नोएडा और ग्रेटर नोएडा समेत पूरे गौतमबुद्ध नगर में साइबर ठगी के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। खास बात यह है कि साइबर अपराधी अब केवल कम पढ़े-लिखे या तकनीकी जानकारी से अनजान लोगों को ही निशाना नहीं बना रहे, बल्कि अच्छी शिक्षा और नौकरी-पेशे से जुड़े लोग भी इनके जाल में फंस रहे हैं। ठग अलग-अलग तरीकों से लोगों का भरोसा जीतकर कुछ ही मिनटों में उनके बैंक खातों से लाखों रुपये उड़ा रहे हैं। कभी डिजिटल अरेस्ट के नाम पर डराया जा रहा है तो कभी निवेश में मोटे मुनाफे का लालच देकर रकम ट्रांसफर कराई जा रही है।
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर लाखों की ठगी
नोएडा-ग्रेटर नोएडा में साइबर ठगी का एक बड़ा तरीका तथाकथित डिजिटल अरेस्ट बन चुका है। साइबर अपराधी पुलिस, सीबीआई, ईडी, नारकोटिक्स विभाग या अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर लोगों को फोन करते हैं। इसके बाद उन्हें बताया जाता है कि उनके नाम से कोई अवैध पार्सल, बैंक खाता या मनी लॉन्ड्रिंग का मामला सामने आया है।
ठग वीडियो कॉल पर पुलिस अधिकारी जैसी वर्दी और फर्जी दस्तावेज दिखाकर पीड़ित को घंटों तक बातों में उलझाए रखते हैं। कई मामलों में पीड़ित को घर से बाहर निकलने या किसी अन्य व्यक्ति से संपर्क करने से भी रोक दिया जाता है। डर के कारण पढ़े-लिखे लोग भी ठगों के निर्देशों का पालन करते हुए अपने बैंक खाते से बड़ी रकम ट्रांसफर कर देते हैं।
निवेश के नाम पर बनाया जा रहा शिकार
साइबर ठगी का दूसरा बड़ा तरीका ऑनलाइन निवेश और ट्रेडिंग के नाम पर सामने आया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म और मैसेजिंग ऐप के जरिए लोगों को शेयर बाजार, आईपीओ, क्रिप्टोकरेंसी या अन्य निवेश योजनाओं में मोटा मुनाफा कमाने का लालच दिया जाता है।
पीड़ित को पहले एक फर्जी ट्रेडिंग ऐप या वेबसाइट से जोड़ा जाता है। शुरुआत में खाते में मुनाफा दिखाई देता है और कभी-कभी छोटी रकम निकालने की अनुमति भी दी जाती है। इससे पीड़ित का भरोसा बढ़ जाता है। इसके बाद ठग बड़ी रकम निवेश कराने लगते हैं। जब पीड़ित अपनी रकम वापस निकालने की कोशिश करता है तो टैक्स, सिक्योरिटी फीस, प्रोसेसिंग चार्ज या अन्य शुल्क के नाम पर लगातार पैसे मांगे जाते हैं।
फिनटेक कंपनी के सर्वर से छेड़छाड़ कर करोड़ों की रकम निकली
नोएडा में साइबर अपराध का एक मामला इस बात की गंभीरता को दिखाता है कि अब अपराधी केवल आम लोगों को ही नहीं बल्कि डिजिटल भुगतान से जुड़ी कंपनियों को भी निशाना बना रहे हैं। एक फिनटेक कंपनी के सर्वर से छेड़छाड़ कर करीब 2.42 करोड़ रुपये की रकम निकाले जाने का मामला सामने आया। जांच में बड़ी संख्या में संदिग्ध एपीआई ट्रांजेक्शन और कई बैंक खातों के इस्तेमाल की बात सामने आई। इस तरह के मामलों में अपराधी तकनीकी जानकारी का इस्तेमाल करते हुए डिजिटल पेमेंट सिस्टम में सेंध लगाने की कोशिश करते हैं। इससे साफ है कि साइबर अपराध अब केवल फोन कॉल या फर्जी लिंक तक सीमित नहीं रह गया है।
बैंक अधिकारी बनकर भी ठगी
कई मामलों में साइबर ठग खुद को बैंक अधिकारी बताकर फोन करते हैं। क्रेडिट कार्ड बंद होने, केवाईसी अपडेट, बैंक खाता ब्लॉक होने या संदिग्ध ट्रांजेक्शन की जानकारी देकर पीड़ित को डराया जाता है। इसके बाद ओटीपी, कार्ड डिटेल, यूपीआई पिन या मोबाइल पर आया लिंक साझा करने के लिए कहा जाता है। कई बार ठग पीड़ित के मोबाइल पर रिमोट एक्सेस ऐप डाउनलोड करवाकर फोन का नियंत्रण हासिल करने की कोशिश करते हैं। इसके बाद बैंकिंग ऐप से रकम ट्रांसफर की जा सकती है।
पढ़े-लिखे लोग क्यों फंस रहे हैं?
साइबर ठग अब अपनी रणनीति को लगातार बदल रहे हैं। वे पहले पीड़ित की प्रोफाइल और आर्थिक स्थिति का अंदाजा लगाते हैं और फिर उसी के मुताबिक कहानी तैयार करते हैं। नौकरीपेशा व्यक्ति को नौकरी या निवेश के नाम पर, कारोबारी को बिजनेस पेमेंट के नाम पर और बुजुर्गों को बैंक या सरकारी कार्रवाई का डर दिखाकर निशाना बनाया जा सकता है।
ठगों के पास बैंक, पुलिस, कुरियर, निवेश कंपनी या सरकारी विभाग जैसी भाषा बोलने वाले प्रशिक्षित लोग भी हो सकते हैं। यही वजह है कि कुछ सेकंड के लिए पैदा हुआ डर या लालच व्यक्ति को जल्दबाजी में आर्थिक फैसला लेने पर मजबूर कर देता है।
एक गलती और खाली हो सकता है बैंक खाता
साइबर विशेषज्ञों के मुताबिक किसी भी अनजान व्यक्ति को OTP, UPI PIN, ATM PIN, CVV या इंटरनेट बैंकिंग पासवर्ड नहीं बताना चाहिए। बैंक या कोई सरकारी एजेंसी वीडियो कॉल पर डिजिटल अरेस्ट जैसी कार्रवाई नहीं करती। किसी भी संदिग्ध कॉल पर तुरंत पैसा ट्रांसफर करने के बजाय संबंधित विभाग या बैंक के आधिकारिक नंबर से संपर्क करना चाहिए।
अगर साइबर फ्रॉड हो जाए तो पीड़ित को समय बर्बाद किए बिना 1930 साइबर हेल्पलाइन पर शिकायत करनी चाहिए और National Cyber Crime Reporting Portal पर भी शिकायत दर्ज करनी चाहिए। जितनी जल्दी बैंक और साइबर पुलिस को सूचना दी जाएगी, रकम को फ्रीज कराने की संभावना उतनी ही बढ़ सकती है।
नोएडा में बढ़ते साइबर अपराध ने बढ़ाई चिंता
नोएडा और ग्रेटर नोएडा देश के बड़े आईटी और कॉरपोरेट हब में शामिल हैं। यहां बड़ी संख्या में आईटी प्रोफेशनल, कारोबारी, स्टार्टअप संचालक और दूसरे राज्यों से आए नौकरीपेशा लोग रहते हैं। डिजिटल बैंकिंग और ऑनलाइन ट्रांजेक्शन का इस्तेमाल भी बड़े स्तर पर होता है। ऐसे में साइबर अपराधियों के लिए यह क्षेत्र लगातार आकर्षक निशाना बना हुआ है।
साइबर ठगी के मामलों से सबसे बड़ा सबक यही है कि शिक्षा और तकनीकी जानकारी के बावजूद जल्दबाजी, डर या लालच में लिया गया एक फैसला भारी आर्थिक नुकसान करा सकता है। साइबर अपराधी तकनीक के साथ-साथ मनोवैज्ञानिक दबाव का इस्तेमाल कर रहे हैं, इसलिए किसी भी अनजान कॉल, लिंक, निवेश प्रस्ताव या सरकारी कार्रवाई के नाम पर आए संदेश की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना जरूरी है।
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