CBI ने ग्रेटर नोएडा PNB फ्रॉड केस में शुरू की जांच, महिला कर्मचारी दीपांशी समेत 8 पर FIR

गाजियाबाद/ग्रेटर नोएडा: ग्रेटर नोएडा के सेक्टर-पाई स्थित पंजाब नेशनल बैंक (PNB) शाखा में ग्राहकों के खातों से कथित तौर पर 10.24 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का मामला सामने आने के बाद सेंट्रल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (CBI) ने जांच शुरू कर दी है। CBI की गाजियाबाद एंटी करप्शन ब्रांच ने गुरुवार (29 अक्टूबर) को बैंक की महिला कर्मचारी दीपांशी समेत आठ लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है।

बैंक की शिकायत के अनुसार, दीपांशी ने अन्य अधिकारियों के लॉगिन क्रेडेंशियल्स (यूजर आईडी और पासवर्ड) का दुरुपयोग कर ग्राहकों के बचत खातों और फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) से बिना उनकी अनुमति या निर्देश के पैसे निकाले और उन्हें अपने सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया। आरोप है कि यह अनियमितता करीब तीन साल तक चलती रही।

कैसे खुला मामला?

16 सितंबर 2026 को ग्रेटर नोएडा की संगीता नाम की महिला अपने पति और बेटी के साथ पासबुक अपडेट कराने शाखा पहुंचीं। पासबुक में उनके खाते से तीन ऐसे ट्रांजैक्शन दिखे, जिनकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। ब्रांच हेड उस समय मौजूद नहीं थे। कर्मचारी दीपांशी ने लेनदेन को सही बताया। बाद में बैंक चीफ मैनेजर अजय कुमार पांडे की शिकायत पर जांच शुरू हुई।

पूछताछ में दीपांशी ने कथित तौर पर बताया कि ये ट्रांजैक्शन आशुतोष कुमार पाठक के निर्देश पर किए गए थे। उसने अधिकारियों की जानकारी और मंजूरी के बिना उनके लॉगिन का इस्तेमाल कर रकम निकाली थी। इन ट्रांजैक्शन से जुड़े वाउचर भी नष्ट कर दिए गए। जांच में पता चला कि आशुतोष पाठक का खाता खुद दीपांशी ने ही खुलवाया था।

आरोपी और तरीका

FIR में नामजद आरोपी हैं—दीपांशी (बैंक कर्मचारी), आशुतोष कुमार पाठक, प्रदीप कुमार, मेमबंती देवी, प्रियंका कुमारी, शांति देवी, शालिनी और सरोज देवी। बैंक का आरोप है कि ग्राहकों के खातों से निकाली गई रकम सीधे या अलग-अलग खातों के जरिए घुमाकर आशुतोष पाठक और अन्य के खातों तक पहुंचाई गई। कुछ रकम गोवा, मुंबई और झारखंड के खातों में भी ट्रांसफर होने की जानकारी सामने आई है।

बैंक की प्रारंभिक जांच में छह अन्य अधिकारियों के लॉगिन क्रेडेंशियल्स का दुरुपयोग भी पाया गया। कोर बैंकिंग सिस्टम (CBS) के जरिए अनधिकृत ट्रांजैक्शन किए गए। बैंक ने प्रिवेंशन ऑफ करप्शन एक्ट की धारा 17A के तहत सक्षम प्राधिकारी से मंजूरी लेकर CBI में शिकायत दर्ज कराई।

बड़े संदर्भ में मामला

इस शाखा (सेक्टर पाई-1/ऐच्छर क्षेत्र) से जुड़े ग्राहकों की शिकायतें बढ़ रही हैं। कई खाताधारकों (ज्यादातर किसान) ने दावा किया है कि उनकी FD बिना अनुमति तोड़ी गईं और बचत खातों से करोड़ों रुपये गायब हो गए। कुछ रिपोर्टों में कुल हेराफेरी 35 करोड़ रुपये तक बताई जा रही है, हालांकि CBI की मौजूदा FIR 10.24 करोड़ रुपये की प्रारंभिक राशि पर आधारित है। जांच पूरी होने पर यह आंकड़ा बढ़ सकता है।

बैंक ने कई कर्मचारियों (मैनेजर सहित) को सस्पेंड कर दिया है और आंतरिक जांच शुरू की है। कुछ ग्राहकों के दावों का आंशिक निपटान भी किया गया है। ग्राहक शाखा के बाहर प्रदर्शन भी कर चुके हैं। पुलिस की बीटा-2 कोतवाली में भी संबंधित शिकायतें दर्ज हैं।

CBI अब बैंक रिकॉर्ड, अनधिकृत ट्रांजैक्शन, FD से जुड़े दस्तावेज और संबंधित खातों की विस्तृत जांच कर रही है। एजेंसी अज्ञात लोक सेवकों की भूमिका भी जांच रही है। यह मामला बैंकिंग सिस्टम में आंतरिक नियंत्रण और कर्मचारियों द्वारा क्रेडेंशियल्स के दुरुपयोग की गंभीर खामियों को उजागर करता है। जांच के आगे के नतीजों का इंतजार है।

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