नोएडा प्राधिकरण भष्टाचार के दलदल में: नोएडा प्राधिकरण की इंजीनियरिंग और प्लानिंग पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं। सेक्टर-51 और 52 मेट्रो स्टेशनों को जोड़ने वाला 420 मीटर लंबा एयर-कंडीशंड स्काईवॉक (लागत ₹40 करोड़) बनकर तैयार हो चुका है, लेकिन एक स्ट्रक्चरल बीम की वजह से अभी तक शुरू नहीं हो पाया। अब प्राधिकरण ने IIT दिल्ली से तकनीकी रिपोर्ट मांगी है, जबकि इसी कंपनी Orionn Architects को सेक्टर-62 के नए सर्कुलर स्काईवॉक (₹26 करोड़) का डिजाइन और जिम्मेदारी दे दी गई है — जबकि पुराना प्रोजेक्ट अभी पूरा नहीं हुआ है।
सेक्टर-51/52 स्काईवॉक की कहानी:
प्रोजेक्ट मार्च 2023 में शुरू हुआ था। इसमें ट्रैवलेटर, लिफ्ट और पूरी एयर-कंडीशनिंग की सुविधा है। लेकिन सेक्टर-51 मेट्रो स्टेशन की तरफ एंट्री गेट बनाने के दौरान दीवार के अंदर एक स्ट्रक्चरल बीम निकल आई, जिसकी मौजूदगी शुरुआती ड्रॉइंग में नहीं दिखाई गई थी। निर्माण पूरा होने के बावजूद यह बीम एग्जिट को ब्लॉक कर रही है। नोएडा अथॉरिटी के जीएम (सिविल) एसपी सिंह ने बताया कि IIT दिल्ली से सेफ्टी रिपोर्ट और एनओसी ली जा रही है। रिपोर्ट आने में 1-3 महीने लग सकते हैं। अगर बीम नहीं हटाई जा सकी तो वैकल्पिक समाधान निकालना पड़ेगा। अब तक 9 डेडलाइन मिस हो चुकी हैं। मूल रूप से 2024 में पूरा होना था, लेकिन अब मार्च 2026 के बाद भी अनिश्चित है। यात्रियों को अभी भी धूप, ट्रैफिक और अतिक्रमण वाले फुटपाथ पर पैदल चलना पड़ रहा है।
Orionn Architects पर सवाल:
Orionn Architects (नोएडा आधारित फर्म, आर्किटेक्ट संजीव शर्मा और नीलिमा राणा शर्मा) ने सेक्टर-51/52 स्काईवॉक का डिजाइन तैयार किया था। अब जबकि यह प्रोजेक्ट अभी भी अटका है, प्राधिकरण ने उन्हें सेक्टर-62 के नए 530 मीटर लंबे सर्कुलर स्काईवॉक (गोलचक्कर पर 350 मीटर सर्कुलर + 180 मीटर स्ट्रेट) का काम सौंप दिया है। इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास 5 फरवरी 2026 को विधायक पंकज सिंह और प्राधिकरण अधिकारियों ने किया था। 18 महीने में पूरा करने का लक्ष्य है।
कुछ सूत्रों और सोशल मीडिया पर आरोप लग रहे हैं कि Orionn Architects प्राधिकरण के कुछ अधिकारियों की करीबी है, जिसकी वजह से बार-बार काम मिल रहा है। पहले प्रोजेक्ट में डिजाइन और कोऑर्डिनेशन की खामी (बीम की अनदेखी) पर सवाल उठ रहे हैं, फिर भी नया टेंडर या जिम्मेदारी कैसे मिल गई — यह प्राधिकरण की पारदर्शिता पर सवालिया निशान है।
प्राधिकरण का बचाव और आगे क्या?
प्राधिकरण का कहना है कि बीम की समस्या NMRC ड्रॉइंग में नहीं दिखाई गई थी और अब IIT विशेषज्ञों की मदद से इसे सुलझाया जाएगा। सेक्टर-62 स्काईवॉक के लिए 50,000 से ज्यादा रोजाना पैदल यात्रियों को जाम और ट्रैफिक से राहत मिलेगी। लेकिन कम्यूटर और स्थानीय लोग कह रहे हैं — “पहले पुराना प्रोजेक्ट पूरा करो, फिर नया शुरू करो।” यह घटनाक्रम नोएडा में इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स की प्लानिंग और जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर रहा है। प्राधिकरण ने अभी नई डेडलाइन नहीं बताई है, लेकिन IIT रिपोर्ट के बाद ही आगे की तस्वीर साफ होगी।
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