Cyber Fraud in Kanpur: फर्जी जुकरबर्ग’ और ‘नकली मस्क’ ने लूटी जिंदगी भर की कमाई, कानपुर की रिटायर्ड शिक्षिका से ₹1.57 करोड़ की ‘डिजिटल डकैती’

Cyber Fraud in Kanpur: डिजिटल दुनिया के सबसे चर्चित और ताकतवर चेहरों का मुखौटा ओढ़कर साइबर ठगों ने कानपुर में एक ऐसी वारदात को अंजाम दिया है, जिसने पूरे देश को हिलाकर रख दिया है। साइबर ठगों ने सोशल मीडिया के जरिए खुद को मार्क जुकरबर्ग, अमेरिकी गायक जॉश टर्नर और एलन मस्क का सहयोगी बताकर एक रिटायर्ड महिला शिक्षक से करीब ₹1.57 करोड़ की ठगी कर ली। पीड़िता चकेरी इलाके की 60 वर्षीया सेवानिवृत्त शिक्षिका एलिसन वीम्स हैं। उन्होंने 16 मार्च 2026 को साइबर अपराध थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई। ठगी का यह सिलसिला जनवरी 2025 में शुरू होकर फरवरी 2026 तक, यानी करीब 13 महीनों तक चला।

पहला झांसा — ‘मार्क जुकरबर्ग’ बनकर दोस्ती:
खुद को मार्क जुकरबर्ग बताने वाले व्यक्ति ने जनवरी 2025 में एलिसन वीम्स से फेसबुक पर संपर्क किया और धीरे-धीरे उनका भरोसा जीतने के बाद कानपुर में एक प्रस्तावित ‘इंटरनेशनल स्कूल प्रोजेक्ट’ में भारी मुनाफे और स्कूल में बड़ा पद दिलाने का वादा किया। एक सेवानिवृत्त शिक्षिका को यह प्रस्ताव सपने जैसा लगा — कि उनके पूरे जीवन के अनुभव को एक बड़े मंच पर इस्तेमाल किया जाएगा।

दूसरा झांसा — ‘एलन मस्क की टीम’ का प्रवेश:
इसके बाद दूसरे जालसाज भी व्हाट्सएप और फेसबुक के जरिए बातचीत में शामिल हो गए, और खुद को अमेरिकी गायक जॉश टर्नर और एलन मस्क के सहयोगी के तौर पर पेश किया।

तीसरा झांसा — ‘विजडम कैपिटल’ का निवेश नाटक:
ठगों ने ‘विजडम कैपिटल’ नामक कंपनी में निवेश दिखाते हुए एक फर्जी ट्रेडिंग अकाउंट भी बनाया और उसमें राशि 2.23 करोड़ रुपये दर्शाई। पीड़िता को लगा कि उनका पैसा बढ़ रहा है, लेकिन यह महज एक डिजिटल मायाजाल था।

चौथा झांसा — ‘रिकवरी एजेंट’ और ‘वकील’ का नया रूप:
जब शिक्षिका ने ऑनलाइन शिकायत करने की कोशिश की तो ‘अशोक सुरेश’ नाम के एक शख्स ने खुद को वकील बताते हुए झांसा दिया कि उनके पैसे एक बड़ी कंपनी में इन्वेस्ट हो गए हैं और उन्हें 2.33 करोड़ रुपये मिलेंगे — लेकिन इसके बदले टैक्स और स्टांप ड्यूटी के नाम पर फिर से लाखों रुपये वसूल लिए।

जब सब कुछ लुट गया:
रिटायर्ड शिक्षिका ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी, पीएफ का पैसा और गहने बेचकर कुल ₹1.57 करोड़ रुपये ठगों द्वारा बताए गए विभिन्न बैंक खातों में ट्रांसफर कर दिए। जब ठगों ने और पैसों की मांग की, तब जाकर महिला को असलियत का एहसास हुआ।

पुलिस की कार्रवाई
एडीसीपी अंजलि विश्वकर्मा ने बताया कि जांच जारी है। पुलिस ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए ₹30.42 लाख रुपये की राशि को होल्ड करा दिया है।  कानपुर की साइबर सेल ने जांच में पाया है कि ठगी के तार नाइजीरियाई गैंग और दिल्ली के कुछ लोकल सप्लायर्स से जुड़े हो सकते हैं।

सोशल मीडिया पर उबाल — जनता का गुस्सा
यह मामला सामने आते ही सोशल मीडिया पर लोगों की प्रतिक्रियाएं तेज हो गईं। X (ट्विटर), फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #KanpurCyberFraud और #RetiredTeacherFraud जैसे हैशटैग ट्रेंड करने लगे।

एक यूजर ने लिखा — “एक रिटायर्ड शिक्षिका ने पूरी ज़िंदगी बच्चों को ईमानदारी का पाठ पढ़ाया, और उसी की जमा पूंजी इन दरिंदों ने लूट ली। यह सिर्फ ठगी नहीं, एक सम्मानित जीवन का अपमान है।”दूसरे ने टिप्पणी की — “अगर मार्क जुकरबर्ग वाकई फेसबुक पर रैंडम लोगों को मैसेज करके कानपुर में स्कूल खोलता, तो शायद वो पहले से ही वहां होता। यह भोलापन नहीं, सिस्टम की विफलता है।” कई नागरिकों ने मांग की कि मेटा और X (ट्विटर) जैसी कंपनियों को भारत में अपने प्लेटफॉर्म पर फर्जी VIP प्रोफाइल रोकने के लिए कड़ी जवाबदेही तय की जाए।

साइबर विशेषज्ञों की राय
साइबर एक्सपर्ट की सलाह है कि कोई भी बड़ा सेलिब्रिटी या अरबपति सोशल मीडिया पर रैंडम लोगों से बिजनेस पार्टनरशिप नहीं करता और पार्सल छुड़ाने के नाम पर किसी भी अज्ञात खाते में पैसे नहीं भेजने चाहिए। विशेषज्ञों का कहना है कि AI के जरिए अब चेहरा, आवाज और यहां तक कि दस्तावेज भी नकली बनाना आसान हो गया है। “डीपफेक” तकनीक ने इन ठगों को एक नया हथियार दे दिया है जिसकी पहचान करना आम आदमी के लिए बेहद कठिन है।

क्या करें, क्या न करें
पुलिस और साइबर विशेषज्ञों की संयुक्त सलाह:
फेसबुक, व्हाट्सएप या टेलीग्राम पर अनजान VIP प्रोफाइल से आई किसी भी ‘बिजनेस ऑफर’ को तुरंत नजरअंदाज करें। किसी भी ‘प्रोसेसिंग फीस’, ‘कस्टम ड्यूटी’ या ‘टैक्स’ के नाम पर अज्ञात खाते में पैसे न भेजें। निवेश से पहले SEBI पंजीकृत कंपनी की जांच अवश्य करें। साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें या cybercrime.gov.in पर शिकायत दर्ज करें। जितनी जल्दी शिकायत होगी, उतनी ही अधिक रकम फ्रीज होने की संभावना होगी

एलिसन वीम्स की यह पीड़ा अकेली नहीं है। यह उन लाखों वरिष्ठ नागरिकों की आवाज है जो डिजिटल साक्षरता की कमी और भरोसे के कारण इन जालसाजों के शिकार बनते हैं। जरूरत है कि परिवार के बुजुर्गों को डिजिटल सुरक्षा की शिक्षा दी जाए — इससे पहले कि कोई और जिंदगी भर की कमाई गंवा बैठे।​​​​​​​​​​​​​​​​

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