नेताओं के साथ रहा लेकिन नेता नहीं बना, पंचायत के अभिनेता की प्रेरक कहानी

Faisal Malik News: एक अखबार में दिए हालिया साक्षात्कार में अभिनेता फैसल मलिक ने अपनी जिंदगी और करियर के उन पहलुओं पर खुलकर बात की, जो उन्हें न केवल एक बेहतरीन कलाकार बनाते हैं, बल्कि एक सच्चे इंसान के रूप में भी प्रेरित करते हैं। उनकी यह बात कि “नेता के साथ रहे, पर नेता नहीं बने” सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में है। आइए, इस बयान के पीछे की कहानी और इसके मायने समझने की कोशिश करते हैं।

एक साधारण शुरुआत से स्टारडम तक
फैसल मलिक, जिन्हें लोकप्रिय वेब सीरीज पंचायत में ‘प्रह्लाद चाचा’ के किरदार के लिए जाना जाता है, ने अपने अभिनय से दर्शकों का दिल जीत लिया है। लेकिन उनकी जिंदगी का सफर उतना आसान नहीं था। इलाहाबाद (प्रयागराज) में जन्मे फैसल ने अपने करियर की शुरुआत पत्रकारिता और फिल्म निर्माण के क्षेत्र में की थी। उन्होंने कई बड़े नेताओं और प्रभावशाली लोगों के साथ काम किया, लेकिन कभी भी सत्ता या शोहरत के पीछे नहीं भागे।

अखबार में दिए साक्षात्कार में फैसल ने बताया कि उन्होंने हमेशा अपनी जड़ों को याद रखा और सादगी को अपनाया। उन्होंने कहा, “मैंने नेताओं के साथ काम किया, उनकी दुनिया को करीब से देखा, लेकिन मैंने कभी खुद को उस रास्ते पर नहीं चलने दिया। मेरा लक्ष्य हमेशा लोगों के दिलों तक अपनी कला और कहानियों को पहुंचाना रहा।”

“नेता नहीं बने” का मतलब
फैसल का यह बयान कि “नेता के साथ रहे, पर नेता नहीं बने” गहरे सामाजिक और व्यक्तिगत मूल्यों को दर्शाता है। यह बयान इस बात की ओर इशारा करता है कि उन्होंने सत्ता, प्रभाव या स्वार्थ की राजनीति में शामिल होने के बजाय अपनी नैतिकता और सिद्धांतों को प्राथमिकता दी। यह एक ऐसी प्रेरणा है जो आज के दौर में, जब लोग शोहरत और सत्ता के पीछे भाग रहे हैं, उनके लिए बेहद महत्वपूर्ण है।

सोशल मीडिया पर फैसल के इस बयान को खूब सराहा जा रहा है। एक यूजर ने लिखा, “फैसल मलिक जैसे लोग हमें सिखाते हैं कि असली कामयाबी सादगी और ईमानदारी में है, न कि सत्ता के पीछे भागने में।”

पंचायत और फैसल का प्रभाव
पंचायत सीरीज में फैसल मलिक का किरदार ‘प्रह्लाद चाचा’ ग्रामीण भारत के एक साधारण, भावुक और सच्चे इंसान का है। उनकी एक्टिंग ने न केवल दर्शकों को हंसाया और रुलाया, बल्कि यह भी दिखाया कि छोटे-छोटे किरदार ने भी गहरी छाप छोडे हैं। फैसल ने अपने किरदार को इतनी गहराई दी कि यह किरदार अब घर-घर में जाना जाता है। साक्षात्कार में उन्होंने बताया कि वह अपने किरदारों में वास्तविकता लाने के लिए अपनी जिंदगी के अनुभवों का सहारा लेते हैं।

निष्कर्ष
फैसल मलिक की कहानी और उनका यह बयान आज के युवाओं के लिए एक मिसाल है। वे हमें सिखाते हैं कि सत्ता और शोहरत के पीछे भागने के बजाय, हमें अपने काम और मूल्यों पर ध्यान देना चाहिए। पंचायत के ‘प्रह्लाद चाचा’ की तरह, फैसल मलिक भी असल जिंदगी में एक सच्चे और सादगी भरे इंसान हैं, जो अपने काम से लाखों दिलों को छू रहे हैं।

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