Explainer: ई-20 के बाद अब ई-30 की तैयारी? पेट्रोल में बढ़ेगी इथेनॉल की मात्रा

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ई-22 से ई-30 ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी शून्य, सरकार के फैसले से मिले बड़े संकेत

कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने, किसानों की आय बढ़ाने और प्रदूषण कम करने पर फोकस

Explainer: नई दिल्ली। देश में पेट्रोल में इथेनॉल मिश्रण बढ़ाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने ई-22, ई-25, ई-27 और ई-30 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल पर केंद्रीय उत्पाद शुल्क (एक्साइज ड्यूटी) को पूरी तरह समाप्त कर दिया है। खास बात यह है कि वर्तमान में देश में ई-20 से अधिक इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल का व्यावसायिक उपयोग शुरू भी नहीं हुआ है। ऐसे में इस फैसले को भविष्य में उच्च इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन को बढ़ावा देने की तैयारी के रूप में देखा जा रहा है।

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भारत में इथेनॉल मिश्रण कार्यक्रम की शुरुआत 2000 के दशक में हुई थी, लेकिन वर्ष 2014 तक पेट्रोल में इथेनॉल की औसत हिस्सेदारी महज 1.5 प्रतिशत थी। मोदी सरकार के कार्यकाल में इसे चरणबद्ध तरीके से बढ़ाकर पहले ई-10 और फिर ई-20 तक पहुंचाया गया। अगस्त 2025 में देश ने 19.93 प्रतिशत औसत इथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य समय से पहले हासिल कर लिया था। वर्तमान में देशभर में ई-20 पेट्रोल उपलब्ध है और 1 अप्रैल 2026 से इसका उपयोग अनिवार्य कर दिया गया है।

आयातित तेल पर निर्भरता घटाने की रणनीति

भारत अपनी कुल तेल जरूरत का करीब 85 प्रतिशत हिस्सा आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों और आपूर्ति संकट के बीच सरकार घरेलू स्तर पर उत्पादित इथेनॉल के उपयोग को बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करना चाहती है। विशेषज्ञों का मानना है कि उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधन को कर में छूट देकर तेल कंपनियों को इनके उत्पादन और वितरण के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ

इथेनॉल का उत्पादन मुख्य रूप से गन्ने और मक्के जैसी कृषि उपज से होता है। ऐसे में इथेनॉल की मांग बढ़ने से किसानों को सीधा लाभ मिलने की संभावना है। सरकार का मानना है कि इससे विदेशी मुद्रा में होने वाले तेल आयात खर्च में कमी आएगी और कृषि क्षेत्र को नई आर्थिक मजबूती मिलेगी।

प्रदूषण कम करने में भी मददगार

सरकार के अनुसार, पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ने से कार्बन उत्सर्जन में कमी आती है। ई-20 ईंधन के उपयोग से ई-10 की तुलना में उत्सर्जन में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है। इथेनॉल का ऑक्टेन स्तर अधिक होने के कारण ईंधन बेहतर तरीके से जलता है और प्रदूषण फैलाने वाली गैसों का उत्सर्जन कम होता है।

पुराने वाहनों के लिए बढ़ सकती है परेशानी

हालांकि, विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि ई-10 और ई-20 के लिए डिजाइन किए गए पुराने वाहनों में ई-22, ई-25 या ई-30 जैसे उच्च इथेनॉल मिश्रित ईंधन का उपयोग करने पर माइलेज में कमी और इंजन के पुर्जों को नुकसान पहुंचने का खतरा बढ़ सकता है। इथेनॉल की अधिक मात्रा फ्यूल लाइन, रबर सील, गैसकेट और इंजेक्टर जैसे हिस्सों पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है।

Explainer: मल्टी-ब्लेंड ईंधन व्यवस्था पर काम

सरकार फिलहाल ई-20 से अधिक इथेनॉल मिश्रण को अनिवार्य बनाने के पक्ष में नहीं दिख रही है। पुराने वाहनों को ध्यान में रखते हुए पेट्रोल पंपों पर अलग-अलग इथेनॉल मिश्रण वाले ईंधन उपलब्ध कराने की योजना पर काम किया जा रहा है। इसके तहत उपभोक्ता अपनी गाड़ी की क्षमता के अनुसार ई-20, ई-25, ई-30 या अन्य ईंधन का चयन कर सकेंगे।

Explainer: फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को मिलेगा बढ़ावा

भविष्य की जरूरतों को देखते हुए सरकार और ऑटोमोबाइल कंपनियां फ्लेक्स-फ्यूल वाहनों को बढ़ावा दे रही हैं। ये वाहन ई-20 से लेकर ई-100 तक किसी भी स्तर के इथेनॉल मिश्रित ईंधन पर चलने में सक्षम होते हैं। कई वाहन निर्माता कंपनियां ऐसे मॉडल बाजार में उतारने की तैयारी कर रही हैं।

Explainer: इथेनॉल ब्लेंडिंग का सफर

  • 2014 : 1.5% इथेनॉल मिश्रण
  • 2022 : ई-10 लक्ष्य हासिल
  • 2023 : ई-20 ईंधन लॉन्च
  • अगस्त 2025 : 19.93% औसत ब्लेंडिंग
  • 2026 : ई-20 अनिवार्य
  • अब : ई-22 से ई-30 ईंधन पर एक्साइज ड्यूटी शून्य

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