ईरान-इजरायल युद्ध: अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच छिड़े युद्ध का धुआँ अब मध्य पूर्व से निकलकर भारत के बाजारों, कारखानों और आम घरों तक पहुँच चुका है। गाजियाबाद समेत पूरे देश के उद्योग जगत पर इस संघर्ष का गहरा असर दिखाई दे रहा है।
तेल और गैस: सबसे बड़ा झटका
1 मार्च 2026 को होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधान के बाद से भारत के ऊर्जा आयात पर भारी दबाव है। ब्रेंट क्रूड $110–120 प्रति बैरल पर पहुँच गया है। रसोई गैस (LPG) के दाम एक हफ्ते में ₹60 प्रति सिलेंडर बढ़ गए हैं — क्योंकि भारत की 91% LPG आपूर्ति खाड़ी देशों से होती है। भारत के वित्त मंत्रालय की मासिक आर्थिक समीक्षा (मार्च 2026) में चेतावनी दी गई है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचा, तो महंगाई बढ़ेगी, चालू खाता घाटा चौड़ा होगा और रुपये पर दबाव बढ़ेगा।
उद्योगों पर सीधा प्रहार
प्लास्टिक और पैकेजिंग उद्योग:
मिडिल ईस्ट तनाव से पेट्रोकेमिकल सप्लाई और लॉजिस्टिक्स बुरी तरह प्रभावित हुए हैं, जिसका असर अब घरेलू पॉलिमर की कीमतों पर पड़ रहा है। PPH से PE तक का इस्तेमाल पैकेजिंग, कंटेनर, बाल्टी और रोजमर्रा की वस्तुओं में होता है, यानी घर से लेकर अस्पताल तक हर चीज़ महंगी होगी।
कपड़ा और रसायन उद्योग (लुधियाना से लेकर गाजियाबाद तक):
डाइंग और केमिकल्स की कीमतों में 30 से 40 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे उत्पादन लागत बढ़ी है। कपड़ों की कीमतों में 10 से 15 प्रतिशत तक बढ़ोतरी की आशंका जताई जा रही है।
रत्न एवं आभूषण उद्योग:
GJEPC के अनुसार खाड़ी देशों में हवाई क्षेत्र पर प्रतिबंध और हवाई अड्डों के बंद होने से इस उद्योग की मुश्किलें बढ़ रही हैं। मार्च 2026 में रत्नों और आभूषणों के व्यापार का 20% हिस्सा प्रभावित होगा, यानी ₹18,500 करोड़ के कारोबार पर संकट है।
कृषि निर्यात पर भारी असर
भारत के 4 लाख मीट्रिक टन से अधिक बासमती चावल बंदरगाहों पर या रास्ते में फँसे हैं। ऑल इंडिया राइस एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष सतीश गोयल के अनुसार भारत का करीब 75% बासमती निर्यात, यानी लगभग 60 लाख टन सालाना, मध्य पूर्व को जाता है। देश के $11.8 अरब के कृषि और खाद्य निर्यात को खतरा है। 3,000 से अधिक शिपिंग कंटेनर कांडला और मुंद्रा जैसे बंदरगाहों पर फँसे हैं।भारत ईरान से 23% सेब और 39% बादाम आयात करता था, ये आयात पूरी तरह रुक गए हैं, जिससे बाजार में “बजट फलों” की किल्लत शुरू हो गई है। केले जैसे निर्यात कांडला बंदरगाह पर सड़ रहे हैं।
व्यापार मार्ग पर दोहरा संकट
अब हूतियों की भी जंग में एंट्री हो गई है। यमन तट के पास बाब अल-मंदेब स्ट्रेट से करीब 12% वैश्विक व्यापार गुजरता है। अगर यह मार्ग भी बाधित हुआ तो जहाजों को अफ्रीका के केप ऑफ गुड होप के रास्ते से जाना होगा, जिसमें दो हफ्ते ज्यादा लगेंगे और लागत भारी बढ़ेगी।
शेयर बाजार और रुपया
28 फरवरी 2026 को युद्ध का एक महीना पूरा होने पर भारतीय शेयर बाजार में अब तक की सबसे बड़ी बिकवाली देखी गई, जिससे निवेशकों को अरबों रुपये का नुकसान हुआ। भारतीय रुपया हाल ही में 94 प्रति डॉलर के पार जा चुका है।
आगे क्या?
भारत सरकार ने 2025-26 के लिए LPG और खाद पर करीब ₹2 लाख करोड़ की सब्सिडी का बजट बनाया था। अगर तेल $80 प्रति बैरल से ऊपर रहा, तो सब्सिडी का बोझ ₹30,000 से ₹50,000 करोड़ अतिरिक्त बढ़ सकता है। दूसरी ओर, चाबहार बंदरगाह परियोजना में भारत का $120 मिलियन से अधिक का निवेश और INSTC व्यापार मार्ग भी अनिश्चितता में हैं।
सार: जो युद्ध हजारों किलोमीटर दूर लड़ा जा रहा है, उसकी आँच अब हर भारतीय की रसोई, कारखाने और जेब तक पहुँच चुकी है। गाजियाबाद जैसे औद्योगिक शहरों को सबसे ज्यादा मार पड़ रही है जहाँ कच्चा माल, रसायन और ऊर्जा लागत एक साथ बढ़ रही है।

