ACP मनस्वी वशिष्ठ सस्पेंड: दिल्ली पुलिस मुख्यालय पर धरने के अगले दिन गृह मंत्रालय का एक्शन, जानें पूरा मामला

नई दिल्ली। शाहदरा थाने में वकीलों से हुए विवाद के बाद शुरू हुआ घटनाक्रम अब दिल्ली पुलिस के भीतर के असंतोष तक पहुंच गया है। एसीपी मनस्वी वशिष्ठ को गृह मंत्रालय ने तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई सोमवार को पुलिस मुख्यालय (PHQ) के बाहर पुलिसकर्मियों के प्रदर्शन के अगले दिन हुई।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मंत्रालय ने इस प्रदर्शन को अनुशासन का उल्लंघन माना है। रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रदर्शन के दौरान एसीपी की भूमिका और उनके भाषण को लेकर यह कदम उठाया गया।

कैसे शुरू हुआ विवाद: 23 अक्टूबर की घटना

विवाद की जड़ 23 अक्टूबर की शाम शाहदरा थाने में हुई घटना है। रिपोर्टों के अनुसार इससे पहले अधिवक्ता ललित बंसल के सिर में गंभीर चोट आई थी। अधिवक्ता अमूल्य रतन की शिकायत पर शाहदरा थाने में मामला दर्ज हुआ (FIR संख्या 248/2026)।

कुछ वकील आरोपियों पर कार्रवाई की मांग लेकर थाने पहुंचे। वकीलों की समन्वय समिति के सर्कुलर के मुताबिक एसीपी और एसएचओ ने आरोपियों की गिरफ्तारी का भरोसा दिया था। बाद में जब वकील मामले की कार्रवाई पर सवाल उठाने और जवाबदेही मांगने दोबारा पहुंचे तो टकराव हुआ। वकीलों का आरोप है कि एसीपी ने अपनी सर्विस रिवॉल्वर दिखाकर उन्हें धमकाया।

दूसरी ओर, एसीपी ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि वकीलों ने उनके और एसएचओ के साथ गाली-गलौज की, पुलिसकर्मियों के काम में बाधा डाली और दुर्व्यवहार किया। पीटीआई के हवाले से आई रिपोर्ट के अनुसार पुलिस ने 15-20 वकीलों के खिलाफ अलग मामला भी दर्ज किया। रिवॉल्वर दिखाने का आरोप वकीलों की ओर से है, इसकी किसी स्वतंत्र जांच का नतीजा अब तक सामने नहीं आया है।

वकीलों की हड़ताल और तबादला

दिल्ली की सभी जिला अदालतों की बार एसोसिएशनों की समन्वय समिति ने 26 अक्टूबर को आपात बैठक के बाद 27 अक्टूबर को न्यायिक कार्य से विरत रहने का ऐलान किया। मांग थी कि एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और संबंधित एसएचओ को निष्पक्ष जांच तक निलंबित किया जाए। सर्कुलर दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश और दिल्ली पुलिस आयुक्त को भी भेजा गया।

27 अक्टूबर को हड़ताल के बाद समिति ने अनिश्चितकालीन हड़ताल का ऐलान कर दिया। 28 अक्टूबर को पुलिस मुख्यालय ने एसीपी मनस्वी वशिष्ठ और एसएचओ इंस्पेक्टर अरुण कुमार के तबादले के आदेश जारी किए। समिति के सर्कुलर के अनुसार एफआईआर 248/2026 के नामजद आरोपियों को पकड़ने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाने की बात भी कही गई। इसके बाद हड़ताल वापस ले ली गई और पटियाला हाउस कोर्ट से पुलिस मुख्यालय तक प्रस्तावित पैदल मार्च भी रद्द कर दिया गया।

पुलिस मुख्यालय पर पुलिसकर्मियों का धरना

वकीलों का आंदोलन थमा तो तबादलों से नाराज पुलिसकर्मियों का असंतोष सामने आया। सोमवार, 2 नवंबर को करीब 80 पुलिसकर्मी पुलिस मुख्यालय के बाहर जमा हुए। वे पुलिस आयुक्त से मिलकर अपनी बात रखना चाहते थे और तबादलों पर नाराज थे। रिपोर्टों के अनुसार करीब तीन घंटे तक यह जमावड़ा चला। बाद में पुलिसकर्मियों को मुख्यालय के भीतर बुलाकर आयुक्त से बातचीत कराई गई।

कुछ रिपोर्टों में कहा गया है कि प्रदर्शनकारियों ने एसीपी और एसएचओ की बहाली की मांग की और मुख्यालय परिसर में नारेबाजी हुई। इसे दिल्ली पुलिस के इतिहास में असामान्य बताया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों को सड़क पर धरना न देने को कहा गया था। एक रिपोर्ट के मुताबिक प्रदर्शन का नेतृत्व एसीपी मनस्वी वशिष्ठ ने किया, हालांकि अलग-अलग रिपोर्टों में उनकी भूमिका के ब्योरे में फर्क है।

2019 के तीस हजारी टकराव की याद

इस घटनाक्रम ने नवंबर 2019 के तीस हजारी कोर्ट टकराव की यादें ताजा कर दी हैं। तब पार्किंग विवाद पर पुलिस और वकीलों में हिंसक झड़प हुई थी, वकीलों ने कई दिन हड़ताल की थी और दिल्ली पुलिस के जवानों ने भी मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन किया था।

निलंबन पर उठते सवाल

निलंबन के बाद बहस तेज हो गई है। एक पक्ष का तर्क है कि वर्दीधारी बल में अनुशासन सर्वोपरि है, इसलिए मुख्यालय के बाहर प्रदर्शन में अगुवाई पर कार्रवाई जायज है। दूसरे पक्ष का कहना है कि पुलिसकर्मियों की शिकायतों के समाधान का आंतरिक तंत्र कमजोर दिखा है। इसी वजह से असंतोष सड़क तक आया। सोशल मीडिया पर भी इस मामले पर तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं।

अब आगे क्या

मूल मामले (FIR 248/2026) में आरोपियों की गिरफ्तारी की स्थिति पर नजर रहेगी। वकीलों के खिलाफ दर्ज जवाबी मामले का भविष्य भी देखना होगा। एसीपी के निलंबन के खिलाफ विभागीय या कानूनी स्तर पर क्या कदम उठाए जाते हैं। वकीलों की समन्वय समिति और दिल्ली पुलिस नेतृत्व की आगे की प्रतिक्रिया।

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