Leh Gen Z protests: जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में प्राकृतिक आपदा और राजनीतिक अशांति ने एक साथ संकट पैदा कर दिया है। लेह में राज्यहुड और संविधान की छठी अनुसूची की मांग को लेकर प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई और 80 से अधिक लोग घायल हुए। वहीं, रीसी जिले में भारी बारिश से भूस्खलन ने कई घरों को तबाह कर दिया। राष्ट्रीय सम्मेलन (एनसी) के नेता फारूक अब्दुल्ला और मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने दोनों घटनाओं पर चिंता जताई है।
शांतिपूर्ण आंदोलन से हिंसा तक
लद्दाख की राजधानी लेह में गुरुवार को छठी अनुसूची में शामिल करने और राज्य का दर्जा देने की मांग पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें भड़क उठीं। लेह एपेक्स बॉडी (एलएबी) द्वारा बुलाए गए बंद के दौरान प्रदर्शनकारी भाजपा कार्यालय और सीआरपीएफ वाहन में आग लगा दिए। पुलिस ने लाठीचार्ज, आंसू गैस और गोलीबारी की, जिसमें चार प्रदर्शनकारियों की मौत हो गई और 60 से अधिक घायल हुए, जिनमें 40 पुलिसकर्मी शामिल हैं।
एनसी प्रमुख फारूक अब्दुल्ला ने श्रीनगर में कहा, “कल क्या होगा, हमारे बच्चे क्या करेंगे, इसका मैं कुछ नहीं कह सकता।” उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्रीय सम्मेलन ने कभी गांधीवादी रास्ता नहीं छोड़ा। “हमने कभी पत्थर नहीं उठाए या बम नहीं फेंके। बल्कि, हमने बलिदान दिए हैं…” फारूक ने युवाओं से शांति बनाए रखने की अपील की, लेकिन केंद्र सरकार पर बातचीत में देरी का आरोप लगाया।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने लेह हिंसा पर दुख व्यक्त करते हुए कहा, “लेह की स्थिति खराब है। वहां इतनी कीमती जिंदगियां खोना दुखद है। मैं वहां के लोगों से अपील करता हूं कि कानून अपने हाथ में न लें।” उन्होंने कहा कि सरकार शांति बहाल करने के लिए कदम उठा रही है। केंद्र सरकार ने कार्यकर्ता सोनम वांगचुक पर हिंसा भड़काने का आरोप लगाया है। वांगचुक ने वीडियो संदेश में कहा, “मेरा शांतिपूर्ण संदेश विफल हो गया। युवाओं से अपील है कि यह बकवास बंद करें, इससे हमारा मुद्दा कमजोर होता है।” लेह प्रशासन ने कर्फ्यू लगा दिया है और 50 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया है। भाजपा ने कांग्रेस पर हिंसा का आरोप लगाया, जबकि विपक्ष ने केंद्र की नीतियों को जिम्मेदार ठहराया।
रीसी भूस्खलन पहाड़ खिसकने से घर तबाह, सरकार ने राहत का वादा
दूसरी ओर, रीसी जिले के महौरा क्षेत्र में भारी बारिश से भूस्खलन ने भयंकर तबाही मचाई। एक पूरा पहाड़ खिसक गया, जिससे कई घर क्षतिग्रस्त हो गए। स्थानीय लोगों के अनुसार, भड्डर गांव में एक परिवार के सात सदस्यों समेत 11 लोगों की मौत हो चुकी है। बाढ़र गांव में एक घर पूरी तरह दब गया, जिसमें पति-पत्नी और उनके पांच बच्चे दबकर मर गए। रामबन जिले के राजगढ़ में भी चार लोगों की मौत हुई।
मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने रीसी पहुंचकर स्थिति का जायजा लिया। उन्होंने कहा, “बहुत नुकसान हो चुका है। पूरा पहाड़ खिसक गया है। इससे लोगों के घर तबाह हो गए हैं। सरकार अधिक से अधिक मदद प्रदान करेगी।” उमर ने अधिकारियों को रिस्क जोन से तत्काल निकासी और राहत कार्य तेज करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा, “मौसम खराब है, सभी सतर्क रहें।” उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने मृतकों के परिजनों को 9 लाख रुपये की सहायता की घोषणा की। आईएमडी ने अगले कुछ दिनों तक भारी बारिश की चेतावनी जारी की है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं और आगे की राह
ये घटनाएं जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक तनाव को और बढ़ा रही हैं। एनसी नेता तनवीर सादिक ने कहा, “लेह और जेकेई की तरह लद्दाख का भी गलत तरीके से प्रबंधन हो रहा है। हिंसा की निंदा करते हैं, लेकिन केंद्र को बातचीत करनी चाहिए।” विपक्षी दलों ने केंद्र पर उपेक्षा का आरोप लगाया, जबकि भाजपा ने इसे “साजिश” करार दिया।
मुख्यमंत्री ने दोनों मुद्दों पर केंद्र से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की है। लेह में कर्फ्यू जारी है, जबकि रीसी में राहत कार्य तेज हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन और विकास परियोजनाओं से ऐसी आपदाएं बढ़ रही हैं। सरकार ने कहा है कि शांति बहाल करने और राहत पहुंचाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।

