‘I don’t know if my parents are alive: ईरान में हिंसक प्रदर्शनों के बीच भारत में पढ़ रहे ईरानी छात्रों में दहशत, संचार पूरी तरह ठप

‘I don’t know if my parents are alive: ईरान में आर्थिक संकट से शुरू हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन अब चौथे सप्ताह में प्रवेश कर चुके हैं। देश में इंटरनेट और मोबाइल नेटवर्क लगभग पूरी तरह बंद कर दिए गए हैं, जिससे भारत में पढ़ रहे सैकड़ों ईरानी छात्र अपने परिवारों से संपर्क खो चुके हैं। कई छात्रों ने कहा कि उन्हें नहीं पता कि उनके माता-पिता जीवित हैं या नहीं। दिल्ली और पुणे की यूनिवर्सिटीज़ में पढ़ रहे ईरानी छात्र लगातार सोशल मीडिया पर अपडेट देख रहे हैं, लेकिन जानकारी विरोधाभासी और अधरझूल में है।

छात्रों की व्यथा:
• दिल्ली की एक यूनिवर्सिटी में पीएचडी कर रही 32 वर्षीय छात्रा ने बताया, “मैं चार साल से भारत में हूं। पहले रोज़ परिवार से बात होती थी, लेकिन पिछले 10 दिनों से कोई संपर्क नहीं। इंस्टाग्राम पर वीडियो देखती हूं, लेकिन पोस्ट मिनटों में गायब हो जाती हैं। मुझे नहीं पता मेरे माता-पिता ठीक हैं या नहीं।”
• जामिया मिलिया इस्लामिया में पीस एंड कॉन्फ्लिक्ट स्टडीज़ पढ़ रहे 21 वर्षीय सैयद हादी की 19 साल की बहन तेहरान में अकेले हॉस्टल में रहती है। आखिरी बार 8 जनवरी को बात हुई थी। हादी ने कहा, “घर में घबराहट है। हम कुछ कर नहीं सकते।”
• पुणे के फर्ग्यूसन कॉलेज में कॉमर्स एंड मैनेजमेंट की पीएचडी छात्रा (33) ने कहा, “एक हफ्ते से अधिक हो गया, परिवार से कोई खबर नहीं। कुछ रिपोर्ट्स में 13,000 से ज्यादा लोगों के मारे जाने की बात है। मैं नहीं जानती कि वे जीवित हैं या नहीं।”

ईरान में स्थिति:
• प्रदर्शन मुद्रा संकट से शुरू हुए, जहां एक डॉलर की कीमत 14 लाख रियाल तक पहुंच गई। दुकानदारों और व्यापारियों ने सबसे पहले सड़कों पर उतरकर विरोध किया, फिर आम जनता शामिल हो गई।
• तेहरान, इस्फ़हान, क़ोम और मशहद सहित प्रमुख शहरों में पुलिस और सुरक्षा बलों की भारी तैनाती। सरकारी मीडिया के अनुसार “विदेशी साजिश” से प्रेरित “दंगे” हैं, जबकि विपक्षी और अंतरराष्ट्रीय रिपोर्ट्स इसे जनता का आर्थिक और राजनीतिक असंतोष बता रही हैं।
• अनधिकृत रिपोर्ट्स में सैकड़ों से लेकर हजारों मौतों का दावा। इंटरनेट ब्लैकआउट को जानबूझकर किया गया कदम बताया जा रहा है ताकि बाहर खबर न जाए।
• तेहरान एयरस्पेस गुरुवार को अस्थायी रूप से बंद रहा, जिससे अंतरराष्ट्रीय उड़ानें प्रभावित।

भारत सरकार की कार्रवाई:
• विदेश मंत्रालय ने ईरान में रह रहे लगभग 10,000 भारतीयों (मेडिकल छात्र, तीर्थयात्री और सेमिनरी छात्र) की सुरक्षित वापसी के लिए विशेष व्यवस्था शुरू कर दी है।
• तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने भारतीयों को प्रदर्शन स्थलों से दूर रहने और देश छोड़ने पर विचार करने की सलाह दी।
• कुछ भारतीय नागरिक विशेष उड़ानों से वापस आ चुके हैं। सरकार पड़ोसी देशों के रास्ते भी निकासी के विकल्प तलाश रही है।

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रियाएं:
• अमेरिका और इज़राइल ने ईरान की स्थिति पर चिंता जताई है, जबकि कुछ रिपोर्ट्स में संभावित कार्रवाई की आशंका जताई गई।
• ईरानी छात्रों में से एक ने कहा, “ईरान 5,000 साल पुरानी सभ्यता है। यह हमारा आंतरिक मामला है, विदेशी हस्तक्षेप की जरूरत नहीं।”
• मानवाधिकार संगठनों ने दमन की निंदा की, जबकि ईरानी सरकार ने इसे “आंतरिक सुरक्षा मामला” बताया।

छात्र भविष्य को लेकर भी अनिश्चित हैं। एक छात्रा ने कहा, “ईरान मेरा घर है। जो हो रहा है, वह मेरे भविष्य को आकार देगा। मैं एक दिन वहां लौटना चाहती हूं और इस बारे में लिखना चाहती हूं।”

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