नोएडा में किफायती आवास और वेंडिंग ज़ोन की मांग, दिव्य कृष्णात्रेय ने प्राधिकरण से की अपील

नोएडा। तेजी से विकसित होते नोएडा में शहर के रक्षकों के लिए सम्मानजनक आवास, मध्यम वर्ग के लिए किफायती घर और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए व्यवस्थित वेंडिंग ज़ोन बनाने की मांग उठी है। सेक्टर-105 आरडब्ल्यूए अध्यक्ष दिव्य कृष्णात्रेय ने नोएडा प्राधिकरण और शासन से आग्रह किया है कि विकास योजनाओं में पुलिस व अन्य सरकारी कर्मचारियों, नौकरीपेशा परिवारों और छोटे कारोबारियों की ज़रूरतों को भी प्राथमिकता दी जाए।

कृष्णात्रेय का कहना है कि शहर की तरक्की केवल ऊंची इमारतों और चौड़ी सड़कों से नहीं मापी जानी चाहिए। शहर को सुरक्षित, साफ-सुथरा और जीवंत बनाने में पुलिसकर्मियों, सरकारी कर्मचारियों और रोज़मर्रा की सेवाएं देने वाले छोटे दुकानदारों का भी योगदान है। इसलिए ऐसी नीतियां जरूरी हैं, जिनसे इन वर्गों को रहने और आजीविका चलाने के लिए बेहतर अवसर मिलें।

सरकारी कर्मचारियों के लिए आवास की मांग

अपील में पुलिसकर्मियों और अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए आधुनिक सुविधाओं वाला आवासीय परिसर विकसित करने का सुझाव दिया गया है। इसमें परिवारों की जरूरतों के अनुरूप आवास, बुनियादी सुविधाएं और सुरक्षित माहौल उपलब्ध कराने की बात कही गई है। कृष्णात्रेय के मुताबिक, शहर में सेवा देने वाले कर्मचारियों को उपयुक्त आवास मिलने से उनके परिवारों को स्थिरता मिलेगी और कर्मचारियों को भी राहत होगी।

यह मांग ऐसे समय उठी है जब गौतमबुद्ध नगर में पुलिस और सरकारी अधिकारियों के आवास की जरूरत पहले भी चर्चा में रही है। हालांकि, उपलब्ध ताजा सार्वजनिक जानकारी में नोएडा प्राधिकरण की ओर से पुलिस व अन्य कर्मचारियों के लिए किसी नए बड़े आवासीय परिसर की घोषणा की पुष्टि नहीं मिली है। इसलिए इस प्रस्ताव को फिलहाल आरडब्ल्यूए अध्यक्ष की मांग के रूप में ही देखा जाना चाहिए, न कि स्वीकृत परियोजना के रूप में।

मध्यम वर्ग के लिए घर का सवाल

प्रेस विज्ञप्ति में किराये के बढ़ते बोझ से जूझ रहे नौकरीपेशा परिवारों के लिए किफायती फ्लैट और प्लॉट योजनाएं लाने की मांग भी की गई है। कृष्णात्रेय ने प्राधिकरण से आग्रह किया कि छोटे और मध्यम आकार के आवासों को प्राथमिकता दी जाए, ताकि शहर में काम करने वाले परिवार अपने बजट के भीतर घर खरीदने का अवसर पा सकें।

ताजा उपलब्ध जानकारी के अनुसार, नोएडा प्राधिकरण की वेबसाइट पर आवासीय योजनाओं की जानकारी सूचीबद्ध है, लेकिन वेबसाइट की लाइव आवंटन योजना वाला पृष्ठ इस समय सफलतापूर्वक खुल नहीं पाया। दूसरी ओर, ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने 2026 में ओमिक्रॉन-1ए स्थित तैयार फ्लैटों की ई-नीलामी की थी। सितंबर में 90 फ्लैटों की नीलामी में केवल पांच लोगों ने रुचि दिखाई; रिपोर्ट के अनुसार आरक्षित कीमत करीब 73.2 लाख से 74.3 लाख रुपये थी और खरीदारों ने कीमत के साथ इमारतों की हालत तथा अधूरी साझा सुविधाओं पर भी सवाल उठाए। यह उदाहरण बताता है कि आवास योजना बनाते समय केवल उपलब्धता ही नहीं, बल्कि कीमत, रखरखाव और वास्तविक खरीद क्षमता पर भी ध्यान देना होगा।

वेंडिंग ज़ोन पर दोहरा जोर

छोटे दुकानदारों और रेहड़ी-पटरी वालों के लिए सेक्टरों तथा व्यावसायिक इलाकों के पास साफ-सुथरे, तयशुदा और सुविधायुक्त वेंडिंग ज़ोन बनाने का सुझाव दिया गया है। इसका उद्देश्य सड़क और फुटपाथ पर अव्यवस्थित कारोबार तथा अतिक्रमण कम करना है, साथ ही विक्रेताओं की रोज़ी-रोटी को व्यवस्थित जगह देना भी है।

हालिया घटनाएं इस मुद्दे की जटिलता दिखाती हैं। एक ओर ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण ने अपनी स्ट्रीट वेंडर नीति के तहत 673 जगहें तय कीं। योजना में पीआई-1/2 में 160, ओमिक्रॉन-3 में 86 तथा बीटा-1 और डेल्टा-1 में 75-75 जगहें शामिल हैं। नीति में जगह के आकार और प्रकार के अनुसार मासिक शुल्क तय किया गया है; महिलाओं, दिव्यांगों और भूमिहीन मजदूरों के लिए आरक्षण का प्रावधान भी बताया गया है।

दूसरी ओर, नोएडा के सेक्टर-76 में 1 अक्टूबर को प्राधिकरण ने सोसाइटियों के बाहर चल रहे 20 से अधिक अस्थायी दुकानों और रेहड़ियों को हटाया। स्थानीय निवासियों ने जाम, भीड़ और देर रात तक होने वाली गतिविधियों की शिकायत की थी। यह कार्रवाई नोएडा में हुई थी, जबकि 673 जगहों वाली योजना ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण की है—दोनों क्षेत्रों और प्राधिकरणों को अलग-अलग समझना जरूरी है।

नीति में संतुलन की अपील

कृष्णात्रेय की अपील का केंद्रीय संदेश यह है कि शहर की व्यवस्था और आजीविका—दोनों को साथ लेकर चला जाए। उनके अनुसार, निर्धारित वेंडिंग ज़ोन से सड़कें और सार्वजनिक स्थान व्यवस्थित रह सकते हैं, जबकि छोटे विक्रेताओं को भी कारोबार करने का स्थायी और सम्मानजनक स्थान मिल सकता है। इसके लिए स्थान चयन, स्वच्छता, यातायात प्रबंधन और पात्र विक्रेताओं की पहचान पर स्पष्ट व्यवस्था जरूरी होगी।

इसी तरह, किफायती आवास की नीति को केवल योजनाओं की घोषणा तक सीमित न रखकर उसकी कीमत, निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव से जोड़ने की जरूरत है। सरकारी कर्मचारियों के आवास के संबंध में भी मांग है कि शहर की सेवा में लगे लोगों के लिए दीर्घकालिक और परिवार-अनुकूल विकल्प तैयार किए जाएं।

दिव्य कृष्णात्रेय ने भरोसा जताया है कि प्राधिकरण और शासन इन सुझावों पर संवेदनशीलता से विचार करेंगे। फिलहाल सरकारी आवासीय परिसर और नई किफायती आवास योजना के संबंध में उनकी अपील को औपचारिक प्रस्ताव के रूप में देखा जाना चाहिए; उपलब्ध स्रोतों में इसकी स्वीकृति या कार्यान्वयन की घोषणा नहीं मिली है। शहर के लिए अगला महत्वपूर्ण कदम यह होगा कि आवास, आजीविका और अतिक्रमण-नियंत्रण से जुड़े सुझावों पर संबंधित प्राधिकरण स्पष्ट योजना और समयसीमा के साथ जवाब दें।

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