नोएडा, गौतमबुद्धनगर पुलिस कमिश्नरेट में गुरुवार को बड़ा प्रशासनिक बदलाव हुआ। पुलिस कमिश्नर लक्ष्मी सिंह ने 2019 बैच की आईपीएस अधिकारी प्रीति यादव को नोएडा जोन-1 का नया डीसीपी नियुक्त किया है। नोएडा जोन की कमान पहली बार किसी महिला अधिकारी को मिली है। इससे पहले प्रीति यादव कमिश्नरेट में एडिशनल डीसीपी (महिला सुरक्षा व साइबर क्राइम) के पद पर तैनात थीं।
हेड कांस्टेबल की बेटी से ‘स्टार कॉप’ तक
मूल रूप से हरियाणा के रेवाड़ी की रहने वाली प्रीति यादव ने 2019 में अपने पहले ही प्रयास में महज 22 साल की उम्र में UPSC परीक्षा पास की। उन्हें 466वीं रैंक मिली। उनके पिता मुकेश यादव चंडीगढ़ पुलिस में हेड कांस्टेबल रहे हैं। पिता की खाकी वर्दी देखकर ही उन्होंने पुलिस अफसर बनने का सपना देखा। प्रीति यादव को पुलिस और जनता के बीच की दूरी घटाने की पहल के लिए जाना जाता है। कमिश्नरेट परिसर (सेक्टर-108) में खुला ‘कैफे रिस्टा’ उनकी इसी सोच का नतीजा है, जो सोशल मीडिया पर खूब चर्चा में रहा।
साइबर ठगी: सबसे बड़ी चुनौती
नोएडा जोन-1 में बहुमंजिला सोसायटियां, बड़े कॉरपोरेट दफ्तर और वीवीआईपी मूवमेंट हैं। दिल्ली-एनसीआर से सटा होने के कारण इसे कानून-व्यवस्था के लिहाज से संवेदनशील माना जाता है। यहां की सबसे बड़ी चुनौती साइबर ठगी और बढ़ते ऑनलाइन अपराध हैं। साइबर क्राइम और महिला सुरक्षा की कमान पहले संभाल चुकी प्रीति यादव को इस क्षेत्र का अनुभव है। अब देखना होगा कि जोन-1 के डीसीपी के रूप में वे साइबर ठगों के नेटवर्क पर कितनी सख्ती कर पाती हैं।
श्रमिक आंदोलन के बाद पुलिस की भूमिका पर नजर
इस साल नोएडा में वेतन बढ़ोतरी की मांग को लेकर हुए श्रमिक आंदोलन ने पुलिस के सामने अलग तरह की चुनौती रखी। 13 अप्रैल को करीब 42 हजार श्रमिक सड़कों पर उतरे थे। उस दिन पुलिस से झड़प के बाद पथराव हुआ और वाहनों में आग लगा दी गई। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई की। भीड़ को भड़काने और हिंसा-आगजनी के आरोप में दो आरोपियों पर रासुका (NSA) लगाई गई। पर यह कार्रवाई विवादों से भी जुड़ी रही। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इनमें से एक आरोपी की NSA हिरासत रद्द कर दी। आंदोलन में शामिल लोगों और पुलिस के बीच यह खींचतान आगे भी चर्चा में रहेगी। इस पूरे घटनाक्रम से एक अहम सवाल निकलता है: पुलिस हिंसा और अराजकता पर सख्ती करते हुए भी शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाले आम मजदूरों को कैसे सुरक्षित रखेगी, और जिन्हें गलत तरीके से परेशान किया गया हो, उन्हें न्याय दिलाने में क्या भूमिका निभाएगी? कम्युनिटी पुलिसिंग और महिला सुरक्षा पर काम कर चुकी नई डीसीपी से लोग संतुलित रवैये की उम्मीद कर रहे हैं।
आगे क्या?
कमिश्नर लक्ष्मी सिंह खुद यूपी की पहली महिला पुलिस कमिश्नर हैं। उन्होंने एक बार फिर महिला अधिकारी की क्षमता पर भरोसा जताया है। साइबर ठगी रोकना, अपराध और अपराधियों पर नकेल कसना और श्रमिकों-आम नागरिकों का भरोसा जीतना प्रीति यादव के सामने प्रमुख कसौटियां होंगी। इसमें वे कितनी सफल होती हैं, यह आने वाला समय ही बताएगा।

