नोएडा: गौतमबुद्धनगर पुलिस ने तकनीकी कौशल और तत्परता का परिचय देते हुए एक बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह के कड़े निर्देशों के अनुपालन में, नोएडा जोन की पुलिस और सर्विलांस सेल ने विभिन्न स्थानों से गुम हुए 220 स्मार्टफोन्स को बरामद कर उनके वास्तविक स्वामियों को सौंप दिया है। इन बरामद किए गए मोबाइल फोनों की अनुमानित बाजार कीमत लगभग 50 लाख रुपये बताई जा रही है।
तकनीकी टीम और पुलिस की संयुक्त कार्रवाई
पुलिस उपायुक्त (DCP) ग्रेटर नोएडा, साद मियां खान के निर्देशन और अपर पुलिस उपायुक्त (ADCP) नोएडा मनीषा सिंह व सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) के निकट पर्यवेक्षण में यह विशेष अभियान चलाया गया। सर्विलांस सेल नोएडा और थाना सेक्टर-49 सहित नोएडा जोन के अन्य थानों की पुलिस ने CEIR (Central Equipment Identity Register) पोर्टल और आधुनिक सर्विलांस तकनीक का प्रभावी उपयोग करते हुए इन फोनों को ट्रैक किया।
इन स्थितियों में खोए थे मोबाइल
पुलिस जांच और बरामदगी के दौरान मोबाइल गुम होने के कई दिलचस्प और सामान्य कारण सामने आए हैं, जो आम जनता के लिए एक सबक भी हैं:
- बाजार और भीड़भाड़: अधिकांश फोन सब्जी मंडियों, साप्ताहिक बाजारों और भीड़भाड़ वाले इलाकों में खरीदारी के दौरान असावधानीवश गिर गए थे।
- सफ़र के दौरान: ऑटो, टैक्सी, बस और मेट्रो में यात्रा करते समय यात्री अपने फोन सीट पर ही भूल गए।
- पहनावे की लापरवाही: दोपहिया वाहन चलाते समय ढीले कपड़े (जैसे लोअर या पायजामा) पहनने के कारण झटके लगने या ब्रेकर आने पर फोन जेब से फिसल गए।
- सार्वजनिक स्थान और कार्यक्रम: पार्कों में व्यायाम करते समय, शादी समारोहों में डांस के दौरान या धार्मिक स्थलों पर दर्शन के समय फोन छूट जाने की घटनाएं भी बड़ी संख्या में दर्ज थीं।
- अन्य कारण: बच्चों द्वारा खेलते समय कहीं रख देना या नशे की हालत में फोन पर ध्यान न देना भी गुमशुदगी की मुख्य वजहें बनीं।

स्वामियों के खिले चेहरे
ADCP मनीषा सिंह ने कहा कि आज जब पुलिस कार्यालय में मोबाइल वितरण कार्यक्रम आयोजित किया गया, तो अपने खोए हुए कीमती फोन वापस पाकर लोगों की खुशी का ठिकाना न रहा। कई लोगों ने उम्मीद छोड़ दी थी कि उनका फोन कभी वापस मिलेगा। पुलिस की इस कार्यप्रणाली की जनता ने भूरि-भूरि प्रशंसा की है।
ADCP मनीषा सिंह ने बताया “हमारा उद्देश्य केवल अपराध नियंत्रण ही नहीं, बल्कि जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान करना भी है। CEIR पोर्टल और हमारी सर्विलांस टीम के समन्वय से आज 220 परिवारों की डिजिटल पूंजी उन्हें वापस मिली है।”

