NEET Paper Leak: सुप्रीम कोर्ट सख्त, प्रदर्शनकारी महिलाओं के उत्पीड़न की जांच करेगी हाई-पावर्ड कमेटी

NEET Paper Leak: नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने पिछले महीने दिल्ली में NEET पेपर लीक के खिलाफ हुए छात्र प्रदर्शनों के दौरान पुलिस ज्यादती, हिंसा और महिला प्रदर्शनकारियों के उत्पीड़न की गंभीर आरोपों की जांच के लिए एक हाई-पावर्ड कमेटी (HPC) का गठन किया है। कमेटी की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस आर सुभाष रेड्डी करेंगे।

कमेटी में पूर्व पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, पूर्व दिल्ली हाईकोर्ट जज जस्टिस शालिंदर कौर, पूर्व सीबीआई डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और पूर्व मेघालय डीजीपी एलआर बिशनोई शामिल हैं। कोर्ट ने कहा कि सदस्यों की विशेषज्ञता, अनुभव और विविधता को ध्यान में रखते हुए यह पैनल गठित किया गया है। जुलाई 20 को कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में हुए ‘संसद चलो’ मार्च के दौरान जंतर मंतर पर व्यापक हिंसा की घटनाएं हुई थीं। शांतिपूर्ण प्रदर्शन हिंसक रूप ले चुका था। छात्रों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस तथा कुछ जगहों पर पेलेट गन का इस्तेमाल किया। पार्लियामेंट स्ट्रीट और कनॉट प्लेस थानों में कई एफआईआर दर्ज की गईं, जिनमें प्रदर्शनकारियों पर हत्या का प्रयास और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के आरोप लगाए गए।

कमेटी क्या-क्या जांचेगी?
सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी को महिला प्रदर्शनकारियों के खिलाफ लक्षित हिंसा, उत्पीड़न और छेड़छाड़ के आरोपों को प्राथमिकता देने का निर्देश दिया है। कमेटी पुलिस और सुरक्षा बलों द्वारा प्रदर्शनकारियों को पहुंचाई गई गंभीर चोटों, कमांड चेन, जिम्मेदार अधिकारियों और बल प्रयोग में कानून-नियमों के उल्लंघन की भी जांच करेगी।

अत्यधिक बल प्रयोग—पेलेट गन, इलेक्ट्रिक बैटन, लाठीचार्ज और आंसू गैस—के आरोपों के साथ-साथ यह भी देखा जाएगा कि बल का इस्तेमाल वैध और आनुपातिक था या नहीं। पुलिसकर्मियों द्वारा यूनिफॉर्म और नामपट्ट पहनने, प्रदर्शनकारियों की निगरानी-सर्विलांस तथा निजता व शांतिपूर्ण सभा के संवैधानिक अधिकारों का पालन हुआ या नहीं, यह भी जांच का हिस्सा होगा। कमेटी दोनों पक्षों—प्रदर्शनकारियों और पुलिसकर्मियों—को हुई चोटों के लिए अंतरिम मुआवजे पर भी विचार करेगी। महत्वपूर्ण बात यह है कि यह जांच एक बार की नहीं बल्कि निरंतर और आवधिक होगी। कमेटी अंतरिम निष्कर्ष कोर्ट को सौंपेगी, जिससे जरूरत पड़ने पर अदालत आवश्यक निर्देश जारी कर सके।सुप्रीम कोर्ट ने विश्वास जताया कि कमेटी की सिफारिशें इन मुद्दों का व्यापक आकलन करने में मददगार साबित होंगी।

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