Election Commission vs. Mamata Banerjee: सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी ने चुनाव आयोग को बताया ‘व्हाट्सऐप कमीशन’, SIR प्रक्रिया पर गरमाई बहस; अगली सुनवाई सोमवार को

Election Commission vs. Mamata Banerjee: पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आज सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग के खिलाफ अपनी याचिका पर व्यक्तिगत रूप से दलीलें पेश कीं। यह एक ऐतिहासिक मौका था जब किसी राज्य की कार्यवाहक मुख्यमंत्री ने देश की सर्वोच्च अदालत में मुख्य न्यायाधीश की बेंच के सामने खुद केस लड़ा हो। मामला पश्चिम बंगाल में चल रही मतदाता सूची की स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया से जुड़ा है, जिसे ममता बनर्जी ने राजनीतिक पक्षपात और वोटरों के नाम काटने की साजिश बताया।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच (जस्टिस जोयमाला बागची और जस्टिस विपुल पांचोली के साथ) ने सुनवाई की। कोर्ट रूम में ममता बनर्जी खुद मौजूद रहीं और बेंच से अनुमति लेकर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा, “न्याय दरवाजे के पीछे रो रहा है… हमें कहीं से न्याय नहीं मिल रहा। हमने चुनाव आयोग को छह पत्र लिखे, लेकिन कोई जवाब नहीं।” उन्होंने चुनाव आयोग पर गंभीर आरोप लगाते हुए इसे “व्हाट्सऐप कमीशन” करार दिया और कहा कि आयोग अनौपचारिक निर्देश व्हाट्सऐप के जरिए दे रहा है।

ममता ने दलील दी कि SIR प्रक्रिया से TMC समर्थक क्षेत्रों में चुनिंदा तरीके से वोटरों के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया, “बंगाल को ही क्यों टारगेट किया जा रहा है? असम में SIR क्यों नहीं हो रहा?” साथ ही, नामों में स्पेलिंग या स्थानीय उच्चारण की गलतियों को आधार बनाकर लोगों को वोटर लिस्ट से बाहर करने का आरोप लगाया।

बेंच ने ममता की दलीलों को गंभीरता से सुना। CJI ने टिप्पणी की कि नामों में छोटी-मोटी गलतियां (जैसे दत्ता vs दत्त या शर्मा vs सरमा) स्थानीय बोली की वजह से हो सकती हैं और इसमें चुनाव आयोग को संवेदनशीलता बरतनी चाहिए। कोर्ट ने कहा कि कोई निर्दोष व्यक्ति वोटर लिस्ट से बाहर न हो, इसका ध्यान रखा जाए।

सुनवाई के बाद सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को नोटिस जारी कर ममता बनर्जी की याचिका पर जवाब मांगा है। अगली सुनवाई सोमवार को होगी।

सुनवाई के बाद टीएमसी सांसद कल्याण बनर्जी ने मीडिया से बातचीत में बताया कि कोर्ट रूम में ममता बनर्जी ने क्या-क्या दलीलें रखीं और बेंच की क्या टिप्पणियां रहीं। उन्होंने इसे लोकतंत्र की रक्षा के लिए बड़ा कदम बताया।

यह मामला 2026 में होने वाले पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव से पहले और अहम हो गया है। ममता ने पहले भी मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार से मुलाकात कर SIR पर आपत्ति जताई थी, लेकिन कोई हल नहीं निकला। अब सुप्रीम कोर्ट में यह लड़ाई और तेज हो गई है।

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