ग्रेटर नोएडा के दनकौर थाना क्षेत्र के चचूला गांव में प्रदीप नाम के शख्स ने नशे की हालत में पड़ोसी के बुग्गी खड़े करने, पत्नी से झगड़े और मां के लापता होने जैसी झूठी शिकायतें की थीं। हर बार पुलिस टीम मौके पर पहुंची, लेकिन कोई वास्तविक इमरजेंसी नहीं मिली। इस तरह के दुरुपयोग से पुलिस के समय और संसाधनों की बर्बादी हुई। जिला प्रभारी सत्यवीर सिंह की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया।
इसके अलावा, हाल के महीनों में अन्य जिलों से भी ऐसे मामले रिपोर्ट हुए हैं। आजमगढ़ में डायल-112 पर हत्या की झूठी सूचना देने वाले आरोपी को अदालत ने 2 वर्ष 9 महीने की साधारण कारावास की सजा सुनाई। पुलिस का कहना है कि फर्जी कॉल न केवल संसाधन बर्बाद करते हैं, बल्कि वास्तविक जरूरतमंदों की मदद में देरी भी कराते हैं।
हल्द्वानी क्षेत्र में एक रोडवेज बस चालक ने लूट की झूठी सूचना दी, जिस पर पुलिस ने 5 हजार रुपये का चालान काटा। इसी तरह अगस्त 2025 में ग्रेटर नोएडा में चोर आने की बार-बार झूठी सूचना देने वाले को गिरफ्तार किया गया। यूपी पुलिस ने 2025 में कई जिलों में जन जागरूकता अभियान भी चलाए, जिनमें लोगों को समझाया गया कि यह सेवा केवल गंभीर आपात स्थितियों जैसे दुर्घटना, अपराध या मेडिकल इमरजेंसी के लिए है।
यूपी पुलिस के अधिकारियों का कहना है कि डायल-112 पर रोजाना हजारों कॉल आती हैं, जिनमें से कई फर्जी या गैर-जरूरी होती हैं। पुलिस ने चेतावनी दी है कि दुरुपयोग करने वालों पर आईपीसी की संबंधित धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया जाएगा और सजा तक की कार्रवाई होगी। नागरिकों से अपील है कि इस नंबर का इस्तेमाल सोच-समझकर करें, ताकि वास्तविक जरूरतमंदों को समय पर मदद मिल सके।
पुलिस प्रवक्ता ने कहा, “हमारी टीमें 24 घंटे तैयार हैं, लेकिन फर्जी कॉल से असली मामलों पर असर पड़ता है। जागरूकता और सख्ती से इस समस्या को कम किया जा रहा है।”

