छठ पूजा से पहले यमुना के पानी में बढ़ा जहर! सात दिन में BOD 27% बढ़ा, काला पड़ने लगा पानी, बदबू से बढ़ी चिंता

नोएडा। छठ पूजा से पहले यमुना नदी के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता बढ़ने लगी है। यमुना में प्रदूषण का स्तर लगातार बढ़ रहा है। नदी के पानी का रंग हल्का काला पड़ने के साथ दुर्गंध आने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़े भी स्थिति की गंभीरता की ओर इशारा कर रहे हैं। महज सात दिनों के भीतर यमुना के पानी में जैविक प्रदूषण का प्रमुख संकेतक BOD (बायोकेमिकल ऑक्सीजन डिमांड) करीब 27 प्रतिशत बढ़ गया है।

उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (UPPCB) के आंकड़ों के मुताबिक, 21 से 28 सितंबर के बीच एक सप्ताह में पानी का BOD स्तर 14.2 मिलीग्राम प्रति लीटर से बढ़कर 18 मिलीग्राम प्रति लीटर पहुंच गया। इसी अवधि में COD (केमिकल ऑक्सीजन डिमांड) भी 73.6 से बढ़कर 84.8 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया। ये आंकड़े बताते हैं कि यमुना के पानी में प्रदूषण का दबाव बढ़ा है।

पानी में निलंबित ठोस पदार्थों की मात्रा भी बढ़ी

प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के आंकड़ों के अनुसार, पानी में मौजूद निलंबित ठोस पदार्थों (TSS) की मात्रा भी 114 से बढ़कर 126 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गई है। इसके अलावा पानी की गंदलापन मापने वाली टर्बिडिटी में भी वृद्धि दर्ज की गई है। यह 27 से बढ़कर 29 NTU तक पहुंच गई। इन आंकड़ों से साफ है कि यमुना के पानी की गुणवत्ता में एक सप्ताह के भीतर कई स्तरों पर गिरावट दर्ज की गई है।

ओखला बैराज के पास भी पानी की गुणवत्ता खराब

ओखला बैराज के आसपास भी यमुना के पानी की गुणवत्ता को लेकर चिंता जताई गई है। यहां एक सप्ताह में पानी की गुणवत्ता खराब होने के संकेत मिले हैं। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, BOD का स्तर 12 से बढ़कर 15 मिलीग्राम प्रति लीटर पहुंच गया। हालांकि, पानी में घुलित ऑक्सीजन के स्तर में लगभग 0.5 मिलीग्राम प्रति लीटर का सुधार दर्ज किया गया, लेकिन इसके बावजूद ऑक्सीजन का स्तर संतोषजनक स्थिति में नहीं पहुंचा है।

पिछले साल भी बेहद खराब थी यमुना की स्थिति

यमुना में प्रदूषण की समस्या नई नहीं है। पिछले साल अक्टूबर 2025 में भी हालात बेहद खराब दर्ज किए गए थे। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड की रिपोर्ट के अनुसार, सेक्टर-11 के पास 6 अक्टूबर को BOD 70 और COD 348 मिलीग्राम प्रति लीटर दर्ज किया गया था।

वहीं 27 अक्टूबर को BOD बढ़कर 72 और COD 336 मिलीग्राम प्रति लीटर हो गया था। इस साल अक्टूबर के उपलब्ध आंकड़ों में BOD में करीब 2.9 प्रतिशत की वृद्धि, जबकि COD में लगभग 3.4 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई है।

छठ पूजा से पहले प्रशासन के सामने चुनौती

छठ पूजा के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यमुना के घाटों पर पहुंचते हैं और नदी में खड़े होकर सूर्य देव को अर्घ्य देते हैं। ऐसे में नदी के पानी का लगातार प्रदूषित होना चिंता का विषय है।

सवाल यह है कि जब छठ पूजा से पहले ही यमुना के पानी में प्रदूषण बढ़ने के संकेत मिल रहे हैं तो संबंधित विभाग नदी की सफाई और प्रदूषण रोकने के लिए क्या कदम उठा रहे हैं? केवल घाटों की सफाई और अस्थायी व्यवस्थाओं से समस्या का समाधान नहीं होगा। इसके लिए नालों के गंदे पानी को यमुना में गिरने से रोकना और प्रदूषण के स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई करना जरूरी है। यमुना की मौजूदा स्थिति एक बार फिर सरकारी दावों और जमीनी हकीकत के बीच अंतर को सामने ला रही है। छठ पूजा से पहले नदी की सफाई और पानी की गुणवत्ता सुधारना प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

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