इज़रायल-हिज़्बुल्लाह के बीच भड़की नई जंग: बेरूत पर बमबारी, दक्षिण लेबनान में जमीनी घुसपैठ — 31 की मौत, सैकड़ों घायल

बेरूत/तेल अवीव। मध्य पूर्व में एक बार फिर युद्ध की आग भड़क उठी है। ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई की मौत के बाद हिज़्बुल्लाह ने इज़रायल पर मिसाइलों और ड्रोनों से हमला बोल दिया, जिसके जवाब में इज़रायल ने लेबनान की राजधानी बेरूत पर भीषण एयरस्ट्राइक की और दक्षिण लेबनान में जमीनी कार्रवाई भी शुरू कर दी है। यह संघर्ष नवंबर 2024 में हुए युद्धविराम के बाद का सबसे बड़ा और खतरनाक भड़काव है।

खामेनेई की मौत बनी नई जंग की वजह

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इज़रायल ने संयुक्त रूप से ईरान पर हमले शुरू किए। इस हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई मारे गए, जिसकी पुष्टि 1 मार्च को हुई। इसके बाद हिज़्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने ऐलान किया कि उनका संगठन ईरान के समर्थन में इज़रायल से लोहा लेगा। हिज़्बुल्लाह ने कहा कि उसका हमला खामेनेई की हत्या का बदला है और यह “लेबनान और उसके लोगों की रक्षा” के लिए किया गया है।

हिज़्बुल्लाह का हमला — मिसाइलें और ड्रोनों की बौछार

हिज़्बुल्लाह ने हाइफा के दक्षिण में एक मिसाइल रक्षा केंद्र को निशाना बनाते हुए “सटीक मिसाइलों और ड्रोनों के झुंड” से हमला किया। यह नवंबर 2024 के युद्धविराम के बाद हिज़्बुल्लाह का इज़रायल पर पहला सीधा हमला था।हिज़्बुल्लाह ने रामत डेविड एयरबेस, मेरोन निगरानी केंद्र और कैंप यित्ज़ाक को भी निशाना बनाया।

इज़रायल का जवाब — बेरूत पर बमबारी, 53 गाँवों को खाली करने का आदेश

इज़रायल ने तेज़ जवाबी कार्रवाई करते हुए बेरूत के दक्षिणी उपनगरों पर बमबारी की। लेबनान के स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार इन हमलों में कम से कम 31 लोग मारे गए और 149 घायल हुए। इज़रायल ने दक्षिण लेबनान के 53 गाँवों के निवासियों को तत्काल घर खाली करने का आदेश दिया और उन गाँवों पर दर्जनों हिज़्बुल्लाह ठिकानों पर हमले किए। इज़रायल ने हिज़्बुल्लाह के प्रमुख मीडिया चैनल अल-मनार के स्टूडियो को भी नष्ट किया। इज़रायली सेना ने दावा किया कि हमलों में हिज़्बुल्लाह के इंटेलिजेंस प्रमुख हुसैन मकलेद को मार गिराया गया।

जमीनी घुसपैठ — इज़रायली सेना लेबनान की सीमा में दाखिल

इज़रायली सेना ने दक्षिण लेबनान में नई जमीनी घुसपैठ शुरू करते हुए इसे “फॉरवर्ड डिफेंस” उपाय बताया। इज़रायली रक्षा मंत्री इज़रायल काट्ज़ ने कहा कि सेना को निर्देश दिया गया है कि वह दक्षिण लेबनान में और अहम इलाके अपने नियंत्रण में ले। इज़रायल हज़ारों रिज़र्व सैनिकों को लेबनान सीमा पर तैनात कर रहा है, जिससे गहरी जमीनी कार्रवाई की आशंका बढ़ गई है। हालांकि IDF प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल नादव शोशानी ने कहा कि यह कोई बड़ा सैन्य अभियान नहीं है, बल्कि एक सीमित रणनीतिक कदम है। लेबनानी सेना ने अपनी सीमावर्ती चौकियाँ खाली कर दी हैं — लेबनानी सूत्रों के अनुसार कम से कम सात अग्रिम चौकियाँ खाली की गई हैं।

लेबनान सरकार ने हिज़्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियाँ अवैध घोषित कीं

लेबनानी प्रधानमंत्री नवाफ सलाम ने हिज़्बुल्लाह की सैन्य गतिविधियों को औपचारिक रूप से प्रतिबंधित कर दिया और समूह को अपने हथियार राज्य को सौंपने का आदेश दिया। प्रधानमंत्री सलाम ने कहा कि दक्षिण लेबनान से रॉकेट दागना एक गैरज़िम्मेदाराना कदम है जो लेबनान की राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरे में डालता है। हिज़्बुल्लाह के एक वरिष्ठ नेता महमूद कमाती ने कहा, “इज़रायल खुली जंग चाहता था, तो ठीक है — अब खुली जंग होगी। धैर्य का युग समाप्त हो गया है।”

30,000 से अधिक लोग विस्थापित, मानवीय संकट गहराया

UNHCR के अनुसार संघर्ष शुरू होने के बाद से 30,000 से अधिक विस्थापित लोगों ने लेबनान के आश्रय स्थलों में शरण ली है। हज़ारों लोग अपनी कारों में या सड़क के किनारे रात बिताने पर मजबूर हैं।

पृष्ठभूमि — डेढ़ साल से जारी है यह संघर्ष

इज़रायल और हिज़्बुल्लाह के बीच यह संघर्ष 8 अक्टूबर 2023 को शुरू हुआ था, जब हमास के हमलों के बाद हिज़्बुल्लाह ने इज़रायल पर रॉकेट दागे थे। नवंबर 2024 में युद्धविराम हुआ था, लेकिन इसके बावजूद इज़रायल लगभग रोज़ाना लेबनान में हमले करता रहा।  अब ईरान-इज़रायल-अमेरिका के बीच छिड़ी व्यापक जंग के बीच यह संघर्ष एक नए और खतरनाक मोड़ पर आ गया है।

 

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