दो प्रमुख भारतीय जहाज शिवालिक और नंदा देवी ने होर्मुज पार कर लिया है। शिवालिक आज (16 मार्च) मुंद्रा पोर्ट पहुंचने वाली है, जबकि नंदा देवी कल (17 मार्च) कांडला पोर्ट पर आएगी। कुल 92,700 मीट्रिक टन एलपीजी लोड है, जो करीब 65 लाख घरेलू सिलेंडर के बराबर है। सरकार ने कहा कि इससे दबाव कम होगा, लेकिन अभी तक राहत मिलती नहीं दिख रही है।
जनता की राय और हालात
सोशल मीडिया और सड़कों पर लोग गुस्से में हैं। कई ने कहा, “सरकार कहती है पैनिक न करें, लेकिन एजेंसियों पर 2-3 घंटे इंतजार, फिर भी सिलेंडर नहीं मिलता।” दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और लखनऊ में कतारें आम हैं। एक सर्वे (LocalCircles, 39,000+ लोग) के मुताबिक, मार्च में 23% घरों ने इंडक्शन स्टोव खरीद लिए—75% ने कहा कि “एलपीजी डिस्टर्ब हो सकता है”। ऑनलाइन स्टॉक खत्म, लोकल मार्केट में महंगे दाम। भोपाल में आज सुबह स्थिति सामान्य हुई—एजेंसियां बिना कतार के 5-10 मिनट में सिलेंडर दे रही हैं, ऑनलाइन बुकिंग रिज्यूम। लेकिन अन्य शहरों में अभी भी दिक्कत। आम लोग कहते हैं: “घर में चूल्हा जलाना मुश्किल हो गया, महंगाई पहले से बढ़ी है, अब ब्लैक मार्केट में 1500-5000 रुपये तक सिलेंडर बिक रहा है।” कुछ ने कहा, “ईरान से पहले सस्ता गैस मिलता था, अब अमेरिका से महंगा खरीद रहे हैं—जनता भुगत रही है।”
रेस्टोरेंट मालिकों और कर्मचारियों की राय
दिल्ली के एक साउथ दिल्ली रेस्टोरेंट मालिक ने कहा, “किचन बंद करना दुख दे रहा है, ब्लैक मार्केट में 5000+ रुपये में सिलेंडर मिल रहा है हम कैसे चलाएं?” कई रेस्टोरेंट ने मेन्यू कट किया, हॉट फूड बंद कर दिया या इंडक्शन/स्ट्रीम पर शिफ्ट हो गए। मुंबई और बेंगलुरु में रेस्टोरेंट एसोसिएशन ने चेतावनी दी—कई आउटलेट 50-60% कमर्शियल सिलेंडर पर निर्भर, अब बंदी की नौबत। एक मालिक बोले, “कमर्शियल सिलेंडर नहीं आ रहे, ब्लैक मार्केट में महंगा—कर्मचारी बेरोजगार हो रहे हैं।”
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर में ISKCON किचन ने सोलर स्टीम से 90% खाना बनाना शुरू किया—अब सिर्फ 1-2 सिलेंडर रोज, 35-40 हजार स्टूडेंट्स को भोजन मिल रहा है। लेकिन छोटे ढाबे-रेस्टोरेंट कहते हैं, “हमारे पास ऐसा ऑप्शन नहीं, बंद होना पड़ रहा है।” इंडस्ट्री का कहना: “₹6.6 लाख करोड़ का रेस्टोरेंट सेक्टर खतरे में—सरकार घरेलू को प्राथमिकता दे रही है, लेकिन कमर्शियल पर असर भारी।”
सरकार और विपक्ष का रुख
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “ईरान से डायलॉग से जहाज गुजर रहे हैं—कोई ब्लैंकेट डील नहीं।”
अखिलेश यादव ने आरोप लगाया, “सरकार और उसके लोग ब्लैक मार्केटिंग में शामिल—हमारी पार्टी कतारें दिखाएगी।”
AAP MLA और पंजाब स्पीकर ने पीएम मोदी पर निशाना साधा—पुराने दोस्त देशों से सस्ता गैस क्यों नहीं?
सरकार ने कहा: “पैनिक न करें, प्रोडक्शन 30% बढ़ा, पाइप्ड गैस जहां संभव शिफ्ट हों।” लेकिन जनता का कहना है, “कागजी दावे से रसोई नहीं चलती।”
जहां शिवालिक आज पहुंच रही है, लेकिन ब्लैक मार्केटिंग और कतारें जारी। यह संकट सिर्फ गैस का नहीं—रसोई, कारोबार और आम आदमी की जेब पर हमला है। आने वाले दिनों में जहाजों के आने से राहत मिल सकती है, लेकिन फिलहाल जनता और रेस्टोरेंट वाले परेशान हैं। क्या सरकार जल्द स्थायी समाधान लाएगी?

