नई दिल्ली। भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को दुनिया के सामने प्रदर्शित करने के लिए आयोजित प्दकपं ।प् प्उचंबज ैनउउपज 2026 एक बड़े विवाद में घिर गई, जब ग्रेटर नोएडा स्थित गलगोटिया यूनिवर्सिटी पर चीनी कंपनी के रोबोटिक डॉग को अपनी यूनिवर्सिटी की खोज बताकर प्रदर्शित करने का गंभीर आरोप लगा। वीडियो वायरल होने के बाद सरकार ने तुरंत कार्रवाई करते हुए गलगोटिया यूनिवर्सिटी को समिट के एक्सपो एरिया से खाली करने का आदेश दे दिया। हालांकि यूनिवर्सिटी प्रबंधन कई दिनों से स्टाल खाली करने को मना कर रहा था। अब पूरी तरह यूनिवर्सिटी को बाहर निकाला गया है। वही यूपी विधानसभा में भी मुद्दा उठाया गया। नेता विपक्ष माता प्रसाद पांडे ने जब यूनिवर्सिटी का झूठ बताया तो सीएम योगी भी मुस्कराने लगे।
क्या है पूरा मामला?
AI Impact Summit, जिसे औपचारिक रूप से India AI Impact Summit 2026 कहा जाता है, नई दिल्ली के भारत मंडपम में 16 से 21 फरवरी 2026 तक आयोजित एक अंतरराष्ट्रीय AI सम्मेलन है। यह समिट दुनियाभर के नीति-निर्माताओं, शोधकर्ताओं, उद्योग जगत के नेताओं, स्टार्टअप्स, और अंतरराष्ट्रीय संगठनों को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी।
इस पांच दिवसीय समिट में गलगोटिया यूनिवर्सिटी का पवेलियन शुरुआत में प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरा था। लेकिन इसी पवेलियन में प्रदर्शित एक रोबोटिक डॉग ने यूनिवर्सिटी को देशभर में शर्मिंदगी का सबब बना दिया। यूनिवर्सिटी की एक प्रोफेसर ने दावा किया कि यह रोबोट गलगोटिया यूनिवर्सिटी में ही विकसित किया गया है, लेकिन सोशल मीडिया यूजर्स ने जल्द ही इसे चीनी कंपनी Unitree Robotics का व्यावसायिक रूप से उपलब्ध उत्पाद पहचान लिया।
प्रोफेसर के झूठ ने पकड़ा तूल
वीडियो में साफ दिखाई दिया कि गलगोटिया यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर नेहा सिंह ने शब्दशः कहा कि इस रोबोटिक डॉग को उनकी यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने विकसित किया है। जबकि हकीकत यह थी कि यह रोबोट चीन की कंपनी न्दपजतमम त्वइवजपबे से खरीदा गया था। कई ऐसे वीडियो सामने आए जिनसे पता चला कि यूनिवर्सिटी के प्रोफेसरों और छात्रों को इस बात की पूरी जानकारी थी कि यह रोबोटिक डॉग उनकी यूनिवर्सिटी ने नहीं बनाया, बल्कि चीनी कंपनी से खरीदा गया है। ।
सफाई और पलटवार
विवाद बढ़ने पर यूनिवर्सिटी ने अपना पक्ष रखा। यूनिवर्सिटी का कहना था कि रोबोट को इन-हाउस डेवलपमेंट के तौर पर पेश नहीं किया गया था और यह डिवाइस छात्रों की ट्रेनिंग व रिसर्च के लिए लिया गया था। हालांकि वायरल वीडियो में प्रोफेसर का बयान इसके ठीक उलट था।
प्रोफेसर नेहा सिंह ने भी अपने झूठ को स्वीकार करने से इनकार कर दिया और कहा कि उनके बयान का गलत मतलब निकाला गया है। ।
यूनिवर्सिटी ने बाद में एक बयान जारी करते हुए कहा कि वे इस घटना से ष्गहरे आहतष् हैं और उनके प्रतिनिधि रोबोट के निर्माण स्थान के बारे में”भलीभांति सूचित नहीं थे।”
सरकार की कड़ी कार्रवाई
सरकार ने इस पूरे मामले को गंभीरता से लिया और गलगोटिया यूनिवर्सिटी के पवेलियन को समिट से खाली करा लिया गया। यहां तक कि पवेलियन की लाइटें भी बंद कर दी गईं। इस विवाद ने उस आयोजन पर ग्रहण लगा दिया जो भारत की तकनीकी महत्वाकांक्षाओं को प्रदर्शित करने के लिए बनाया गया था।
राहुल गांधी का हमला
इस मामले पर विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने भी ग् (ट्विटर) पर पोस्ट करते हुए निशाना साधा और कहा कि AI Impact Summit में चीनी प्रोडक्ट्स शोकेस किए जा रहे हैं। इससे विवाद और राजनीतिक रंग ले लिया।
भारत की साख को नुकसान
जिस समिट को भारत अपनी आवाज बनाकर पूरी दुनिया तक यह संदेश पहुंचाने के लिए आयोजित कर रहा था कि “हम अमेरिका और चीन से पीछे नहीं रहेंगे और अपने AI मॉडल और टूल बनाएंगे” — उसी मंच पर चीन के रोबोटिक डॉग को अपना बताकर गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने भारत की छवि को गहरा नुकसान पहुंचाया।

