मैक्स हॉस्पिटल नोएडा में चमत्कार: 10 घंटे की मैराथन सर्जरी से 6 वर्षीय उज्बेक बच्ची को मिली नई जिंदगी

नोएडा। मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल, नोएडा के विशेषज्ञ डॉक्टरों ने एक दुर्लभ और अत्यंत जटिल सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा करते हुए उज्बेकिस्तान की 6 वर्षीय बच्ची के चेहरे का पुनर्निर्माण किया है। करीब 10 घंटे तक चली इस मैराथन सर्जरी ने न केवल बच्ची को एक सामान्य जीवन की ओर लौटाया, बल्कि भारतीय चिकित्सा जगत में एक नई उपलब्धि भी दर्ज की।

क्या थी बीमारी?

बच्ची पैरामीडियन क्रेनियोफेशियल क्लेफ्ट विद हाइपरटेलोरिज्म नामक अत्यंत दुर्लभ जन्मजात बीमारी से पीड़ित थी। यह एक ऐसी स्थिति है जिसमें चेहरे की हड्डियों और संरचना का विकास असामान्य रूप से होता है। इस बीमारी के चलते बच्ची की दोनों आंखें सामान्य से कहीं अधिक दूर थीं, नाक का अगला हिस्सा बीच से विभाजित था और समग्र रूप से चेहरा असंतुलित दिखाई देता था। यह स्थिति न केवल शारीरिक बल्कि मनोवैज्ञानिक दृष्टि से भी बच्ची और उसके परिवार के लिए बेहद कष्टदायक थी।

इलाज की तलाश में भारत तक का सफर

उज्बेकिस्तान में कई विशेषज्ञों से परामर्श लेने के बावजूद परिवार को कोई उचित और प्रभावी उपचार नहीं मिल सका। हर जगह से निराशा हाथ लगने के बाद परिवार ने भारत का रुख किया और नोएडा स्थित मैक्स सुपर स्पेशलिटी हॉस्पिटल में पहुंचे। यहां के विशेषज्ञों ने केस की गंभीरता को समझते हुए सर्जरी की योजना तैयार की।

विशेषज्ञों की टीम और 10 घंटे का संघर्ष

अस्पताल के प्लास्टिक, एस्थेटिक और रिकंस्ट्रक्टिव सर्जरी विभाग के सीनियर डायरेक्टर डॉ. आशीष राय और न्यूरोसर्जरी विभाग के प्रिंसिपल कंसल्टेंट डॉ. प्रांकुल सिंघल के नेतृत्व में विशेषज्ञों की एक बहु-विभागीय टीम ने यह सर्जरी संपन्न की। ऑपरेशन थियेटर में करीब 10 घंटे तक बिना रुके चली इस सर्जरी में खोपड़ी, मस्तिष्क और आंखों जैसे अत्यंत संवेदनशील अंगों पर काम करना पड़ा।

डॉ. आशीष राय ने बताया, “यह केस तकनीकी रूप से बेहद चुनौतीपूर्ण था। इसमें खोपड़ी, मस्तिष्क और आंखों जैसे नाजुक अंग शामिल थे, इसलिए हर कदम अत्यंत सावधानी से उठाना जरूरी था।”

सर्जरी का परिणाम: आंकड़ों में बदलाव

सर्जरी की सबसे बड़ी चुनौती बच्ची की आंखों के बीच की असामान्य दूरी को ठीक करना था। सर्जरी से पूर्व यह दूरी लगभग 45 मिमी थी, जिसे सफलतापूर्वक घटाकर 28 मिमी किया गया — जो कि सामान्य मानक के भीतर है। इसके साथ ही नाक की संरचना और चेहरे के समग्र संतुलन को भी दुरुस्त किया गया।

रिकवरी में आई मुश्किल, पर डॉक्टर डटे रहे

सर्जरी के बाद रिकवरी के दौरान बच्ची को सेकेंडरी निमोनिया हो गया, जिसने डॉक्टरों की चिंता बढ़ा दी। हालांकि, अस्पताल की सतर्क और अनुभवी टीम ने समय रहते इस जटिलता को नियंत्रित कर लिया। बच्ची को कई दिनों तक पीआईसीयू (पीडियाट्रिक इंटेंसिव केयर यूनिट) में विशेष निगरानी में रखा गया। पांचवें दिन बच्ची को सुरक्षित रूप से एक्सट्यूबेट किया गया अर्थात वेंटिलेटर से हटाया गया — जो उसकी रिकवरी में एक महत्वपूर्ण पड़ाव था।

अब बच्ची स्वस्थ, मिली अस्पताल से छुट्टी

अब बच्ची की स्थिति पूरी तरह स्थिर है और उसे अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। उसका परिवार डॉक्टरों की इस उपलब्धि से अभिभूत है। यह सर्जरी इस बात का प्रमाण है कि भारत में विश्वस्तरीय चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध हैं, जो दुनिया के किसी भी कोने से आए मरीजों को नई उम्मीद दे सकती हैं।

 

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