ग्रेटर नोएडा वेस्ट की महागुन मायवुड्स सोसाइटी के निवासियों का एक प्रतिनिधि मंडल शुक्रवार को ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण (GNIDA) के मुख्यालय पहुंचा और सोसाइटी में बढ़ती आवारा कुत्तों की समस्या त्वरित और स्थायी समाधान कराने की लिखित मांग पेश की। निवासियों ने कहा कि पिछले कई महीनों से आवारा कुत्तों की संख्या में वृद्धि हुई है, जिससे बच्चों, बुज़ुर्गों और पालतू जानवरों की सुरक्षा को खतरा पैदा हो गया है।
निवासियों के प्रतिनिधि ने बताया कि पिछले दो हफ्तों में सोसाइटी के आंगन और पार्किंग एरिया में कई बार हमले और काटने की घटनाएँ हुई हैं। उन्होंने कहा, “कल दोपहर को एक बच्चा जाते समय कुत्तों के झुंड से डर गया और गिरकर चोटिल हो गया। अस्पताल में प्राथमिक उपचार कराना पड़ा।” प्रतिनिधि ने लगातार फीडिंग, अव्यवस्थित कचरा प्रबंधन और खुले स्टॉर्म वाटर ड्रेनेज को समस्या बढ़ाने वाले प्रमुख कारण बताया।
सोसाइटी के लोगों ने GNIDA के समक्ष मांगें रखीं:
आवारा/विकसित कुत्तों के सुरक्षित ट्रैपिंग, वैक्सीनेशन और नसबंदी (TNVR — Trap, Neuter, Vaccinate, Release) कार्यक्रम का शीघ्र क्रियान्वयन। नियमित कचरा संग्रह और सफाई व्यवस्था कड़ाई से लागू करना ताकि भोजन के स्रोत सीमित हों। बच्चों के खेलने के स्थानों के आसपास अस्थायी सुरक्षा और चेतावनी संकेत लगाने की व्यवस्था। इस समस्या के दीर्घकालिक समाधान हेतु GNIDA और स्थानीय पशु कल्याण संगठन के साथ समन्वयित कार्ययोजना बनाना।
GNIDA अधिकारी के साथ हुई बैठक में अधिकारियों ने बताया कि आवारा कुत्तों के संबंध में जनहित और पशु कल्याण दोनों पर ध्यान दिया जाता है और मौजूदा नीतियों के अनुसार मानवीय तरीके से कारवाई करनी होती है। एक अधिकारी ने कहा, “हमारी टीम स्थानीय संगठन और पशु चिकित्सा विभाग के साथ संपर्क में है। मामले की नजदीकी निगरानी कर रहे हैं और अगले तीन दिनों में क्षेत्र का सर्वे करके तत्काल कदम उठाए जाएंगे।” GNIDA ने शुरुआती तौर पर दवा, वैक्सीनेशन और नसबंदी के लिए पारितोषिक बजट तथा ट्रैपिंग की सुविधा उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया।
स्थानीय पशु-कल्याण समूह ‘सेवा फॉर पैट्स’ की समन्वयक ने बताया कि TNVR कार्यक्रम सबसे प्रभावी और मानवीय विकल्प है। उन्होंने कहा, “कई बार स्टेरिलाइज़ेशन और वैक्सीनेशन के बाद कुत्तों की आबादी प्राकृतिक तरीके से नियंत्रित हो जाती है। हमें केवल GNIDA के साथ मिलकर तेज़ और व्यवस्थित अभियान चलाना होगा।” समूह ने निवासियों को कुत्तों को खिलाने के लिए सुरक्षित और नियंत्रित स्थान बनाने, और किसी घायल या रोगग्रस्त जानवर को देखने पर तुरंत रिपोर्ट करने की सलाह दी।
निवासियों का कहना है कि समस्या केवल कुत्तों की संख्या का नहीं, बल्कि सोसाइटी के आसपास कचरे और खाने की उपलब्धता का भी परिणाम है। सोसाइटी के एक निवासी ने बताया, “रात में कुछ लोग खुले में खाना फेंक देते हैं; फल-सब्ज़ी के ठेले भी अक्सर गंदगी छोड़ देते हैं। यदि कचरा मैनेजमेंट सुधरा तो समस्या का बड़ा हिस्सा अपने आप हल हो जाएगा।”
महागुन मायवुड्स के वार्ड सदस्य ने कहा कि इस पर स्थानीय स्तर पर निगरानी बढ़ाई जाएगी और अगले हफ्ते एक जनसुनवाई आयोजित कर फिर से GNIDA और पशु कल्याण समूहों को बुलाया जाएगा ताकि ठोस समय-सीमा तैयार की जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि यदि तीन दिनों में GNIDA से ठोस कार्रवाई नहीं हुई तो सोसाइटी आवर्स पुन: बड़े पैमाने पर प्रदर्शन करने पर विचार कर सकती है। आवारा कुत्तों की समस्या शहरी विस्तार वाले इलाकों में आम है और इसका स्थायी समाधान केवल मानव-केंद्रित और जीव-जंतु कल्याण दोनों पर आधारित नीतियों से ही संभव है। विशेषज्ञ सलाह TNVR अभियानों के साथ-साथ कचरा प्रबंधन, सार्वजनिक जागरूकता और स्थानीय प्रशासन के समन्वय को बताती है।
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