बंगाल चुनाव: पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 से ठीक पहले राज्य का राजनीतिक और कानूनी माहौल तेजी से गर्म हो गया है। सुप्रीम कोर्ट ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की उस अपील को खारिज कर दिया है जिसमें राज्य से केंद्रीय बलों को वापस बुलाने की मांग की गई थी।
सुप्रीम कोर्ट का स्पष्ट आदेश केंद्रीय बल नहीं हटेंगे
चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने साफ शब्दों में कहा कि हालिया हिंसक घटनाओं और व्यवधानों को देखते हुए राज्य से केंद्रीय सुरक्षा बलों को फिलहाल नहीं हटाया जाएगा। अदालत ने यह भी कड़ी चेतावनी दी कि “अगर राज्य मशीनरी सुरक्षा सुनिश्चित करने में विफल रहती है, तो कोर्ट देखेगा कि क्या कदम उठाए जा सकते हैं।” इस बीच चुनाव आयोग पहले ही केंद्रीय बलों की 480 कंपनियाँ बंगाल में तैनात कर चुका है और कुल करीब 2,500 कंपनियों की तैनाती की योजना है।
मालदा कांड न्यायिक अधिकारियों का घेराव, NIA जांच के आदेश
पश्चिम बंगाल के मालदा में मतदाता सूची की विशेष गहन संशोधन (SIR) प्रक्रिया के दौरान 3 महिलाओं समेत 7 न्यायिक अधिकारियों को करीब एक घंटे तक बंधक बनाया गया। सुप्रीम कोर्ट ने इसे पूर्व-नियोजित साजिश बताते हुए राज्य सरकार को कड़ी फटकार लगाई और न्यायिक अधिकारियों की सुरक्षा के लिए केंद्रीय बल तैनात करने का आदेश दिया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने जांच NIA को सौंपने के निर्देश दिए। मुख्य साजिशकर्ता को भी गिरफ्तार किया जा चुका है जो कथित रूप से फरार होने की कोशिश में था।
मतदाता सूची विवाद 59 लाख दावों का निपटारा
SIR प्रक्रिया के तहत हटाए गए नामों पर लगभग 59.15 लाख दावों और आपत्तियों का निपटारा सोमवार दोपहर तक पूरा कर लिया गया। ममता बनर्जी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान ने कोर्ट को बताया कि 19 अपीलीय न्यायाधिकरण अभी पूरी तरह कार्यात्मक नहीं हुए हैं। ममता बनर्जी ने SIR के विरोध में सर्वोच्च अदालत का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन कोर्ट ने इस प्रक्रिया पर रोक लगाने से इनकार कर दिया।
ED बनाम ममता — I-PAC छापेमारी का मामला भी कोर्ट में
ममता बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में प्रवर्तन निदेशालय (ED) पर आरोप लगाया कि 8 जनवरी 2026 को I-PAC के दफ्तर पर छापा ठीक चुनावों से पहले मारा गया, जो चुनावी प्रक्रिया में दखल और दुरुपयोग है। ED ने पलटवार करते हुए आरोप लगाया कि छापे के दौरान मुख्यमंत्री ने इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस और दस्तावेज जब्त किए तथा राज्य पुलिस ने जांच में बाधा डाली।
कानूनी विशेषज्ञों की राय
सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ अधिवक्ता ध्रुव कुमार (LLM) का कहना है कि केंद्रीय बलों के बिना बंगाल में निष्पक्ष चुनाव संभव नहीं है। उनके मुताबिक राज्य सरकार संविधान की सीमाओं का उल्लंघन कर खुद को एक स्वतंत्र सत्ता की तरह पेश कर रही है। चुनाव आयोग की शक्तियों को लेकर ममता बनर्जी के बयान को उन्होंने कानूनी दृष्टि से गलत बताया। चुनाव आयोग के वकील ने सुप्रीम कोर्ट में ममता बनर्जी के एक भाषण का हवाला देते हुए कहा कि ऐसी बातों से केवल माहौल बिगड़ता है और स्थिति खराब होती है।
राजनीतिक समीकरण
चुनाव आयोग ने ममता बनर्जी के करीबी और कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर सुप्रतिम सरकार की अर्जी भी खारिज करते हुए साफ कर दिया है कि इस बार बंगाल में निष्पक्ष चुनाव कराना आयोग की सर्वोच्च प्राथमिकता है। सुप्रीम कोर्ट का यह सक्रिय हस्तक्षेप महज एक तकनीकी आदेश नहीं, बल्कि चुनावी प्रक्रिया में भरोसा बहाल करने की एक व्यापक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। बंगाल में विधानसभा चुनाव की तारीखें नजदीक आ रही हैं और हर मोर्चे पर अदालत, चुनाव आयोग और जमीनी स्तर — टकराव तेज होता जा रहा है। आने वाले दिन यह तय करेंगे कि लोकतंत्र की यह परीक्षा किस दिशा में जाती है।

