प्रकोप का मुख्य कारण सीवेज लाइन से पेयजल पाइपलाइन में रिसाव बताया गया है, जिससे पानी में ई. कोलाई और फीकल कोलीफॉर्म बैक्टीरिया की पुष्टि हुई है। बोरे वेल के पानी के सैंपलों में भी 50% से अधिक में ई. कोलाई मिला है। कुछ रिपोर्ट्स में गंभीर जटिलताओं जैसे गुइलेन-बैरे सिंड्रोम (GBS) और किडनी फेल्योर के मामले भी सामने आए हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्र में बड़े पैमाने पर सर्वे किया, जिसमें 200 टीमों ने 2,745 घरों का दौरा कर लगभग 14,000 लोगों तक पहुंच बनाई। प्रत्येक घर में ORS पैकेट, जिंक टैबलेट और पानी शुद्ध करने की दवा वितरित की गई। लोगों को पानी उबालने, हाथ धोने और दवाइयों का पूरा कोर्स लेने की सलाह दी गई।
आज जिला कलेक्टर शिवम वर्मा ने भगीरथपुरा क्षेत्र का दौरा कर नई पाइपलाइन के कार्य का निरीक्षण किया और गुणवत्ता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। नगर निगम आयुक्त भी मौके पर मौजूद रहे। क्षेत्र में 5 एम्बुलेंस तैनात हैं, और एमवाई अस्पताल, औरोबिंदो अस्पताल तथा चाचा नेहरू बाल अस्पताल में मरीजों को रेफर किया जा रहा है। निजी अस्पतालों में भी मुफ्त इलाज की व्यवस्था है।
कुछ रिपोर्ट्स में अस्पताल में भर्ती मरीजों की संख्या 142 तक बताई गई है, जबकि नए मामलों को 20 भी कहा गया है। प्रशासन ने स्थिति को नियंत्रित बताया है, लेकिन विपक्षी दल न्यायिक जांच और जिम्मेदारों पर कार्रवाई की मांग कर रहे हैं। क्षेत्र में क्लोरीन युक्त पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने के प्रयास जारी हैं।
यह संकट इंदौर की ‘स्वच्छ शहर’ की छवि पर सवाल उठा रहा है, और प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में है।

