर-18 और एक्सप्रेसवे से जुड़े कई मार्गों पर रोजाना वाहनों की लंबी कतारें देखने को मिलती हैं। कार्यालय समय के दौरान स्थिति और अधिक गंभीर हो जाती है, जिससे हजारों लोगों को प्रतिदिन परेशानी का सामना करना पड़ता है।
Noida traffic jam
बढ़ते वाहनों के मुकाबले कमजोर पड़ता प्रबंधन
विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा में आबादी और वाहनों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन ट्रैफिक प्रबंधन उसी गति से विकसित नहीं हो पाया है। कई चैराहों पर सिग्नल टाइमिंग, अवैध पार्किंग, सड़क किनारे अतिक्रमण और अनियोजित यू-टर्न जाम की प्रमुख वजह बन रहे हैं। इसके अलावा कुछ स्थानों पर निर्माण कार्य और सड़क मरम्मत भी यातायात को प्रभावित कर रहे हैं।
पीक ऑवर्स में नदारद दिखता प्रभावी नियंत्रण
स्थानीय लोगों का कहना है कि कई महत्वपूर्ण चैराहों पर पीक ऑवर्स के दौरान ट्रैफिक पुलिसकर्मियों की मौजूदगी होने के बावजूद जाम की स्थिति नियंत्रित नहीं हो पाती। कई बार वाहन चालक घंटों तक जाम में फंसे रहते हैं। लोगों का आरोप है कि ट्रैफिक संचालन में तकनीक और मानव संसाधनों का प्रभावी उपयोग नहीं हो रहा है।
डीसीपी ट्रैफिक की कार्यशैली पर भी उठ रहे सवाल
लगातार बनी रहने वाली जाम की स्थिति के चलते ट्रैफिक विभाग की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठने लगे हैं। नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि यदि शहर के प्रमुख मार्गों पर रोजाना एक जैसी समस्या सामने आ रही है तो इसके स्थायी समाधान के लिए ठोस रणनीति तैयार की जानी चाहिए। उनका मानना है कि केवल चालान अभियान चलाने से यातायात व्यवस्था सुचारु नहीं हो सकती, बल्कि वैज्ञानिक ट्रैफिक प्रबंधन और बेहतर समन्वय की आवश्यकता है। यातायात व्यवस्था सुधारने में विफल होने पर डीसीपी पर गाज गिर चुकी है।
ट्रैफिक पुलिस का दावा
वहीं ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि बढ़ते वाहन दबाव, निर्माण कार्यों और अन्य कारणों के चलते कई बार यातायात प्रभावित होता है, लेकिन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विभाग द्वारा स्मार्ट ट्रैफिक सिस्टम, सीसीटीवी निगरानी और विशेष अभियान भी संचालित किए जा रहे हैं। शहरी विकास और यातायात विशेषज्ञों का मानना है कि नोएडा जैसे तेजी से विकसित हो रहे शहर में केवल अस्थायी उपायों से समस्या का समाधान संभव नहीं है। बेहतर सार्वजनिक परिवहन, पार्किंग प्रबंधन, अतिक्रमण हटाने की नियमित कार्रवाई, सिग्नल सिस्टम का आधुनिकीकरण और चैराहों का पुनर्गठन जैसे कदम उठाने होंगे।
जनता की अपेक्षा
नोएडा के नागरिकों का कहना है कि ट्रैफिक व्यवस्था किसी भी आधुनिक शहर की पहचान होती है। ऐसे में जरूरी है कि ट्रैफिक पुलिस और संबंधित एजेंसियां जाम वाले प्रमुख बिंदुओं की पहचान कर वहां दीर्घकालिक समाधान लागू करें, ताकि लोगों को रोजाना जाम की समस्या से राहत मिल सके।

