नेपाल में चुनावों के लिए बड़े पैमाने पर पंजीकरण

Nepal Election Commission News: नेपाल की चुनाव आयोग ने बुधवार को घोषणा की कि देश में सितंबर के जन-विद्रोह के बाद होने वाले पहले संसदीय चुनावों के लिए 125 राजनीतिक दलों ने अपना पंजीकरण करा लिया है। यह संख्या अभी भी बढ़ सकती है, क्योंकि पंजीकरण की प्रक्रिया अगले दो सप्ताह तक चलेगी।

यह विकास नेपाल की अस्थिर राजनीतिक स्थिति को दर्शाता है, जहां पुरानी पार्टियों के प्रति जनता का अविश्वास बढ़ रहा है और नई पार्टियां सत्ता की दौड़ में कूद रही हैं।

सितंबर 2025 में हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शनों ने तत्कालीन सरकार को उखाड़ फेंका था। इन प्रदर्शनों का कारण आर्थिक संकट, भ्रष्टाचार और बेरोजगारी जैसे मुद्दे थे, जिन्होंने लाखों नेपालीयों को सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया।

विद्रोह के बाद अंतरिम सरकार ने मार्च 2026 में संसदीय चुनाव कराने का फैसला किया, जो देश की नई राजनीतिक दिशा तय करेगा। चुनाव आयोग के अनुसार, पंजीकृत दलों में स्थापित राष्ट्रीय पार्टियां जैसे नेपाली कांग्रेस, कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ नेपाल (एमाले) और माओवादी सेंटर शामिल हैं, साथ ही कई नई क्षेत्रीय और मुद्दा-आधारित पार्टियां भी हैं।

चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया, “यह पंजीकरण लोकतंत्र की मजबूती का प्रमाण है। नेपाल में विविधता हमारी ताकत है, लेकिन इतनी अधिक पार्टियों के बीच वोट बंटवारा चुनौती बन सकता है।” हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि यह स्थिति राजनीतिक अस्थिरता को और बढ़ा सकती है। विश्व बैंक की एक हालिया रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अक्टूबर 2025 में हुए अशांति के कारण नेपाल की आर्थिक वृद्धि दर घटकर मात्र 2.1 प्रतिशत रह गई है। पर्यटन और रेमिटेंस पर निर्भर नेपाली अर्थव्यवस्था को इस अस्थिरता का सबसे ज्यादा नुकसान हो रहा है।

सोशल मीडिया पर इस खबर पर प्रतिक्रियाएं तेजी से आ रही हैं। एक प्रमुख पोस्ट में कहा गया, “नए दल मार्च 2026 के चुनावों में सीटों के लिए संघर्ष कर रहे हैं, जबकि प्रमुख पार्टियों का जनता पर विश्वास खत्म हो चुका है। नेपाल का राजनीतिक भविष्य अनिश्चित है।” विपक्षी नेता पुष्प कमल दहाल ‘प्रचंड’ ने ट्वीट किया, “यह चुनाव नेपाल के पुनर्निर्माण का मौका है, लेकिन पार्टियों को एकजुट होकर काम करना होगा।” वहीं, युवा कार्यकर्ता समूहों ने नई पार्टियों को समर्थन देते हुए कहा कि पुरानी व्यवस्था में बदलाव जरूरी है।

यह चुनाव न केवल नेपाल की आंतरिक राजनीति को प्रभावित करेंगे, बल्कि भारत और चीन जैसे पड़ोसी देशों के साथ उसके संबंधों पर भी असर डालेंगे। नेपाल में राजनीतिक अस्थिरता का इतिहास रहा है, लेकिन इतनी बड़ी संख्या में दलों का पंजीकरण लोकतंत्र की गहराई को दिखाता है। अब सवाल यह है कि क्या ये दल एकजुट होकर देश को स्थिरता प्रदान कर पाएंगे या वोटों का बंटवारा और जटिलता बढ़ाएगा।

यहां से शेयर करें