Former Additional Commissioner’s property seized: उत्तर प्रदेश के वाणिज्य कर विभाग के सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के इस बड़े मामले में लंबी जांच के बाद आखिरकार कानूनी शिकंजा कसा है। विजिलेंस जांच में उनके पास 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की संपत्ति होने का खुलासा हुआ है, जिसके बाद उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज कर लिया गया है।
2017 में आयकर छापे से हुई थी शुरुआत
इस पूरे मामले की शुरुआत साल 2017 में हुई थी, जब आयकर विभाग ने नोएडा के सेक्टर-34 स्थित उनके घर पर छापेमारी की। इस दौरान जो नजारा सामने आया, उसने अधिकारियों को भी चौंका दिया घर के हर कोने से नोटों की गड्डियाँ बरामद हुईं चाहे वह पूजाघर हो, अलमारी हो, बिस्तर के गद्दे हों या फिर बाथरूम का फ्लश। नोएडा के घर से 10 करोड़ रुपये नकद और 3 करोड़ रुपये के जेवरात, तथा कानपुर के किराये के मकान से 4 करोड़ रुपये नकद बरामद हुए।
आय और खर्च में 17 करोड़ का फर्क
जांच में पाया गया कि केशव लाल ने अपने पूरे सरकारी करियर में वैध स्रोतों से मात्र 1 करोड़ 34 हजार रुपये की आय अर्जित की, लेकिन उन्होंने करीब 18 करोड़ 27 लाख रुपये खर्च कर डाले। इस तरह उनकी आय से 17 करोड़ 26 लाख रुपये अधिक संपत्ति पाई गई।
5 शहरों में फैली अकूत संपत्ति
जांच रिपोर्ट में सामने आया कि केशव लाल के पास लखनऊ में दो संपत्तियाँ हैं, जबकि कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद और नोएडा में एक-एक संपत्ति मौजूद है, जिनकी कीमत करोड़ों रुपये में बताई जा रही है।
9 साल बाद दर्ज हुई FIR
19 सितंबर 2023 से विजिलेंस विभाग ने जांच तेज कर दी। जांच के दौरान चंदौली, कानपुर, प्रयागराज, गाजियाबाद, नोएडा और लखनऊ में केशव लाल की बहुमूल्य संपत्तियों के दस्तावेज मिले। 6 जनवरी 2026 को विजिलेंस ने अपनी अंतिम रिपोर्ट सौंप दी और रिपोर्ट के आधार पर मंजूरी मिलने के बाद 8 अप्रैल 2026 को कानपुर में FIR दर्ज कराई गई।
पेंशन भी हो चुकी है बंद
जुलाई 2024 में ही योगी सरकार ने विस्तृत जांच रिपोर्ट के बाद केशव लाल की पेंशन बंद करने का फैसला कर लिया था।  छापे के महज एक महीने बाद मई 2017 में ही उन्हें अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी गई थी।
अब नोएडा आएगी विजिलेंस टीम
सेवानिवृत्त एडिशनल कमिश्नर केशव लाल के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले में विजिलेंस उनकी नोएडा की संपत्ति के सत्यापन के लिए नोएडा आएगी। मामले की विवेचना एक राजपत्रित अधिकारी को सौंपी गई है और संपत्ति के स्रोत, बैंक लेनदेन तथा परिवार के सदस्यों की भूमिका की भी गहन जांच की जाएगी।

