पीलीभीत मतदाता सूची घोटाला: EPIC नंबर वही, नाम-पिता का नाम बदल दिए गए; दो SDM सस्पेंड, FIR दर्ज, CBI जांच की मांग

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत जिले की सदर विधानसभा सीट पर मतदाता सूची में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं सामने आई हैं। विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की अंतिम सूची 10 अप्रैल 2026 को प्रकाशित होने के बाद जुलाई से सितंबर के बीच हजारों मतदाताओं के नाम और उनके पिता के नाम बदल दिए गए, जबकि उनका EPIC नंबर, सीरियल नंबर, उम्र और मकान नंबर लगभग वैसा ही रहा। विपक्षी दलों का आरोप है कि इससे असली मतदाता 2027 के विधानसभा चुनाव में वोट डालने से वंचित हो सकते हैं और फर्जी लोग उनकी जगह वोट डाल सकते हैं।

कांग्रेस ने दावा किया कि कुल 16,000 से अधिक प्रविष्टियों में गड़बड़ी हुई। इसमें 13,150 मतदाताओं के नाम बदले गए, 804 नाम हटाए गए और करीब 2,600 नए नाम जोड़े गए। जांच में चुनाव आयोग ने 10,470 अनियमित प्रविष्टियों की पुष्टि की है। मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) नवदीप रिनवा ने इसे “गलती नहीं, बल्कि अपराध” करार दिया।

कैसे सामने आया मामला

मामला अक्टूबर 2026 के मध्य में उजागर हुआ। कांग्रेस नेता और AICC सदस्य कुमुद गंगवार के अनुसार, 13 अक्टूबर को एक व्यक्ति साइबर कैफे में अपना EPIC नंबर लेकर मतदाता पहचान पत्र निकलवाने पहुंचा। वहां एडवोकेट रिहान मौजूद थे। कार्ड निकलने पर नाम किसी और का आया। बार-बार जांच के बाद शक हुआ कि सूची में छेड़छाड़ हुई है। उन्होंने कुमुद गंगवार को सूचना दी।

इसके बाद कांग्रेस की टीम ने रात भर एक बूथ की जांच की। 1,045 वोटों में 134 नाम बदले और 8 काटे गए पाए गए। फिर 52-55 कार्यकर्ताओं की टीम ने लगभग 96 घंटे तक 3,48,937 मतदाताओं के डेटा को फिल्टर किया। नतीजे चौंकाने वाले थे। उदाहरण के तौर पर:

एक EPIC नंबर पर पहले “परवान अहमद” था, जो “नवाब करीम खान” बन गया।

“मोहम्मद इमदाद” (पिता मोहम्मद अहमद) का नाम “मुअज्जम” (पिता वारिस खान) हो गया।

“नूरुद्दीन” (पिता रफीक अहमद) का नाम “इलियास” (पिता अली मोहम्मद) कर दिया गया। कई जगह मुस्लिम नामों को अन्य नामों से बदला गया।

कांग्रेस का आरोप है कि ज्यादातर प्रभावित मतदाता मुस्लिम समुदाय के थे। पार्टी ने कहा कि फॉर्म-8 (सुधार के लिए) बिना भरे और बिना दस्तावेज के ये बदलाव हुए। सामान्य प्रक्रिया में मतदाता खुद फॉर्म-8 भरता है, लेकिन यहां ऐसा कुछ नहीं हुआ।

समाजवादी पार्टी ने भी इससे पहले शिकायत की थी। सपा प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल ने मुख्य निर्वाचन अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर कहा था कि EPIC नंबर सर्च करने पर किसी और व्यक्ति का विवरण आ रहा है।

चुनाव आयोग की कार्रवाई

जांच में पाया गया कि वोटर रजिस्ट्रेशन सेंटर के कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार ने 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच 13,779 फॉर्म-8 प्रविष्टियां कीं। इनमें से 10,470 मंजूर और 3,309 खारिज हुईं। लेकिन ऑफिस में इनके कोई भौतिक आवेदन या सहायक दस्तावेज नहीं मिले।

इसके बाद कार्रवाई हुई:

दो एसडीएम (ईआरओ) मयंक गोस्वामी और हेमंत कुमार चौधरी को पद से हटाया गया, FIR दर्ज की गई और बाद में निलंबित कर दिया गया। भारत निर्वाचन आयोग ने भी उनके निलंबन के निर्देश दिए और कहा कि बिना आयोग की अनुमति के उन्हें बहाल नहीं किया जाए। कंप्यूटर ऑपरेटर अनिल कुमार की सेवाएं समाप्त कर दी गईं। FIR में आरपीए की धारा 32 और भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धाराएं लगाई गईं। बाद में BNS की धारा 198 जोड़ने के निर्देश भी दिए गए।

पूरे राज्य के जिला निर्वाचन अधिकारियों को मतदाता सूचियों की जांच के आदेश दिए गए। ECINET पोर्टल पर कंप्यूटर सहायकों की लॉगिन आईडी बंद करने के निर्देश भी जारी हुए। CEO नवदीप रिनवा ने कहा कि यह सिस्टम की गलती नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया कृत्य है। सुधार प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 12 नवंबर 2026 से विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण अभियान शुरू होना था, जिसमें मतदाता फॉर्म-8 के जरिए सुधार करवा सकते हैं।

राजनीतिक प्रतिक्रिया और मांगें

कांग्रेस नेताओं राजेंद्र पाल गौतम, सुप्रिया श्रीनाते और कुमुद गंगवार  ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर आरोप लगाया कि यह 2027 के चुनाव को प्रभावित करने की साजिश है। उन्होंने याद दिलाया कि 2022 में इस सीट पर भाजपा विधायक संजय गंगवार सिर्फ 6,930 वोटों के अंतर से जीते थे। 16,000 से ज्यादा मतों का खेल चुनावी नतीजों को पलट सकता था।

कुमुद गंगवार ने ECI-Net सॉफ्टवेयर के ऑडिट और पूरे रैकेट की CBI जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि जिले के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (DM) को क्लीन चिट क्यों दी गई, जबकि काम ऑनलाइन सॉफ्टवेयर पर हो रहा था। सपा ने भी सख्त कार्रवाई की मांग की। कुछ रिपोर्टों में दावा किया गया कि असली मास्टरमाइंड अभी सामने नहीं आया है और जांच आगे नहीं बढ़ रही। विपक्ष का कहना है कि सिर्फ अधिकारियों को सस्पेंड करके मामला नहीं सुलझेगा।

आगे क्या

निर्वाचन आयोग ने अनियमित प्रविष्टियों को सुधारने का काम शुरू कर दिया है। मतदाताओं से अपील की गई है कि वे अपनी डिटेल्स ऑनलाइन चेक करें और जरूरत पड़ने पर फॉर्म-8 भरें। ड्राफ्ट रोल 12 नवंबर के आसपास प्रकाशित होने की उम्मीद थी।

यह मामला चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। EPIC नंबर वही रखकर नाम बदलने का तरीका अगर सिस्टम में संभव है, तो अन्य जगहों पर भी इसकी जांच जरूरी है। विपक्ष CBI जांच और सॉफ्टवेयर ऑडिट की मांग पर अड़ा हुआ है, जबकि आयोग प्रशासनिक और कानूनी कार्रवाई आगे बढ़ा रहा है। सभी तथ्यों की पुष्टि समाचार रिपोर्ट्स और आधिकारिक बयानों पर आधारित है। जांच अभी जारी है।

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