पिछली नीलामी 26 नवंबर को ऑनलाइन आयोजित हुई थी, जहां आईटी कंपनी के डायरेक्टर सुधीर कुमार ने इस आठ के क्रम वाले आकर्षक नंबर के लिए 1 करोड़ 17 लाख रुपये की सबसे ऊंची बोली लगाई थी। यह बोली भारत की सबसे महंगी VIP नंबर प्लेट बनने वाली थी। हालांकि, तय समयसीमा के भीतर सुधीर ने केवल सिक्योरिटी डिपॉजिट जमा कर पाए और शेष राशि जमा करने से इनकार कर दिया। उन्होंने बाद में मीडिया को बताया कि परिवार के दबाव में यह फैसला लिया गया, क्योंकि “यह नंबर इतना कीमती नहीं है”। परिणामस्वरूप, नीलामी रद्द हो गई और सिक्योरिटी अमाउंट जब्त कर लिया गया।
कल (10 दिसंबर) हुई नई नीलामी में नंबर की कीमत में भारी गिरावट दर्ज की गई। सुषमा ने 26.71 लाख रुपये की बोली लगाकर इसे हासिल किया। परिवहन विभाग के अनुसार, यह नुकसान राज्य की राजस्व हानि का स्पष्ट उदाहरण है, जो बोली प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े करता है। विभाग ने कुल 50 से अधिक VIP नंबरों की नीलामी की, लेकिन HR88B8888 का मामला सबसे चर्चित रहा।
परिवहन मंत्री अनिल विज ने इस घटना पर सख्त रुख अपनाते हुए कहा, “बोली लगाना कोई शौक नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है।” उन्होंने अधिकारियों को सुधीर कुमार की आर्थिक क्षमता की जांच करने के निर्देश दिए हैं। विज ने यह भी घोषणा की कि आयकर विभाग को पत्र भेजा जाएगा, ताकि बोलीदाता की संपत्ति और आय का सत्यापन हो सके। “ऐसी घटनाएं भविष्य में दोहराने नहीं दी जाएंगी। बोली प्रक्रिया को और मजबूत बनाया जाएगा,” उन्होंने जोर देकर कहा।
विपक्षी दलों ने भी इस मुद्दे पर सरकार को घेर दिया। कांग्रेस नेता ने टिप्पणी की कि “यह राजस्व की बर्बादी है और अमीरों का स्टंट राज्य को महंगा पड़ रहा है।” वहीं, परिवहन विभाग का कहना है कि नीलामी से अब तक करोड़ों रुपये का राजस्व अर्जित हो चुका है, लेकिन इस तरह की असफलताएं चिंताजनक हैं।
यह घटना हरियाणा में VIP नंबरों की बढ़ती मांग को दर्शा रहा है, जहां अमीर वर्ग इनके लिए लाखों-करोड़ों खर्च करने को तैयार रहता है। विभाग ने भविष्य की नीलामियों में बोलीदाताओं की वित्तीय पृष्ठभूमि की पूर्व जांच अनिवार्य करने का संकेत दिया है। मामला अभी भी जांच के दायरे में है, और सुधीर कुमार पर आगे की कार्रवाई संभव है।

