सीजेआई सूर्यकांत ने ‘वोट चोरी’ मुद्दे पर INDIA गठबंधन नेताओं की मुलाकात का अनुरोध ठुकराया, याचिका दायर करें

नई दिल्ली, मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) जस्टिस सूर्यकांत ने रविवार को INDIA गठबंधन के नेताओं की मुलाकात का अनुरोध खारिज कर दिया। विपक्षी नेता सोमवार (12 अक्टूबर) को सुप्रीम कोर्ट मार्च कर ज्ञापन सौंपने वाले थे।

लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी और राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे समेत INDIA ब्लॉक के नेताओं ने सीजेआई से सोमवार शाम 4 से 5 बजे के बीच मुलाकात का समय मांगा था। वे ‘वोट चोरी’ (कथित चुनावी अनियमितताओं), विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया रोकने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग वाला ज्ञापन सौंपना चाहते थे।

सीजेआई के कार्यालय ने ईमेल के जरिए विस्तार से जवाब भेजकर अनुरोध अस्वीकार कर दिया। सूत्रों के अनुसार, सीजेआई ने स्पष्ट किया कि संबंधित मुद्दे पहले से ही अदालत में विचाराधीन (sub judice) हैं। इसलिए प्रशासनिक स्तर पर किसी राजनीतिक प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात उचित नहीं है। सुप्रीम कोर्ट प्रशासनिक रूप से ऐसी मांगों पर कोई निर्देश जारी नहीं कर सकता। नेताओं को न्यायिक पक्ष से याचिका दायर कर अदालत का रुख करना चाहिए।

सीजेआई ने यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट के दरवाजे हर नागरिक के मौलिक अधिकारों की रक्षा के लिए 24 घंटे खुले हैं। संबंधित मामलों की सुनवाई मंगलवार (13 अक्टूबर) को भी निर्धारित है। कोई नई याचिका दायर होने पर उसे इन्हीं मामलों के साथ सुना जा सकता है।

राहुल गांधी ने पहले ऐलान किया था कि विपक्षी दल, नागरिक समाज और युवा मिलकर सुप्रीम कोर्ट तक मार्च करेंगे। उन्होंने कहा था, “हम देश की ओर से सीजेआई को ज्ञापन सौंपेंगे, जिसमें वोट चोरी रोकने, SIR रोकने और ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग होगी। डरने की जरूरत नहीं।”

इससे पहले शुक्रवार को INDIA गठबंधन के नेताओं ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से मुलाकात कर इसी तरह का ज्ञापन सौंपा था। दिल्ली में सीजेपी (कॉकरोच जनता पार्टी) के प्रदर्शनों के दौरान पुलिस कार्रवाई और हजारों लोगों की हिरासत के बाद विपक्ष ने आरोप लगाया था कि सरकार शांतिपूर्ण विरोध को कुचल रही है।

सीजेआई के इनकार के बावजूद विपक्ष का मार्च योजना के अनुसार होने की संभावना है। गठबंधन के नेताओं ने कहा है कि वे देशवासियों की ओर से लोकतंत्र और संविधान की रक्षा के लिए आवाज उठाते रहेंगे। यह मुद्दा पिछले कई महीनों से गरमाया हुआ है। विपक्ष चुनाव आयोग पर पक्षपात और मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप लगाता रहा है, जबकि चुनाव आयोग और सरकार इसे अवैध घुसपैठियों की पहचान के लिए आवश्यक प्रक्रिया बताते हैं। सुप्रीम कोर्ट पहले भी SIR प्रक्रिया की वैधता पर सुनवाई कर चुका है।

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