उत्तर प्रदेश में IPS अफसरों को बड़े प्रमोशन का तोहफाः 50 से अधिक अफसरों को नई जिम्मेदारियां

UP Police: उत्तर प्रदेश में नए साल 2026 का आगमन प्रशासनिक बदलावों के साथ भी हुआ है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में प्रदेश सरकार ने करीब 50 आईपीएस अफसरों को विभिन्न रैंक पर प्रमोशन देने का बड़ा फैसला किया है, जिससे पुलिस सेवा के वरिष्ठ और मध्यम स्तर दोनों ही अधिकारियों को नई जिम्मेदारियां मिली हैं। इस कदम को कानून-व्यवस्था को और मजबूत करने, वरिष्ठ नेतृत्व को प्रोत्साहन देने और विभागीय दक्षता बढ़ाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
2001 बैच के आईपीएस
सबसे बड़े प्रमोशन में 2001 बैच के तीन अनुभवी आईपीएस अफसरों तरुण गाबा, आशुतोष कुमार और प्रवीण कुमार को एडीजीपी के पद पर प्रमोट किया गया है। तरुण गाबा पहले आईजी सुरक्षा मुख्यालय और आईजी लखनऊ रेंज के तौर पर कार्यरत रहे हैं, जबकि आशुतोष कुमार और प्रवीण कुमार भी अपनी-अपनी जिम्मेदारियों में उल्लेखनीय कार्य कर रहे थे।
2008 बैच के आईपीएस
2008 बैच के छह अधिकारियों को आईजी के पद पर प्रमोट किया गया है। इनमें शामिल प्रमुख नाम हैं। किरण एस, आनंद सुरेशराव कुलकर्णी, एन कोलांची, अमित वर्मा, राजीव मल्होत्रा और एक अन्य वरिष्ठ अधिकारी जो अब बड़े रेंजों और विशेष प्रभार संभालेंगे।
2012 और 2013 बैच के आईपीएस
मध्यम स्तर के प्रमोशन में 2012 बैच के 13 आईपीएस अधिकारियों को डीआईजी के पद पर पदोन्नति मिली है। इस बैच से प्रमोट होने वाले अधिकारियों के प्रमुख नामों में विजय ढुल, यमुना प्रसाद, सचिंद्र पटेल, अभिषेक यादव, विपिन टाडा, संकल्प शर्मा, सोमेन वर्मा, हेमराज मीणा, आशीष तिवारी, राजकरन नैय्यर, जैसे वरिष्ठ प्रोन्नत अफसर शामिल हैं, जिन्होंने विभिन्न जिलों एवं रेंजों में पुलिसिंग की जिम्मेदारियों के साथ सेवा दी है।

इसके अलावा 2013 बैच के 28 अधिकारियों को एसएसपी स्तर पर प्रमोट किया गया है। इस लिस्ट में अनुराग आर्य, आकाश तोमर, डा. गोरव ग्रोवर, राजेश द्विवेदी, उदय शंकर, सतीश कुमार, यशवीर सिंह, सिद्धार्थ शंकर मीणा, गणेश प्रसाद साहा, कुंवर अनुपम सिंह, डॉ. अभिषेक महाजन, आशीष श्रीवास्तव सहित कई नाम शामिल हैं, जो अब पुलिस नेतृत्व की भूमिकाओं में अग्रणी कार्य करेंगे।

इन पदोन्नतियों से यूपी पुलिस के संचालन, अपराध नियंत्रण और सुरक्षा प्रबंधन की क्षमता को और अधिक मजबूती मिलने की उम्मीद जताई जा रही है। सरकार के इस फैसले को पुलिस विभाग में नई ऊर्जा, मनोबल और प्रशासनिक दक्षता बढ़ाने वाला कदम कहा जा रहा है, जिससे आम जनता की सुरक्षा तथा कानून-व्यवस्था बेहतर स्तर पर सुनिश्चित की जा सकेगी।

 

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