
बैठक की पृष्ठभूमि
सूत्रों के अनुसार, RSS मालवा प्रांत प्रचारक राजमोहन सिंह की अगुवाई में हुई इस बंद कमरे की बैठक में भागीरथपुरा जल संकट की हैंडलिंग, समन्वय की कमी, देरी से प्रतिक्रिया और जनता में नकारात्मक धारणा बनने के कारणों पर चर्चा हुई। बैठक करीब डेढ़ घंटे चली। मेयर भार्गव ने इसे सामान्य बताया और कहा, “मैं स्वयंसेवक हूं, अक्सर RSS कार्यालय जाता हूं। इसका वर्तमान संकट से कोई संबंध नहीं।” कलेक्टर वर्मा ने अभी इस पर कोई टिप्पणी नहीं की है।
कांग्रेस का आरोप
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने मेयर के बाहर खड़े होने का वीडियो शेयर कर सवाल उठाया, “इंदौर के नलों से जहर बह रहा है, लोग मर रहे हैं, परिवार शोक में डूबे हैं, ऐसे में कलेक्टर को अस्पतालों या प्रभावित परिवारों के बीच होना चाहिए या RSS कार्यालय में?” उन्होंने इसे ‘प्रशासनिक निष्पक्षता की नाक कटना’ बताया और कहा कि BJP शासन में प्रशासन स्वतंत्र नहीं रहा। कांग्रेस ने केंद्र और राज्य सरकार से स्पष्टीकरण मांगा और सुप्रीम कोर्ट स्तर की जांच की मांग की है। पार्टी का आरोप है कि दूषित पानी से 18-20 मौतें हुईं, जबकि सरकार केवल 8 मान रही है।
BJP का बचाव
BJP प्रवक्ता शिवम शुक्ला ने आरोप खारिज करते हुए कहा, “यह शिष्टाचार मुलाकात थी, इसमें कुछ गलत नहीं। अधिकारी लोग मिल सकते हैं। कांग्रेस गलत जानकारी फैला रही है।” पार्टी सूत्रों ने बताया कि बैठक में संकट की वजहें, फाइलों में देरी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने पर चर्चा हुई है। BJP ने इसे संकट प्रबंधन का हिस्सा बताया।

जल संकट की ताजा स्थिति
इंदौर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी की ताजा बुलेटिन के अनुसार, भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से अब तक 446 लोग अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं, जिनमें से 396 डिस्चार्ज हो गए, जबकि 50 अभी इलाजरत हैं। 10 मरीज ICU में हैं। सरकार ने हाईकोर्ट को 8 मौतों की जानकारी दी, लेकिन जिला प्रशासन ने 18 परिवारों को 2 लाख रुपये की सहायता चेक वितरित किए। विपक्ष का दावा है कि मौतें इससे ज्यादा हैं। नर्मदा जल लाइन में सीवेज मिक्स होने से यह संकट उत्पन्न हुआ, जिसमें ई. कोलाई बैक्टीरिया मिला। नगर निगम ने उबालकर पानी पीने की सलाह जारी की है।
यह विवाद इंदौर की स्वच्छता की छवि पर सवाल उठा रहा है, जहां प्रशासनिक जवाबदेही और राजनीतिक प्रभाव के आरोप गहरा रहे हैं। मामले की जांच जारी है और राजनीतिक बयानबाजी बढ़ गई है।

