युवराज मेहता (16 जनवरी की रात) की मौत के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सख्त निर्देशों पर नोएडा प्राधिकरण सक्रिय हुआ। नए सीईओ कृष्णा करुणेश के आदेश पर पूरे शहर में सर्वे कराया गया। 65 ब्लैक स्पॉट्स में से 50 पर बैरिकेडिंग, चेतावनी बोर्ड और रिफ्लेक्टर तक नहीं थे। इनकी जिम्मेदारी बिल्डरों की बताई गई है। प्राधिकरण के बाकी 15 ब्लैक स्पॉट्स पर खुद 15 दिन में सुरक्षा रेलिंग, साइन बोर्ड, रोड मार्किंग और स्ट्रीट लाइट लगाई जाएंगी।
जलभराव की समस्या को जड़ से खत्म करने के लिए 20 गांवों में ड्रेनेज और सॉम्पवेल सिस्टम सुधारने की योजना बनाई गई है। पहले चरण में 7 गांवों के प्रोजेक्ट को मंजूरी मिल चुकी है। पूरे नोएडा का विस्तृत ड्रेनेज सर्वे भी होगा ताकि कमजोर पॉइंट्स पहले ही ठीक हो सकें।
हिरासत बढ़ी, अथॉरिटी पर उठे सवाल
मामले में गिरफ्तार लोटस ग्रीन बिल्डर के रवि बंसल और सचिन करनवाल की न्यायिक हिरासत 29 जनवरी तक, जबकि एमजेड विज टाउन के डायरेक्टर अभय कुमार की हिरासत 2 फरवरी तक बढ़ा दी गई है। सीजेएम कोर्ट में बचाव पक्ष ने दावा किया कि गिरफ्तार लोग सिर्फ वेतनभोगी कर्मचारी हैं, मुख्य मालिक और अधिकारी अभी फरार हैं।

बिल्डरों की ओर से कोर्ट में 500 पेज की रिपोर्ट जमा की गई, जिसमें जीपीएस सैटेलाइट तस्वीरें और दस्तावेज शामिल हैं। दावा किया गया कि 2021 में नाले टूटने की शिकायत नोएडा अथॉरिटी को दी गई थी और रिपेयर के लिए फंड भी मंजूर हुआ, लेकिन काम नहीं हुआ। बचाव पक्ष ने सुप्रीम कोर्ट गाइडलाइंस के उल्लंघन और जल्दबाजी में गिरफ्तारी का आरोप लगाया। जांच अधिकारी ने रिपोर्ट पूरी तरह न पढ़ पाने की बात स्वीकारी, जिस पर कोर्ट ने कड़ी फटकार लगाई।
बीजेपी सांसद डॉ. महेश शर्मा की अध्यक्षता में हुई सड़क सुरक्षा समिति की बैठक में जिले के 152 ब्लैक स्पॉट्स पर सुधार के निर्देश दिए गए। स्पीड ब्रेकर, सिग्नल और सीसीटीवी लगाने पर जोर दिया गया।
युवराज की मौत ने नोएडा में निर्माण और रखरखाव की लापरवाही को उजागर किया है। प्राधिकरण का दावा है कि अब हादसों के बाद नहीं, पहले ही खतरे दूर किए जाएंगे। मामले की जांच जारी है और आने वाले दिनों में और कार्रवाई की संभावना है।

