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Gautam Budh Nagar Bar Association President Manoj Bhati License Cancelled, फर्जी डिग्री और हड़ताल मामले में बड़ी कार्रवाई Gautam Budh Nagar Bar Association President Manoj Bhati License Cancelled, फर्जी डिग्री और हड़ताल मामले में बड़ी कार्रवाई

Gautam Budh Nagar Bar Association President Manoj Bhati License Cancelled, फर्जी डिग्री और हड़ताल मामले में बड़ी कार्रवाई

ग्रेटर नोएडा/नई दिल्ली, उत्तर प्रदेश बार काउंसिल की अनुशासन समिति ने गौतमबुद्ध नगर जिला दीवानी एवं फौजदारी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अधिवक्ता मनोज कुमार भाटी का वकालत लाइसेंस निरस्त कर दिया है। समिति ने उनकी तीन वर्षीय एलएलबी डिग्री को पूरी तरह अमान्य और अवैध करार दिया। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2026 में उनके नेतृत्व वाली बार एसोसिएशन के खिलाफ अवमानना याचिका में सख्त निर्देश जारी किए थे।

लाइसेंस निरस्त करने के कारण

अनुशासन समिति के आदेश के अनुसार, मनोज कुमार भाटी 22 फरवरी 1991 से 30 अप्रैल 2009 तक भारतीय वायुसेना में सार्जेंट के पद पर सेवारत थे। सेवा के दौरान उन्होंने विभाग की अनुमति और अनापत्ति प्रमाण-पत्र के बिना शिक्षा हासिल की। उन्होंने उस्मानिया विश्वविद्यालय, हैदराबाद से पत्राचार माध्यम से एक वर्षीय स्नातक (बीए) डिग्री ली और उसके आधार पर चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से संबद्ध जनहित कॉलेज ऑफ लॉ, ग्रेटर नोएडा में वर्ष 2004 में तीन वर्षीय एलएलबी कोर्स में प्रवेश लिया। 2007 में उन्होंने 76 प्रतिशत उपस्थिति दिखाकर डिग्री प्राप्त की।

विश्वविद्यालय के शैक्षणिक नियमों के अनुसार, 11+3 या 12+2+2 पैटर्न वाले उम्मीदवारों को स्नातकोत्तर या एलएलबी में प्रवेश के लिए एक वर्षीय ब्रिज कोर्स अनिवार्य है। भाटी ने यह ब्रिज कोर्स नहीं किया। वायुसेना के सेवा नियमों के तहत सेवारत कर्मियों को व्यावसायिक डिग्री के लिए अनुमति लेना जरूरी था, जो उनके पास नहीं थी। डिस्चार्ज सर्टिफिकेट में स्पष्ट है कि वे 30 अप्रैल 2009 तक सेवा में थे और 1 मई 2009 से स्ट्राइक ऑफ किए गए।

सबसे गंभीर आरोप यह है कि उन्होंने 24 अप्रैल 2009 और 26 अप्रैल 2009 को उत्तर प्रदेश बार काउंसिल में रजिस्ट्रेशन के लिए झूठे शपथ-पत्र और घोषणा-पत्र दाखिल किए। इनमें उन्होंने दावा किया कि वे किसी नौकरी, व्यापार या व्यवसाय में कार्यरत नहीं हैं, जबकि उस समय वे वायुसेना में सेवारत थे। समिति ने इसे अधिवक्ता अधिनियम 1961 की धारा 35 के तहत कदाचार माना और लाइसेंस निरस्त करने का आदेश दिया। आदेश की प्रति संबंधित अधिकारियों को भेज दी गई है। शिकायतकर्ता वीरेंद्र सिंह (गुड्डू) ने बार काउंसिल और अन्य मंचों पर विस्तृत दस्तावेज पेश किए थे, जिनमें डिस्चार्ज बुक, उपस्थिति प्रमाण-पत्र, विश्वविद्यालय के आरटीआई उत्तर और शपथ-पत्र शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट का अवमानना आदेश

30 अप्रैल 2026 को मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जोयमाल्या बागची की पीठ ने वीरेंद्र सिंह बनाम मनोज कुमार भाटी की अवमानना याचिका (डायरी नंबर 16535/2026) का निपटारा किया। याचिका में आरोप था कि सुप्रीम कोर्ट के 20 दिसंबर 2024 के आदेश (एसएलपी सिविल नंबर 19804-19805/2024) के बावजूद, जिसमें उत्तर प्रदेश की सभी बार एसोसिएशनों को कार्य दिवसों पर हड़ताल या काम से विरत रहने के प्रस्ताव पारित करने से रोका गया था, गौतमबुद्ध नगर बार एसोसिएशन ने बार-बार ऐसे प्रस्ताव पारित किए।

पीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता के आरोपों में कुछ दम है। उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश या उनके द्वारा गठित तीन-न्यायाधीश समिति को 20 दिसंबर 2024 के आदेश के पैरा 9 के अनुसार बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों के खिलाफ तत्काल कार्रवाई करनी चाहिए थी। पीठ ने जिला एवं सत्र न्यायाधीश, गौतमबुद्ध नगर को एक सप्ताह में रिपोर्ट भेजने का निर्देश दिया और अवमानना कार्यवाही का निपटारा कर दिया। उच्च न्यायालय की समिति को रिपोर्ट पर विचार कर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया।

पृष्ठभूमि और प्रतिक्रिया

मनोज भाटी इससे पहले कई बार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष चुने जा चुके हैं। उनके खिलाफ फर्जी डिग्री और धोखाधड़ी के आरोपों में एफआईआर भी दर्ज हुई थी, जिसमें उन्हें अंतरिम जमानत मिली थी। भाटी ने आरोपों को राजनीतिक साजिश करार दिया था और दावा किया था कि उनकी डिग्री वैध है तथा वायुसेना में अनुमति लेकर शिक्षा ली गई थी। हालांकि, बार काउंसिल की अनुशासन समिति ने जांच के बाद उनके दावों को खारिज कर दिया। यह मामला कानूनी पेशे की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े करता है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशनों की हड़तालों पर सख्ती बरत रहा है, जबकि बार काउंसिल शैक्षणिक योग्यता और सत्यनिष्ठा के मुद्दे पर कार्रवाई कर रही है। आगे की कार्यवाही उच्च न्यायालय की समिति और संबंधित थानों में जारी रह सकती है।

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