Delhi’s Palam fire: तीन मासूमों समेत एक परिवार के 9 लोग जिंदा जले, हाइड्रोलिक क्रेन फेल, 40 मिनट की देरी ने ली निर्दोष जानें

जब सुबह की नींद कफ़न बन गई
Delhi’s Palam fire: दिल्ली के पालम इलाके में बुधवार सुबह एक दर्दनाक हादसा सामने आया, जहां एक बहुमंजिला इमारत में लगी भीषण आग ने एक पूरे परिवार को तबाह कर दिया। इस हादसे में तीन बच्चों समेत कुल 9 लोगों की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य लोग गंभीर रूप से झुलस गए।

यह इमारत पालम मेट्रो स्टेशन के पास राम चौक मार्केट में स्थित थी। इमारत के बेसमेंट, भूतल और पहली मंजिल पर कपड़े तथा सौंदर्य प्रसाधन का शोरूम था, जबकि शोरूम के मालिक राजेंद्र कश्यप अपनी पत्नी, बेटों, बेटी, बहुओं और पोते-पोतियों के साथ दूसरी और तीसरी मंजिल पर रहते थे।

मृतकों में प्रवेश (33), कमल (39), आशु (35), लाडो (70), हिमांशी (22) और 15, 6 व तीन साल की तीन बच्चियां शामिल हैं। वहीं 19 वर्षीय सचिन सहित तीन अन्य का इलाज सफदरजंग और आईजीआई अस्पताल में चल रहा है। प्रारंभिक जांच में आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट होने का अंदेशा जताया गया है। दिल्ली पुलिस ने पालम गांव थाने में बीएनएस की संबंधित धाराओं के तहत अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है।

बचाव में लापरवाही: जब मशीन ने साथ छोड़ा
प्रत्यक्षदर्शियों और ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, फायर ब्रिगेड के देरी से पहुंचने की वजह से हादसा इतना भयानक हुआ। सबसे बड़ा सवाल हाइड्रोलिक क्रेन की विफलता को लेकर है, रिपोर्टों के मुताबिक क्रेन काफी देर तक खुल ही नहीं पाई और दूसरी मशीन आने में करीब 40 मिनट लग गए, जब तक आग पूरी तरह बेकाबू हो चुकी थी।

आग की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कुछ लोगों ने जान बचाने के लिए इमारत से छलांग लगा दी। दो लोग नीचे कूद गए, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए। पड़ोसियों ने सबसे पहले छत के रास्ते इमारत में दाखिल होने की कोशिश की, लेकिन आग बेकाबू हो चुकी थी और गर्मी इतनी ज्यादा थी कि अंदर जाना असंभव हो गया। हार न मानते हुए लोगों ने इमारत की दीवार तोड़ने का फैसला किया ताकि फंसे हुए लोगों को निकाला जा सके। घनी आबादी, तंग गलियों और भारी धुएं के कारण बचाव कार्य बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। हालांकि दमकल की 30 गाड़ियां और 11 एंबुलेंस की मदद से बचाव कार्य चलाया गया और एनडीआरएफ व वायुसेना पुलिस ने भी मोर्चा संभाला।

बारिश में उठीं नौ अर्थियां
पालम के साध नगर हादसे में जान गंवाने वाले सभी 9 लोगों का बुधवार शाम को ही दीन दयाल उपाध्याय अस्पताल में पोस्टमार्टम करा दिया गया। परिजनों ने देर शाम पालम के मंगलापुरी श्मशान घाट में नम आंखों से सभी का अंतिम संस्कार कर दिया। परिवार के 9 शवों को देखकर राजेंद्र कश्यप बार-बार बेहोश हुए जा रहे थे।

नेताओं की प्रतिक्रिया
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी: पीएम मोदी ने इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त करते हुए लिखा कि दिल्ली के पालम में हुई आग की घटना अत्यंत दुखद है और जिन्होंने अपनों को खोया है, उनके प्रति उनकी संवेदनाएं हैं। उन्होंने मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता: सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पालम स्थित बहुमंजिला आवासीय इमारत में आग लगने की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के बारे में जानकर अत्यंत दुख हुआ और घटना की जांच के लिए मजिस्ट्रियल जांच के आदेश दिए गए हैं।

दिल्ली सरकार का मुआवजा: दिल्ली सरकार ने पालम अग्निकांड में जान गंवाने वाले मृतकों को 10 लाख रुपये, मृत बच्चों के परिजनों को 5 लाख और गंभीर घायलों को 2 लाख रुपये के मुआवजे का एलान किया।

उपराज्यपाल तरनजीत सिंह संधू: उपराज्यपाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि पालम मेट्रो स्टेशन के पास रिहायशी इमारत में लगी आग की घटना से वे बेहद दुखी हैं और राहत व बचाव कार्य पर लगातार नजर रखी जा रही है।

सोशल मीडिया पर आक्रोश
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X (पूर्व में ट्विटर) पर #PalamFire और #DelhiFire ट्रेंड करने लगे। लोगों ने हाइड्रोलिक क्रेन की विफलता और फायर ब्रिगेड की देरी पर कड़ा आक्रोश जताया। यूजर्स ने पूछा — “राजधानी दिल्ली में इतना लचर डिजास्टर रिस्पांस क्यों?” कई लोगों ने डेढ़ साल की बच्ची को ऊपर से फेंकने का वीडियो शेयर करते हुए लिखा कि यह दृश्य दिल तोड़ने वाला है। लोगों ने मांग की कि मुआवजे से ज्यादा जरूरी है कि सिस्टम की जवाबदेही तय हो।

सवाल जो नहीं भूलने चाहिए
इस हादसे ने एक बार फिर रिहायशी इलाकों में सुरक्षा मानकों और अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक टीम को बुलाया गया है और विस्तृत जांच जारी है। यह हादसा महज एक दुर्घटना नहीं है, यह उस व्यवस्था की विफलता है जहाँ एक परिवार के 9 लोग, जिनमें तीन मासूम बच्चियां थीं, केवल इसलिए नहीं बचाए जा सके क्योंकि एक हाइड्रोलिक क्रेन समय पर काम नहीं कर सकी। सवाल यह है जांच होगी, मुआवजा मिलेगा, लेकिन जवाबदेही कब तय होगी?

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